भालू के हमले में घायल 7 वर्षीय मासूम को ITBP ने दिया नया जीवन
अबूझमाड़ के पदमकोट वन क्षेत्र में हादसा, परिजन बाइक से लेकर पहुंचे कुतुल कैंप; 30 मिनट में मेडिकल टीम ने किए टांके, जिला अस्पताल रेफर

नारायणपुर, 1 सितंबर। अबूझमाड़ के दुर्गम वन क्षेत्र में भालू के हमले से गंभीर रूप से घायल 7 वर्षीय मासूम बच्ची के लिए 41वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवान उस वक्त फरिश्ता बनकर सामने आए, जब परिजन उसे बाइक से लेकर कुतुल कैंप पहुंचे। सोमवार को हुए इस हादसे के बाद कैंप की मेडिकल टीम ने बिना समय गंवाए बच्ची का उपचार शुरू किया। करीब 30 मिनट के भीतर घावों पर टांके लगाए गए, ड्रेसिंग की गई और जरूरी जीवनरक्षक दवाएं दी गईं। त्वरित उपचार के बाद बच्ची की हालत स्थिर हुई।
जंगल में भालू ने किया हमला, गंभीर घायल हुई मासूम
जानकारी के अनुसार, सोमवार को नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के पदमकोट वन क्षेत्र में 7 वर्षीय बच्ची पर भालू ने हमला कर दिया। हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। दुर्गम वन क्षेत्र में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण था।

ऐसे में परिजनों ने समय गंवाए बिना बच्ची को बाइक से 41वीं वाहिनी ITBP के कुतुल कैंप पहुंचाया। घायल बच्ची की हालत देखकर कैंप में मौजूद जवानों और मेडिकल टीम ने तत्काल उपचार शुरू कर दिया।
माइनर ओटी में आधे घंटे चला उपचार
सेनानी बेनुधर नायक के मार्गदर्शन में मेडिकल ऑफिसर डॉ. अक्षय राजपुरोहित और उनकी टीम ने बच्ची का प्राथमिक उपचार किया। गंभीर घावों को देखते हुए उसे कैंप की माइनर ओटी में ले जाया गया। मेडिकल टीम ने करीब 30 मिनट के भीतर घावों पर टांके लगाए और ड्रेसिंग की।
इसके साथ ही बच्ची को आपातकालीन जीवनरक्षक दवाएं दी गईं, ताकि उसकी स्थिति को स्थिर किया जा सके। सीमित संसाधनों के बावजूद मेडिकल टीम की तत्परता से बच्ची को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सकी।
बेटी को घायल देख मां भी सदमे में
हादसे के बाद बच्ची की मां भी सदमे में आ गई थीं। बेटी की गंभीर स्थिति देखकर उनकी हालत भी बिगड़ गई। ITBP की मेडिकल टीम ने मां का भी प्राथमिक उपचार किया। उपचार के बाद मां और बच्ची दोनों की स्थिति स्थिर बताई गई।
कैंप स्तर पर जरूरी उपचार देने के बाद दोनों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए जिला अस्पताल, नारायणपुर रेफर किया गया।
दुर्गम अबूझमाड़ में फिर दिखी ITBP की मानवीय भूमिका
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और वन क्षेत्र में सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों को आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में सुरक्षा बलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इस घटना में भी ITBP के जवानों और मेडिकल टीम ने संवेदनशीलता एवं तत्परता का परिचय दिया।
भालू के हमले के बाद यदि घायल बच्ची को उपचार मिलने में देरी होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। ऐसे समय पर कुतुल कैंप में उपलब्ध चिकित्सा सुविधा और टीम की त्वरित कार्रवाई मासूम के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।
जवानों की तत्परता की हो रही सराहना
घटना के बाद क्षेत्र में ITBP के जवानों की मानवीय पहल की सराहना हो रही है। ग्रामीणों के लिए सुरक्षा के साथ आपातकालीन चिकित्सा सहायता का यह भरोसा दुर्गम इलाकों में सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदाय के बीच विश्वास को भी मजबूत करता है।
भालू के हमले से घायल मासूम के लिए सोमवार की वह घड़ी बेहद भयावह थी, लेकिन कुतुल कैंप पहुंचते ही समय पर मिले उपचार ने हालात संभाल लिए। ITBP की मेडिकल टीम की त्वरित कार्रवाई ने न केवल बच्ची को तत्काल राहत दी, बल्कि दुर्गम अबूझमाड़ में मानवीय सेवा की एक मिसाल भी कायम की।




