परिवहन संघ की सियासत का पटाक्षेप, नई कार्यकारिणी को मिली सरकारी मान्यता
171 सदस्यों के अविश्वास प्रस्ताव के बाद बदला नेतृत्व • सहायक पंजीयक कार्यालय ने नई कार्यकारिणी की सूची अभिलेख में की दर्ज • मनीष राठौर अध्यक्ष और अमित भद्र बने सचिव, अब आर्थिक संकट से उबारने की चुनौती

नारायणपुर। करीब एक महीने से मालक परिवहन संघ में चल रहा नेतृत्व विवाद आखिरकार थम गया। 171 सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद गठित नई कार्यकारिणी को अब प्रशासनिक स्तर पर भी मान्यता मिलने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। सहायक पंजीयक, फर्म एवं संस्थाएं, बस्तर संभाग, जगदलपुर ने संघ की ओर से प्रस्तुत जानकारी के आधार पर नई कार्यकारिणी की सूची अभिलेख में दर्ज करते हुए पत्र जारी किया है। इसके साथ ही लंबे समय से चल रही नेतृत्व की रस्साकशी पर विराम लग गया है।

जानकारी के अनुसार, 25 जून को संघ के 171 सदस्यों ने तत्कालीन कार्यकारिणी के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 17 जुलाई को आयोजित विशेष आमसभा में सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। हालांकि पूर्व पदाधिकारियों के पद छोड़ने को लेकर विवाद बना रहा, लेकिन अब सहायक पंजीयक कार्यालय द्वारा जारी पत्र के बाद नई कार्यकारिणी की वैधानिक स्थिति और स्पष्ट हो गई है।
पंजीयक कार्यालय ने दर्ज की नई कार्यकारिणी
24 जुलाई 2026 को जारी पत्र में सहायक पंजीयक कार्यालय ने बताया कि 17 जुलाई की आमसभा की जानकारी एवं आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन प्रस्तुत किए गए हैं। इसके आधार पर वर्ष 2026 के लिए संघ की कार्यकारिणी का अभिलेखीकरण किया गया है।
नई कार्यकारिणी
- अध्यक्ष – मनीष राठौर
- उपाध्यक्ष – मनीष शोरी
- सचिव – अमित भद्र
- संयुक्त सचिव – मंतोष साहू
- कोषाध्यक्ष – अभिजीत साहा
- सदस्य – शेख जमालुद्दीन
- सदस्य – देवव्रत श्रीवास्तव
(विशेष आमसभा में गोपाल बघेल को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।)

लेखा-जोखा पर अब भी उठ रहे सवाल
संघ के सदस्यों का आरोप है कि पूर्व कार्यकारिणी 31 मार्च के बाद भी वार्षिक आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत नहीं कर सकी, जबकि नियमों के अनुसार प्रत्येक वर्ष आमसभा में वित्तीय लेखा-जोखा प्रस्तुत करना अनिवार्य है। सदस्यों का कहना है कि वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना नई कार्यकारिणी की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
घटते ट्रक, बढ़ता कर्ज और जर्जर सड़कें
संघ के सामने सबसे बड़ी चुनौती ट्रक मालिकों की आर्थिक स्थिति सुधारने की है। खराब सड़कों, बढ़ती परिचालन लागत और समय पर भुगतान नहीं मिलने से कई ट्रक मालिक कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। कई वाहन फाइनेंस कंपनियों के यार्ड में खड़े हैं, जबकि अनेक मालिक गोल्ड लोन और निजी फाइनेंस के सहारे व्यवसाय चला रहे हैं।
राठौर बोले— हर सदस्य का विश्वास लौटाएंगे
नवनिर्वाचित अध्यक्ष मनीष राठौर ने कहा कि नई कार्यकारिणी का उद्देश्य किसी एक वर्ग नहीं, बल्कि संघ के प्रत्येक सदस्य के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और ट्रक मालिकों की समस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि संघ फिर से मजबूती के साथ आगे बढ़ सके।




