जनभावना की आवाज बनी पार्षद की पहल, मावली माता मड़ई में झूलों की दर तय करने व यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
विश्व प्रसिद्ध मेले में अव्यवस्था पर उठी चिंता, सोशल मीडिया पर पार्षद प्रवीण जैन की पहल को मिल रहा जनसमर्थन


पार्षद द्वारा कलेक्टर को दिए गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मावली माता मड़ई केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु दूर-दराज के गांवों से पैदल, बाइक, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य साधनों से पहुंचते हैं। पिछले वर्षों के अनुभवों के आधार पर यह सामने आया है कि झूलों और मनोरंजन साधनों की दरें मनमाने ढंग से वसूली जाती हैं। महंगाई के इस दौर में ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। कई बार बच्चों की खुशी के नाम पर परिजनों को तय से अधिक भुगतान करना पड़ता है, जिससे मेले की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। पार्षद ने मांग की है कि प्रशासन स्तर पर अधिकतम दरें तय हों, हर झूले के सामने स्पष्ट रूप से रेट लिस्ट प्रदर्शित की जाए और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो।
पत्र में यातायात व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया गया है। नारायणपुर जिले की भौगोलिक परिस्थितियां, संकरी सड़कें और सीमित परिवहन संसाधन मेले के दिनों में भीड़ के दबाव में और जटिल हो जाती हैं। ओवरलोडिंग, ट्रैक्टर-ट्रॉली में क्षमता से अधिक सवारियां, पिकअप और निजी वाहनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी—ये सब दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ाते हैं। पार्षद ने मेले के दौरान विशेष यातायात योजना, अस्थायी पार्किंग स्थल, एकतरफा यातायात व्यवस्था, हेल्प डेस्क और मेडिकल सहायता केंद्रों की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है। साथ ही, पुलिस और प्रशासन द्वारा सतत निगरानी अभियान चलाकर ओवरलोडिंग व लापरवाही पर त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है।
नगर में इस पहल को लेकर सकारात्मक माहौल है। स्थानीय व्यापारियों का भी मानना है कि दरों का विनियमन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक विवादों पर विराम लगेगा। श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी तो स्थानीय कारोबार को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। समाजसेवियों का कहना है कि मेले की गरिमा बनी रहे, इसके लिए सुरक्षा, स्वच्छता और अनुशासन को प्राथमिकता देना जरूरी है। सोशल मीडिया पर साझा हो रहे संदेशों में लोग कलेक्टर से आग्रह कर रहे हैं कि जनहित में पार्षद की मांगों पर त्वरित निर्णय लिया जाए और प्रशासनिक अमला अभी से तैयारी में जुटे।
आम नागरिकों की अपेक्षा है कि कलेक्टर स्तर से समन्वित कार्ययोजना तैयार कर संबंधित विभागों—पुलिस, परिवहन, नगर पालिका, स्वास्थ्य और महिला-बाल विकास—के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियां तय की जाएं। मेले से पहले मॉक ड्रिल, भीड़ प्रबंधन की रिहर्सल और संवेदनशील स्थानों की पहचान कर सुरक्षा घेरा मजबूत किया जाए। झूलों के संचालन से जुड़े ठेकेदारों का सत्यापन, लाइसेंस की जांच और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य किया जाए। बच्चों के लिए सुरक्षित झूले, अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।
नगर के प्रबुद्धजन मानते हैं कि पार्षद प्रवीण जैन की पहल राजनीति से ऊपर उठकर जनहित की भावना से प्रेरित है। यह पहल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय का उदाहरण बन सकती है। यदि समय रहते दरों का निर्धारण और यातायात प्रबंधन लागू किया जाता है, तो मावली माता मड़ई न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि सुव्यवस्थित आयोजन का मॉडल भी प्रस्तुत करेगा। इससे भविष्य में अन्य बड़े आयोजनों के लिए भी प्रशासनिक रूपरेखा तय करने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, विश्व प्रसिद्ध मावली माता मड़ई के सफल और सुरक्षित आयोजन के लिए जनभावना के अनुरूप ठोस कदम उठाने की जरूरत है। पार्षद द्वारा कलेक्टर को सौंपा गया पत्र इस दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है। अब नजरें प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हैं—क्या इस बार मेले में श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुलभ और सम्मानजनक अनुभव मिलेगा? नगरवासियों को उम्मीद है कि जनहित में यह पहल जमीन पर उतरेगी और मावली माता मड़ई एक नई मिसाल कायम करेगा।




