नारायणपुर

अबूझमाड़ के जंगलों में गूंजा बदलाव का संदेश, नुक्कड़ नाटक से छेड़ी नशे और कुरीतियों के खिलाफ मुहिम

मसपुर में शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला जागरूकता का अनोखा संगम; किशोरियों को बांटे सेनेटरी नैपकिन, बच्चों को मिली शैक्षणिक सामग्री

35 किलोमीटर दूर सुदूर वनांचल में माड़ रक्षा सेवा संस्था का सेवा शिविर, गोटुल में सामूहिक नृत्य और गोंडी गीतों से संस्कृति को भी मिला सम्मान

नारायणपुर, 13 जून। घने जंगलों के बीच बसे अबूझमाड़ के सुदूर ग्राम मसपुर में रविवार को बदलाव और जागरूकता की अनूठी तस्वीर देखने को मिली। जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित इस दुर्गम गांव में माड़ रक्षा सेवा संस्था द्वारा आयोजित सहायता एवं जागरूकता शिविर के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति का संदेश ग्रामीणों तक पहुंचाया गया। नुक्कड़ नाटक के जरिए सामाजिक कुरीतियों और नशे के दुष्प्रभावों के खिलाफ जागरूकता की अलख जगाई गई, वहीं महिलाओं और किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए सेनेटरी नैपकिन वितरित किए गए।

वर्ष 2019 से सक्रिय माड़ रक्षा सेवा संस्था पिछले सात वर्षों से अबूझमाड़ के दूरस्थ और दुर्गम गांवों में सेवा और सामाजिक जागरूकता के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा रही है। संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में आदिवासी समुदाय तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

बच्चों को मिली पढ़ाई की प्रेरणा, परिवारों को मिला सहयोग

शिविर के दौरान ग्रामीण परिवारों को नए कपड़े और चप्पलों का वितरण किया गया। वहीं स्कूली बच्चों को कॉपी, पेन, पेंसिल और अन्य स्टेशनरी सामग्री प्रदान कर उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित किया गया। संस्था के इस प्रयास से बच्चों और अभिभावकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।

नुक्कड़ नाटक से दिया सामाजिक परिवर्तन का संदेश

कार्यक्रम के दौरान संस्था की टीम ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर ग्रामीणों को नशामुक्ति, शिक्षा के महत्व, स्वच्छता, सामाजिक कुरीतियों के दुष्प्रभाव और सकारात्मक सामाजिक बदलाव के प्रति जागरूक किया। नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक एकता ही समाज के समग्र विकास की मजबूत नींव हैं।

ग्रामीणों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए संस्था के प्रयासों की सराहना की और ऐसे आयोजनों को गांवों के लिए उपयोगी बताया।

गोटुल में गूंजे गोंडी गीत, संस्कृति से जुड़ा आत्मीय संवाद

सेवा और जागरूकता के साथ-साथ कार्यक्रम में स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी विशेष महत्व दिया गया। संस्था के सदस्यों और ग्रामीणों ने पारंपरिक गोंडी गीतों का सामूहिक गायन किया तथा गोटुल में सामूहिक नृत्य कर आदिवासी संस्कृति के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस दौरान ग्रामीणों और संस्था के सदस्यों के बीच आत्मीय संवाद और सांस्कृतिक सहभागिता की अनूठी मिसाल देखने को मिली।

इनकी रही उल्लेखनीय भूमिका

कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के अध्यक्ष शशांक तिवारी, सचिव कोमल उसेंडी, सदस्य संदीप मिश्रा, सदफ़ अंजुम, कनेश्वरी दुग्गा, अम्बिका नाग, धनेश्वरी परिहार, विनय चंदेल, हिमांशु कोर्राम, रोशन मंडावी एवं अभय पटेल सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला जागरूकता, सहायता शिविर और सामाजिक चेतना से जुड़े कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे।


 सात वर्षों से सेवा की मिसाल

  • स्थापना वर्ष : 2019
  • पंजीयन क्रमांक : 0189
  • कार्यक्षेत्र : शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक जागरूकता
  • अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों में लगातार सेवा अभियान
  • नुक्कड़ नाटक के जरिए नशामुक्ति और सामाजिक परिवर्तन की पहल

“जहां सड़कें कम पहुंचीं, वहां जागरूकता की मशाल लेकर पहुंची संस्था; अबूझमाड़ के मसपुर में शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति का बना अनूठा संगम।”

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