जंगलों के बीच तिरंगा फहराकर चिकित्सक ने पेश की मिसाल
अबूझमाड़ के सोनपुर में 22 साल से सेवा का संकल्प निभा रहे डॉ. धीरेंद्र मिश्रा ने ग्रामीणों के साथ मनाया स्वतंत्रता दिवस

नारायणपुर/सोनपुर। अबूझमाड़ की दुर्गम व घने जंगलों से घिरे सोनपुर गांव में स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सेवा और राष्ट्रप्रेम की मिसाल पेश कर दी। जहां आज भी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच चुनौती बनी हुई है, वहीं आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. धीरेंद्र मिश्रा ने स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों के साथ तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाया। बारिश के बीच भी ग्रामीणों का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरा परिसर भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।

22 साल से अबूझमाड़ में सेवा, ग्रामीणों के लिए बने भरोसे का नाम
डॉ. धीरेंद्र मिश्रा पिछले 22 वर्षों से अबूझमाड़ के इसी दुर्गम क्षेत्र में रहकर ग्रामीणों की सेवा कर रहे हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित सुविधाओं के बीच उन्होंने जरूरतमंदों की चिकित्सा सेवा को अपना दायित्व बनाया। उनके लिए यह क्षेत्र महज कार्यस्थल नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण की कर्मभूमि बन चुका है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब देशभर में तिरंगा शान से लहराया, तब अबूझमाड़ के सोनपुर में भी राष्ट्रीय ध्वज पूरे सम्मान के साथ फहराया गया। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
बारिश भी नहीं रोक सकी देशभक्ति
सोनपुर में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान बारिश हो रही थी। कई लोग छतरियां लेकर कार्यक्रम में पहुंचे, लेकिन मौसम की बाधा भी ग्रामीणों के उत्साह को नहीं रोक सकी। तिरंगे के रंगों से सजा परिसर और हाथों में लहराते राष्ट्रीय ध्वज देशभक्ति की भावना को और मजबूत कर रहे थे।
तिरंगा फहराए जाने के बाद उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगान और देशभक्ति के नारों के साथ राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। दुर्गम अबूझमाड़ के जंगलों के बीच गूंजती ‘भारत माता की जय’ की आवाज ने स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को खास बना दिया।
जहां सुविधाओं का अभाव, वहां उम्मीद बने चिकित्सक
अबूझमाड़ के दूरस्थ इलाकों में रहना और लगातार ग्रामीणों के बीच चिकित्सा सेवा देना आसान नहीं है। स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के बीच डॉ. मिश्रा ने लंबे समय से ग्रामीणों का उपचार कर उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का काम किया है। यही वजह है कि वे ग्रामीणों के लिए केवल चिकित्सक नहीं, बल्कि भरोसे और उम्मीद का सहारा बन चुके हैं।
उनकी 22 वर्षों की सेवा यह बताती है कि राष्ट्रसेवा केवल सीमा पर या बड़े शहरों में ही नहीं होती। देश के अंतिम छोर तक पहुंचकर जरूरतमंदों की सेवा करना भी राष्ट्रनिर्माण की उतनी ही महत्वपूर्ण कड़ी है।
अबूझमाड़ से निकला बड़ा संदेश
सोनपुर में स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन बदलते अबूझमाड़ की तस्वीर भी सामने लाता है। कभी दुर्गमता और अलगाव के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब राष्ट्रीय पर्वों पर ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी और तिरंगे के प्रति सम्मान की तस्वीरें सामने आ रही हैं।
जंगलों के बीच लहराता तिरंगा और 22 वर्षों से ग्रामीणों के बीच सेवा कर रहा एक चिकित्सक—सोनपुर की यह तस्वीर स्वतंत्रता के मायने को जमीन पर उतारती नजर आई।




