जंगल से जनजीवन तक: बंदूक छोड़ मुख्यधारा में लौटे युवाओं ने अपनाया स्वास्थ्य का संकल्प
कभी मौत के साये में भटकते थे, अब महा स्वास्थ्य शिविर में कराई जांच

नारायणपुर में 21 आत्मसमर्पित युवाओं ने लिया लाभ, 3000 से अधिक लोगों का हुआ उपचार…
(कैलाश सोनी) नारायणपुर। बस्तर के अबूझमाड़ का वह दौर अब इतिहास बनता जा रहा है, जब नक्सलवाद की विचारधारा और बंदूक के दम पर युवाओं को अपने जाल में फंसाया जाता था। उस समय कई युवक-युवतियां अपने परिवार और सुरक्षित जीवन को छोड़कर जंगलों में भटकने को मजबूर हो गए थे, जहां हर पल मौत का खतरा मंडराता था और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरत भी उनके लिए दूर की बात थी।
आज चार दशक बाद हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। बस्तर नक्सलवाद के साए से निकलकर विकास और विश्वास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। कभी बंदूक थामने वाले यही युवा अब पुनर्वास के माध्यम से मुख्यधारा में लौटकर एक सम्मानजनक जीवन की शुरुआत कर रहे हैं।

इस सकारात्मक बदलाव की झलक नारायणपुर जिला मुख्यालय में आयोजित निःशुल्क महा स्वास्थ्य शिविर में देखने को मिली। कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देश पर 19 अप्रैल को आयोजित इस शिविर में पुनर्वास केंद्र के 21 आत्मसमर्पित हितग्राहियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने स्वास्थ्य की जांच करवाई। यह उनके जीवन का वह पहलू है, जिसकी ओर पहले कभी ध्यान देने का अवसर ही नहीं मिला।
शिविर में जिलेभर से 3000 से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार का लाभ उठाया। 30 विशेषज्ञ चिकित्सकों सहित 100 से अधिक डॉक्टरों की टीम ने अपनी सेवाएं दीं। हितग्राहियों को समुचित स्वास्थ्य जांच, परामर्श और आवश्यक उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे न केवल उनकी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान हुआ, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ी।
पूर्व नक्सली युवाओं के लिए यह शिविर केवल चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि एक नए जीवन का संकेत बनकर उभरा है। जंगलों में अनिश्चितता और खतरे के बीच जीवन बिताने वाले ये युवा अब अपने भविष्य को लेकर सजग हैं और समाज में सम्मानजनक स्थान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
जिला प्रशासन का यह प्रयास दर्शाता है कि पुनर्वास केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक पहल है, जिसमें स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन को समान महत्व दिया जा रहा है।
नारायणपुर प्रशासन के सतत प्रयास बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की मजबूत नींव रख रहे हैं, जहां अब बंदूक की जगह बेहतर जीवन और नई उम्मीदों ने ले ली है।




