अबूझमाड़ के 5 बच्चों ने थामा शिक्षा का हाथ, ‘स्कूल केंइता अभियान’ से बदली जिंदगी की राह
घमंडी गांव के 3 शाला त्यागी और 2 अप्रवेशी बच्चों का आश्रम विद्यालय में नामांकन | कलेक्टर के मार्गदर्शन और शिक्षा विभाग की पहल से मुख्यधारा से जुड़े बच्चे

नारायणपुर। अबूझमाड़ के दुर्गम और दूरस्थ इलाकों में शिक्षा की अलख जगाने की दिशा में प्रशासन की पहल रंग लाने लगी है। ओरछा विकासखंड के घमंडी गांव के तीन शाला त्यागी और दो अप्रवेशी बच्चों ने शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ते हुए अपने जीवन की नई शुरुआत की है। ‘स्कूल केंइता अभियान’ के तहत इन पांचों बच्चों का नारायणपुर स्थित प्राथमिक शाला आश्रम, करुषनार में सफलतापूर्वक नामांकन कराया गया। इसे शिक्षा के अधिकार को धरातल तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
जिले के दूरस्थ और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले अबूझमाड़ क्षेत्र में बच्चों को विद्यालय तक पहुंचाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग और प्रशासन के सतत प्रयासों से अब शिक्षा की रोशनी गांव-गांव तक पहुंचने लगी है।
जानकारी के अनुसार शिक्षा दूत एवं संकुल समन्वयक कारु नरेटी ने लगातार संपर्क, समझाइश और प्रेरणा के माध्यम से इन बच्चों एवं उनके परिजनों को शिक्षा का महत्व समझाया। उनके निरंतर प्रयासों का परिणाम रहा कि पांचों बच्चे पढ़ाई के लिए तैयार हुए और उन्हें नारायणपुर लाकर प्राथमिक शाला आश्रम, करुषनार में प्रवेश दिलाया गया।
यह पूरी पहल जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन में संचालित ‘स्कूल केंइता अभियान’ के अंतर्गत संभव हो सकी। अभियान का उद्देश्य शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को खोजकर उन्हें पुनः विद्यालयों से जोड़ना तथा शिक्षा के अधिकार को प्रत्येक बच्चे तक पहुंचाना है।
चुनौतियों के बीच उम्मीद की नई किरण
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम अंचल में सड़क, संचार और परिवहन की सीमित सुविधाओं के बावजूद बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का यह प्रयास प्रशासन और शिक्षा विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इन पांच बच्चों का विद्यालय से जुड़ना इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्थानीय समुदाय मिलकर कार्य करें तो कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।
‘हर बच्चे तक शिक्षा’ का संकल्प हो रहा साकार
‘स्कूल केंइता अभियान’ केवल नामांकन अभियान नहीं, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर भविष्य देने का प्रयास है। अभियान के माध्यम से शिक्षा विभाग लगातार ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें विद्यालयों तक पहुंचा रहा है। प्रशासन का मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो अबूझमाड़ के बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाएगी। पाँच बच्चों का विद्यालय से जुड़ना इस दिशा में एक छोटी, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है।




