पेड़ पर टंगा मोबाइल बना सहारा, अबूझमाड़ के किसानों का बना डिजिटल पहचान पत्र
नेटवर्क की चुनौती के बीच डुंगा पहुंचे राजस्व अमले ने किया एग्री स्टैक पंजीयन, 10 किसानों का हुआ ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

जंगल में जहां मिला सिग्नल, वहीं से शुरू हुआ काम; दूरस्थ गांवों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में जुटा प्रशासन
(कैलाश सोनी) नारायणपुर। अबूझमाड़ के दुर्गम जंगलों में जहां आज भी मोबाइल नेटवर्क एक बड़ी चुनौती है, वहां सरकारी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने के लिए प्रशासनिक अमला हर बाधा को पार कर रहा है। इसका जीवंत उदाहरण बुधवार को जिले के अंतिम छोर पर बसे ग्राम डुंगा में देखने को मिला, जहां नेटवर्क नहीं मिलने पर राजस्व विभाग की टीम ने जंगल के एक पेड़ पर मोबाइल फोन लटकाकर इंटरनेट सिग्नल हासिल किया और वहीं से किसानों का एग्री स्टैक पंजीयन पूरा किया।

कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ग्राम डुंगा पहुंची और शासन की महत्वाकांक्षी एग्री स्टैक योजना के तहत किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का अभियान चलाया। तमाम तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद एक दिन में 10 किसानों का सफल ऑनलाइन पंजीयन किया गया।
जहां मिला नेटवर्क, वहीं बना अस्थायी डिजिटल केंद्र
डुंगा जैसे वनांचल क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या के कारण पंजीयन कार्य आसान नहीं था। अधिकारियों को जानकारी मिली कि जंगल के एक पेड़ के पास मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध हो रहा है। इसके बाद मोबाइल फोन को पेड़ पर लटकाकर वाई-फाई कनेक्टिविटी के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की गई।
ग्रामीणों के लिए यह दृश्य किसी अनोखे तकनीकी प्रयोग से कम नहीं था। प्रशासन की इस जिद ने साबित कर दिया कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए इच्छाशक्ति सबसे बड़ी ताकत होती है।
किसानों की बनेगी डिजिटल पहचान
राजस्व विभाग के अधिकारियों ने किसानों को बताया कि एग्री स्टैक के माध्यम से उनकी भूमि, फसल और कृषि संबंधी जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इससे प्रत्येक किसान की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान बनेगी, जिसके आधार पर भविष्य में फसल बीमा, कृषि ऋण, अनुदान, समर्थन मूल्य पर खरीदी और अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।
पंजीयन के दौरान किसानों के आधार कार्ड, भूमि अभिलेख एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर ऑनलाइन डेटा अपलोड किया गया।
गांव में दिखा उत्साह, किसानों ने सराहा प्रयास
दूरस्थ क्षेत्र में अधिकारियों को अपने बीच देखकर ग्रामीणों में उत्साह का माहौल रहा। कई किसानों ने स्वयं आगे बढ़कर दस्तावेज उपलब्ध कराए और पंजीयन कराया। किसानों ने कहा कि यदि टीम गांव तक नहीं पहुंचती तो उन्हें तहसील या ब्लॉक मुख्यालय तक जाने में समय और पैसा दोनों खर्च करना पड़ता।
दूरस्थ गांवों तक पहुंचेगा अभियान
राजस्व विभाग के अनुसार जिले के अन्य दुर्गम और वनांचल गांवों में भी एग्री स्टैक पंजीयन अभियान लगातार जारी है। लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र किसान का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर उसे शासन की योजनाओं से जोड़ा जाए।
अबूझमाड़ की तस्वीर, प्रशासन का जज्बा
- ग्राम डुंगा में नेटवर्क की भारी समस्या
- जंगल के एक पेड़ पर मिला मोबाइल सिग्नल
- पेड़ पर मोबाइल लटकाकर किया गया ऑनलाइन कार्य
- 10 किसानों का सफल एग्री स्टैक पंजीयन
- गांव पहुंचकर दस्तावेजों का सत्यापन
- किसानों को योजनाओं की जानकारी भी दी गई
बड़ी बात
अबूझमाड़ के जंगलों में नेटवर्क भले कमजोर हो, लेकिन सरकारी योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने का प्रशासन का संकल्प मजबूत दिखाई दे रहा है। डुंगा में पेड़ पर टंगे मोबाइल से हुआ पंजीयन इसी जज्बे की मिसाल बन गया।




