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अबूझमाड़ में सरकार की दस्तक: जाटलूर शिविर में 167 समस्याओं का मौके पर समाधान

347 आवेदन पहुंचे, स्वास्थ्य से लेकर राशन-आधार तक सेवाएं एक ही छत के नीचे | दुर्गम गांवों में ‘नियद नेल्लानार’ से बढ़ी प्रशासन की पहुंच

(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 17 अप्रैल। कभी नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण शासन से दूर रहे अबूझमाड़ के गांव अब धीरे-धीरे सरकारी योजनाओं की मुख्यधारा से जुड़ते नजर आ रहे हैं। ओरछा विकासखंड के ग्राम जाटलूर में आयोजित दो दिवसीय जनसमस्या निवारण शिविर ने इस बदलाव की तस्वीर को और स्पष्ट कर दिया है। यहां 347 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 167 का मौके पर ही निराकरण कर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई का संदेश दिया।

जिला प्रशासन द्वारा ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत 16 और 17 अप्रैल को बालक आश्रम जाटलूर में आयोजित इस शिविर में आसपास के मुरुमवाड़ा, बोटेर, हरवेल, धोबे और गट्टाकाल जैसे गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे। वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आए ग्रामीणों को इस बार निराश नहीं होना पड़ा।


एक ही स्थान पर मिली कई सेवाएं, बढ़ा भरोसा
शिविर में विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाकर ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही मौके पर ही लाभ भी प्रदान किया गया। कृषि, स्वास्थ्य, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास, खाद्य, राजस्व, समाज कल्याण, आदिवासी विकास, निर्वाचन और बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता ने ग्रामीणों के लिए एक ही जगह पर ‘मिनी सचिवालय’ जैसी व्यवस्था तैयार कर दी।

ग्रामीणों ने पीएम किसान सम्मान निधि, राशन कार्ड, आधार कार्ड, जाति-निवास और आय प्रमाण पत्र सहित कई जरूरी सेवाओं के लिए आवेदन दिए। आंकड़ों पर नजर डालें तो पीएम किसान के 81, राशन कार्ड के 20, आधार के 16, जाति प्रमाण पत्र के 8, निवास के 5 और आय प्रमाण पत्र के 2 आवेदन शामिल रहे। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के 110, पंचायत एवं ग्रामीण विकास के 28, मनरेगा जॉब कार्ड के 50 और महिला एवं बाल विकास के 6 आवेदन भी प्राप्त हुए।


दुर्गम अंचल में पहुंची प्रशासनिक सक्रियता
कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि नियद नेल्लानार योजना का उद्देश्य अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शासन की सीधी पहुंच सुनिश्चित करना है। इन शिविरों के जरिए ग्रामीणों को बार-बार जिला मुख्यालय या ब्लॉक कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं, बल्कि सेवाएं उनके गांव तक पहुंच रही हैं।

उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल समस्याओं का त्वरित समाधान हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों का प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत हो रहा है। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ना सकारात्मक संकेत है।


आने वाले शिविरों पर भी नजर
जिला प्रशासन ने आगामी शिविरों की तिथियां भी जारी कर दी हैं। 23 और 24 अप्रैल को लंका में शिविर आयोजित होगा, जिसमें डोंडीमरका, पदमेटा, तालावाड़ा और कारंगुल के ग्रामीण लाभान्वित होंगे। वहीं 29 और 30 अप्रैल को आदनार में शिविर लगेगा, जहां मलमेटा, कोंजे और बोजूम के ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ मिलेगा।


अपील: शिविरों में पहुंचे, योजनाओं से जुड़ें
प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे इन शिविरों में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर शासकीय योजनाओं का लाभ उठाएं। शिविरों के माध्यम से समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ-साथ लोगों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का काम तेजी से किया जा रहा है।


बदलाव की बयार अबूझमाड़ तक
जाटलूर शिविर की सफलता यह संकेत दे रही है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और योजनाओं के सही क्रियान्वयन से अबूझमाड़ जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में भी विकास की रोशनी पहुंचाई जा सकती है। यदि इसी गति से शिविरों का आयोजन जारी रहा, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र शासन की योजनाओं का लाभ लेने में प्रदेश के अन्य हिस्सों के बराबर खड़ा नजर आ सकता है।

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़

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