नारायणपुर

नक्सल मुक्त नारायणपुर अब ट्रैफिक जाम से जूझ रहा: सड़क बनी दुकान, किनारों पर खड़ी खनिज गाड़ियां, आमजन बेहाल

यातायात पुलिस ने व्यापारियों को बुलाया बैठक में, समाधान की कोशिश शुरू—लेकिन सवाल बरकरार: कब सुधरेगी व्यवस्था?

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। एक समय नक्सल प्रभाव से जूझता नारायणपुर अब विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसी विकास के साथ एक नई और गंभीर समस्या ने जन्म ले लिया है—बेतरतीब यातायात व्यवस्था। जिले के प्रमुख मार्गों, खासकर नारायणपुर-कोंडागांव और नारायणपुर-अंतागढ़ सड़क पर हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि आए दिन घंटों जाम लगना आम बात हो गई है।

पूर्व में प्रकाशित खबरों में भी इस अव्यवस्था को प्रमुखता से उठाया गया था, जिसमें बताया गया था कि भारी वाहनों, जर्जर सड़कों और अनियोजित ट्रैफिक के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। अब इसी मुद्दे पर यातायात पुलिस ने पहल करते हुए व्यापारियों को बैठक के लिए आमंत्रित किया है, ताकि समस्या का समाधान खोजा जा सके।


सड़क पर खड़ी माइनिंग गाड़ियां बन रहीं सबसे बड़ी बाधा

नारायणपुर जिले में खनिज परिवहन तेजी से बढ़ा है। आयरन ओर और अन्य खनिजों से भरी भारी-भरकम ट्रकें दिन-रात सड़कों पर दौड़ रही हैं। लेकिन समस्या सिर्फ इनके चलने से नहीं, बल्कि इनके खड़े होने से ज्यादा गंभीर हो गई है।

कोंडागांव और अंतागढ़ मार्ग पर इन ट्रकों की लंबी कतारें सड़क के दोनों किनारों पर खड़ी रहती हैं। कई बार ये कतारें इतनी लंबी होती हैं कि सड़क का आधा हिस्सा घेर लेती हैं, जिससे बाकी बचे हिस्से पर दोतरफा यातायात संचालित करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

नतीजा—जाम, दुर्घटनाएं और आमजन की परेशानी।


जब सड़क ही बन गई बाजार: ट्रकों के बीच चल रहा कारोबार

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब सड़कें सिर्फ आवागमन का साधन नहीं रह गई हैं, बल्कि व्यापार का केंद्र बन चुकी हैं।

मुख्य मार्गों पर पंचर बनाने की दुकानें सीधे सड़क पर ही लग रही हैं। बड़े-बड़े ट्रकों को सड़क के बीच खड़ा कर उनके टायर खोले जा रहे हैं, मरम्मत की जा रही है और फिर वही लगाए जा रहे हैं। इस दौरान घंटों तक सड़क बाधित रहती है।

इसी तरह खराब गाड़ियों की मरम्मत भी सड़क किनारे नहीं, बल्कि सड़क पर ही की जा रही है। इससे ट्रैफिक की रफ्तार पूरी तरह थम जाती है और दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।


शहर के भीतर भी हालात बदतर

समस्या सिर्फ हाईवे तक सीमित नहीं है। नारायणपुर शहर के अंदर की सड़कों की हालत भी कम खराब नहीं है।

जहां-जहां गैरेज और वर्कशॉप हैं, वहां सड़क किनारे ही गाड़ियां खड़ी कर दी जाती हैं। कई वाहन तो वर्षों से वहीं खड़े हैं, जो अब कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं।

इन कबाड़ गाड़ियों पर न तो प्रशासन की नजर है और न ही यातायात विभाग की कोई कार्रवाई दिखाई देती है। नतीजतन, सड़कों की चौड़ाई लगातार कम होती जा रही है और जाम की समस्या स्थायी बनती जा रही है।


छोटे ठेले वालों पर कार्रवाई, बड़े अतिक्रमण पर चुप्पी

स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि प्रशासन का रवैया दोहरा नजर आता है।

जहां एक ओर चाय या गुपचुप का ठेला लगाने वाले छोटे व्यापारियों से अस्थायी दखल शुल्क वसूला जाता है, वहीं वर्षों से सड़क पर कब्जा जमाए कबाड़ गाड़ियों और बड़े अतिक्रमणों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

यह असंतुलन न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि प्रशासन की प्राथमिकताओं पर भी गंभीर संदेह पैदा करता है।


पार्किंग व्यवस्था का अभाव: समस्या की जड़

नारायणपुर जिले में सबसे बड़ी समस्या है—पार्किंग की स्थायी व्यवस्था का अभाव।

शहर में एक भी व्यवस्थित पार्किंग स्थल नहीं है। नतीजतन, लोग अपनी गाड़ियां सड़क किनारे ही खड़ी करने को मजबूर हैं।

यदि प्रशासन द्वारा पार्किंग स्थल विकसित किए जाएं, तो न केवल ट्रैफिक व्यवस्था सुधर सकती है, बल्कि इससे राजस्व में भी वृद्धि होगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिल सकते हैं।


यातायात पुलिस की पहल: व्यापारियों को बुलाया बैठक में

इन तमाम समस्याओं को देखते हुए यातायात शाखा, जिला नारायणपुर ने एक अहम कदम उठाया है।

जारी पत्र के अनुसार, जिले में बढ़ती ट्रैफिक समस्या और जाम की स्थिति को सुधारने के लिए व्यापारियों के साथ चर्चा हेतु 16 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे बैठक आयोजित की गई है।

इस बैठक में मुख्य मार्गों पर व्यापार करने वाले सभी व्यापारियों को उपस्थित रहने के लिए कहा गया है, ताकि सामूहिक रूप से समाधान निकाला जा सके।


दुर्घटनाओं का बढ़ता खतरा, आमजन में डर का माहौल

जाम की समस्या सिर्फ समय की बर्बादी नहीं है, बल्कि यह जानलेवा भी साबित हो रही है।

भारी वाहनों के दबाव और अव्यवस्थित ट्रैफिक के कारण सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालक, साइकिल सवार और पैदल चलने वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार एंबुलेंस भी जाम में फंस जाती है, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है।


समाधान क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, समस्या का समाधान संभव है, बशर्ते प्रशासन ठोस कदम उठाए:

  • खनिज परिवहन के लिए अलग कॉरिडोर या समय निर्धारण
  • सड़क किनारे खड़े वाहनों पर सख्त कार्रवाई
  • अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान
  • शहर में व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था
  • ट्रैफिक पुलिस की नियमित निगरानी और सख्ती

विकास के साथ व्यवस्था जरूरी

नारायणपुर आज विकास के नए आयाम गढ़ रहा है। लेकिन यदि यातायात व्यवस्था को समय रहते नहीं सुधारा गया, तो यही विकास भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है।

यातायात पुलिस की पहल एक सकारात्मक कदम जरूर है, लेकिन अब जरूरत है ठोस कार्रवाई और सख्त अमल की।

क्योंकि सवाल सिर्फ जाम का नहीं, बल्कि आमजन की सुरक्षा और जिले के भविष्य का है।

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