चार दशक बाद अबूझमाड़ में बदली तस्वीर: ‘नो सिग्नल’ से सीधे नेटवर्क युग में प्रवेश
ताहकाडोंड में पहली बार मोबाइल टावर, दूरस्थ गांवों को मिली सीधी कनेक्टिविटी | अब सैकड़ों किमी की दूरी नहीं, गांव में ही कॉल-इंटरनेट और सरकारी सेवाएं उपलब्ध

(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 04 मई। कभी नक्सलवाद के साये में चार दशक तक दुनिया से कटे रहे अबूझमाड़ के सुदूर इलाकों में अब बदलाव की बयार साफ दिखने लगी है। दुर्गम वनांचल ताहकाडोंड गांव में पहली बार मोबाइल टावर की स्थापना ने ‘नो नेटवर्क ज़ोन’ की पहचान को इतिहास बना दिया है। अब यहां के ग्रामीण सीधे मोबाइल नेटवर्क से जुड़ गए हैं, जिससे शासन-प्रशासन की पहुंच भी अंतिम छोर तक मजबूत हो रही है।
विकासखंड ओरछा के ग्राम पंचायत मेटानार अंतर्गत ताहकाडोंड सहित आसपास के गांवों में पहले एक कॉल करने के लिए पहाड़ियों पर चढ़ना या कई किलोमीटर दूर सड़क तक जाना मजबूरी थी। अब टावर लगने के बाद ग्रामीण अपने गांव में ही कॉल और इंटरनेट सेवाओं का सहज उपयोग कर पा रहे हैं।
कलेक्टर नम्रता जैन ने इसे अबूझमाड़ के लिए बड़ा परिवर्तन बताते हुए कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी मजबूत करना शासन की प्राथमिकता है और ताहकाडोंड में टावर स्थापना इस दिशा में निर्णायक कदम है। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में अन्य दूरस्थ इलाकों में भी नेटवर्क विस्तार किया जाएगा।
नए मोबाइल टावर से ताहकाडोंड (125 जनसंख्या), कदेर (139) और ब्रेहबेड़ा (120) जैसे गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों को सीधा लाभ मिल रहा है।
आपातकालीन सेवाओं को मिला सहारा
नेटवर्क उपलब्ध होने से अब ग्रामीण 108 एंबुलेंस सेवा को सीधे कॉल कर पा रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों और अधिकारियों से त्वरित संपर्क संभव होने से आपात स्थिति में समय पर इलाज मिलना सुनिश्चित हो रहा है।
डिजिटल सेवाओं का रास्ता खुला
मोबाइल नेटवर्क ने शासन की योजनाओं को गांव तक पहुंचाने का रास्ता आसान कर दिया है। अब ग्रामीण डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन आवेदन, बैंकिंग सेवाएं और अन्य ई-गवर्नेंस सुविधाओं का लाभ गांव में ही उठा रहे हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और समय व संसाधनों की भी बचत हो रही है।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल को क्षेत्र के विकास की नई शुरुआत बताते हुए शासन के प्रति आभार जताया है। अबूझमाड़ में संचार क्रांति का यह कदम न केवल सुविधा बढ़ा रहा है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव की मजबूत नींव भी रख रहा है।




