‘विग्रह से विश्वास’ की मिसाल बना मैत्री कैफे, आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलेगा सम्मानजनक रोजगार
नारायणपुर पुलिस की अभिनव पहल का शुभारंभ, स्थानीय संस्कृति और पुनर्वास को मिला नया मंच

मंत्री केदार कश्यप ने कहा- विकास, रोजगार और विश्वास ही स्थायी शांति की असली नींव
(कैलाश सोनी) नारायणपुर। नक्सल प्रभावित बस्तर में अब संघर्ष की जगह विश्वास और पुनर्वास की नई इबारत लिखी जा रही है। नारायणपुर पुलिस की अभिनव पहल के तहत डीआरजी परिसर में स्थापित ‘मैत्री कैफे’ का शुभारंभ किया गया। स्थानीय जनजातीय कला, बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक स्थापत्य शैली से सुसज्जित यह कैफे केवल खानपान का केंद्र नहीं, बल्कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, सामाजिक समरसता और जनसहभागिता का नया प्रतीक बनकर उभरा है।
छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा नारायणपुर विधायक केदार कश्यप ने मुख्य अतिथि के रूप में कैफे का उद्घाटन किया। इस अवसर पर नगर पालिका परिषद नारायणपुर के अध्यक्ष इंद्र प्रसाद बघेल, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

पुलिस कर्मियों के श्रम से तैयार हुआ अनूठा कैफे
मैत्री कैफे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका निर्माण पूरी तरह नारायणपुर पुलिस के विभागीय कर्मचारियों ने किया है। कर्मचारियों की कल्पनाशीलता, मेहनत और नवाचार से तैयार यह कैफे आधुनिक आतिथ्य और स्थानीय संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। इसके संचालन में आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है, जिससे उन्हें सम्मानजनक आजीविका और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
आत्मसमर्पित नक्सलियों से की आत्मीय चर्चा
उद्घाटन के बाद मंत्री केदार कश्यप ने आत्मसमर्पित नक्सलियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने पुनर्वास और स्वरोजगार से जुड़े प्रयासों की जानकारी ली तथा कहा कि विकास, रोजगार और विश्वास के माध्यम से ही स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि मुख्यधारा में लौटे लोगों को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस प्रकार के प्रयास समय की आवश्यकता हैं।

स्थानीय स्वाद और बस्तर की पहचान का संगम
अतिथियों के स्वागत के लिए विशेष वेलकम ड्रिंक के साथ बस्तर के पारंपरिक स्वाद से युक्त व्यंजन परोसे गए। भाजी वाला भजिया और इटैलियन कटलेट ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। अतिथियों ने कैफे की कलात्मक सज्जा, जनजातीय भित्ति चित्रों और प्राकृतिक परिवेश की सराहना करते हुए इसे बस्तर की पहचान को नई ऊंचाई देने वाला प्रयास बताया।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों का सम्मान
मैत्री कैफे के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले विभागीय कर्मचारियों को समारोह में सम्मानित किया गया। मंत्री केदार कश्यप ने उनके नवाचार और समर्पण की सराहना करते हुए प्रोत्साहन राशि प्रदान की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों द्वारा स्वयं तैयार किया गया यह कैफे टीमवर्क और जनसेवा की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।
पुलिस और समाज के बीच भरोसे का नया सेतु
पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुड़िया ने कहा कि मैत्री कैफे का उद्देश्य केवल एक कैफे स्थापित करना नहीं, बल्कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना और पुलिस तथा समाज के बीच विश्वास को और मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि नारायणपुर पुलिस सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक पुनर्वास और सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में भी लगातार कार्य कर रही है।
संघर्ष से संवाद तक का सफर
एक समय नक्सल हिंसा की घटनाओं से पहचाने जाने वाले बस्तर में अब पुनर्वास और विश्वास की नई कहानी लिखी जा रही है। ‘मैत्री कैफे’ उसी बदलते दौर का प्रतीक है, जहां सुरक्षा, विकास, रोजगार और सामाजिक समरसता को एक साथ जोड़कर सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। आने वाले समय में यह कैफे नागरिकों, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच संवाद और सहभागिता का महत्वपूर्ण केंद्र बनने के साथ आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास का प्रेरक मॉडल भी साबित हो सकता है।




