बदलते बस्तर की नई रफ्तार: रावघाट से दौड़ी लौह अयस्क की पहली मालगाड़ी
दल्लीराजहरा-रावघाट परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, मालगाड़ियों की आवाजाही शुरू; अब यात्री ट्रेन संचालन की उम्मीदें भी बढ़ीं

पहले इंजन और एक रैक मालगाड़ी का ट्रायल रहा सफल, बीएसपी प्रबंधन ने बताया बड़ी उपलब्धि
(कैलाश सोनी) नारायणपुर। बहुप्रतीक्षित दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना ने बस्तर के विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक पड़ाव पार कर लिया है। कुछ माह पूर्व रावघाट (सरंगीपाल) रेलवे स्टेशन तक ‘ऐरावत’ इंजन के सफल ट्रायल के साथ रेल पहुंचने का सपना साकार हुआ था और अब पहली बार रावघाट स्टेशन से लौह अयस्क का लदान शुरू हो गया है। मालगाड़ियों की आवाजाही शुरू होने के साथ ही नारायणपुर और आसपास के क्षेत्रों के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीदें भी प्रबल हो गई हैं।

जिला मुख्यालय से लगभग 20 से 25 किलोमीटर दूर स्थित रावघाट रेलवे स्टेशन पर खड़े लौह अयस्क से भरे वैगन और शुरू हुआ रेल परिचालन इस बात का संकेत है कि अब बस्तर की तस्वीर तेजी से बदल रही है। वर्षों तक नक्सलवाद और दुर्गम परिस्थितियों के कारण पिछड़ेपन की पहचान झेलने वाला यह क्षेत्र अब विकास की पटरी पर नई रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है।

वर्षों का इंतजार हुआ खत्म, परियोजना ने पकड़ी रफ्तार
दल्लीराजहरा-जगदलपुर रेल परियोजना को बस्तर के विकास की जीवनरेखा माना जाता रहा है। पहले चरण में रावघाट तक रेल लाइन का निर्माण पूरा होने और इंजन के सफल ट्रायल के बाद अब लौह अयस्क परिवहन की शुरुआत ने परियोजना को वास्तविक गति प्रदान कर दी है।
रेलवे स्टेशन परिसर में खड़ी मालगाड़ियां और लौह अयस्क लदान की प्रक्रिया शुरू होने को स्थानीय लोग ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह केवल खनिज परिवहन की शुरुआत नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक उत्थान का नया अध्याय है।
पहला इंजन और एक रैक मालगाड़ी का ट्रायल रहा सफल
रावघाट (सरंगीपाल) रेलवे स्टेशन तक पटरियां बिछाने का कार्य पूर्ण होने के बाद पहले इंजन का ट्रायल सफलतापूर्वक किया गया था। इसके बाद बुधवार को एक रैक मालगाड़ी ट्रायल के लिए रावघाट पहुंची, जिसका परीक्षण भी सफलता के साथ पूरा हुआ। ट्रायल की सफलता के बाद अब लौह अयस्क परिवहन का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
बीएसपी प्रबंधन ने बताया बड़ी उपलब्धि
रावघाट माइंस एवं भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) प्रबंधन के अधिकारी अनुपम बीस्ट ने बताया कि रावघाट (सरंगीपाल) रेलवे स्टेशन तक पटरियां बिछाने का कार्य पूर्ण होने के बाद पहले इंजन का ट्रायल सफलतापूर्वक किया गया था। इसके बाद एक रैक मालगाड़ी का ट्रायल भी सफलता के साथ संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि यह परियोजना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे लौह अयस्क परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
व्यापार, रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
रावघाट क्षेत्र देश के महत्वपूर्ण लौह अयस्क भंडारों में शामिल है। रेल परिवहन शुरू होने से खनिज आधारित उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति सुगम होगी तथा परिवहन लागत में कमी आएगी। इसके साथ ही व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित माल परिवहन शुरू होने से सहायक उद्योगों और सेवा क्षेत्रों का भी विकास होगा, जिससे नारायणपुर और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
यात्री ट्रेन संचालन की उम्मीदें भी बढ़ीं
मालगाड़ियों की आवाजाही शुरू होने के साथ ही अब लोगों की निगाहें यात्री रेल सेवा पर टिक गई हैं। वर्षों से रेल सुविधा का इंतजार कर रहे लोगों का मानना है कि आने वाले समय में यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू होने से विद्यार्थियों, कर्मचारियों, व्यापारियों और मरीजों को कम खर्च और कम समय में यात्रा की सुविधा मिल सकेगी।
नक्सलवाद की छाया से निकलकर विकास की राह पर बस्तर
एक समय ऐसा था जब बस्तर की पहचान नक्सल हिंसा और दुर्गम परिस्थितियों से होती थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ परिस्थितियों में तेजी से बदलाव आया है। रावघाट तक रेल पहुंचना और अब वहां से लौह अयस्क का परिवहन शुरू होना इसी परिवर्तन का प्रतीक बनकर सामने आया है।
रेल परियोजना के कारण सड़क, संचार और अन्य सुविधाओं का विस्तार भी हुआ है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलने लगा है। इससे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है।




