इमली की छांव में सजी चौपाल, अबूझमाड़ में विकास का ऐतिहासिक सूर्योदय
पहली बार कुतुल पहुंचे कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, ग्रामीणों से सीधा संवाद; बोले— “जो कभी सपना था, आज वह हकीकत बन चुका है”

(कैलाश सोनी) नारायणपुर/अबूझमाड़। देश के सबसे दुर्गम और वर्षों तक नक्सल प्रभाव के कारण मुख्यधारा से कटे रहे अबूझमाड़ के सुदूर ग्राम कुतुल में बुधवार को इतिहास ने नई करवट ली। आज़ादी के बाद पहली बार किसी जनप्रतिनिधि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप गांव पहुंचे, जहां इमली के विशाल पेड़ की छांव तले सजी चौपाल विकास, विश्वास और बदलाव की नई इबारत लिखती नजर आई।

यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन गांवों तक शासन के पहुंचने का प्रतीक था, जिन्हें दशकों तक व्यवस्था और विकास से दूर माना जाता रहा। चौपाल में मंत्री केदार कश्यप ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते दिखाई दिए। वर्षों से उपेक्षा झेल रहे ग्रामीणों ने पहली बार किसी मंत्री को अपने बीच आत्मीयता के साथ संवाद करते देखा।
ग्रामीणों के चेहरे पर उत्साह, जिज्ञासा और भरोसे की चमक साफ दिखाई दे रही थी। चौपाल में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं मंत्री के समक्ष रखीं, जिस पर मंत्री ने अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
मंत्री केदार कश्यप इस दौरान भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि “अबूझमाड़ के कुतुल तक पहुंचना कभी एक सपना माना जाता था, लेकिन आज यह सपना साकार हो चुका है। यह केवल मेरी यात्रा नहीं, बल्कि उस संकल्प की जीत है, जिसमें अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार अब उन इलाकों तक विकास पहुंचा रही है, जहां कभी शासन का पहुंचना भी कठिन समझा जाता था।

“अबूझमाड़ में बदल रही तस्वीर”
अपने संबोधन में मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस सरकारें अबूझमाड़ जैसे इलाकों को विकास की मुख्यधारा से नहीं जोड़ सकीं। लेकिन अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार में क्षेत्र की तस्वीर तेजी से बदल रही है।
उन्होंने कहा कि नारायणपुर सहित पूरा अबूझमाड़ अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और संचार सुविधाओं के विस्तार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
चौपाल बनी बदलाव की नई पहचान
इमली के पेड़ के नीचे सजी यह चौपाल अबूझमाड़ के इतिहास में एक प्रतीकात्मक घटना बन गई। जिस क्षेत्र में कभी भय, अलगाव और उपेक्षा की चर्चा होती थी, वहां अब विकास, संवाद और भरोसे की बात हो रही है।
ग्रामीणों ने भी मंत्री के आगमन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि सरकार सचमुच उनके गांव तक पहुंची है। चौपाल खत्म होने के बाद भी ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय यही रहा कि अब उनके गांव और क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार और तेज होगी।
अबूझमाड़ के कुतुल में इमली की छांव तले सजी यह चौपाल केवल एक बैठक नहीं, बल्कि उस नए दौर की शुरुआत बन गई है, जहां विकास की रोशनी अब देश के अंतिम छोर तक पहुंचती दिखाई दे रही है।




