पैरावट से गिरकर टूटा कंधा, तब ठाना- बनना है डॉक्टर
छोटेडोंगर के चंद्रेश पात्र बने एमबीबीएस चिकित्सक, संघर्ष और जुनून की कहानी बनी युवाओं के लिए प्रेरणा

(संतोष मजूमदार) छोटेडोंगर। अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर क्षेत्र के लेगड़ीबाई गांव के युवा चंद्रेश पात्र ने अपने संघर्ष, मेहनत और अटूट जज्बे से यह साबित कर दिखाया है। गरीबी, हादसों और कठिन परिस्थितियों से लड़ते हुए आखिरकार चंद्रेश पात्र ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बनने का सपना साकार कर लिया। उनकी सफलता आज पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
चंद्रेश पात्र पिता अंतूराम पात्र की प्रारंभिक शिक्षा पहली से दसवीं तक छोटेडोंगर में हुई। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार चंद्रेश ने दसवीं कक्षा में टॉप किया था। शुरुआत में उनका सपना इंजीनियर बनने का था, लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। घर की पैरावट से गिरने के कारण उनका कंधा टूट गया और ठीक होने में करीब एक वर्ष लग गया। इसी दौरान उन्होंने ठान लिया कि अब उन्हें डॉक्टर बनना है ताकि लोगों का बेहतर इलाज कर सकें।
दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नारायणपुर में प्रवेश लिया। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे नीट की तैयारी के लिए भिलाई चले गए। लेकिन किस्मत ने यहां भी कठिन परीक्षा ली। नीट परीक्षा से ठीक एक माह पहले होली के दौरान उनका पैर टूट गया। इस चोट से उबरने में भी लगभग एक वर्ष लग गया।
दो-दो बड़े हादसों के बावजूद चंद्रेश ने हार नहीं मानी। वर्ष 2017 में उन्होंने नीट परीक्षा पास की, लेकिन मेडिकल कॉलेज में चयन नहीं हो सका। इससे वे निराश जरूर हुए, लेकिन परिवार और मित्रों ने उनका हौसला बढ़ाया। चंद्रेश ने फिर से तैयारी शुरू की और आखिरकार वर्ष 2020 में उनका चयन राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंह देव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर में हो गया।
अब एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चंद्रेश पात्र डॉक्टर बन चुके हैं। वे बताते हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने बचपन में खेतों में मवेशी चराने और पिता के साथ खेती-किसानी में हाथ बंटाने का काम भी किया। आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि कई बार वे बिना चप्पल पहने स्कूल जाया करते थे।
आज चंद्रेश की सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। सोशल मीडिया पर क्षेत्रवासी उन्हें लगातार बधाई दे रहे हैं। छोटेडोंगर और नारायणपुर क्षेत्र के युवाओं के लिए चंद्रेश पात्र की कहानी इस बात का संदेश है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा हो, मेहनत और दृढ़ संकल्प से हर सपना पूरा किया जा सकता है।




