“लाल आतंक से रोशनी तक: पीएम मोदी ने जिस रेकावाया का किया जिक्र, वहां पहुंची पहली कलेक्टर…150 किमी दुर्गम सफर तय कर खोला शिक्षा का नया अध्याय”
नक्सल प्रभावित इलाके में बदली तस्वीर, कलेक्टर नम्रता जैन ने स्कूल भवन व आश्रम का किया लोकार्पण, बच्चों के सपनों को दी नई उड़ान

(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 27 मार्च 2026। बस्तर का वह इलाका, जहां कभी गोलियों की गूंज बच्चों के भविष्य को निगल रही थी, अब वहीं स्कूल की घंटियां और बच्चों की हंसी सुनाई देने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जिस रेकावाया गांव का अपने भाषण में उल्लेख कर बदलाव की मिसाल बताया गया था, वहां अब शिक्षा और विकास की नई कहानी लिखी जा रही है।
ओरछा विकासखंड के अंतिम छोर पर बसे अति संवेदनशील ग्राम रेकावाया तक पहुंचने वाली पहली कलेक्टर नम्रता जैन ने 150 किलोमीटर से अधिक का दुर्गम सफर तय कर नव-निर्मित स्कूल भवन और बालक आश्रम शाला का विधिवत शुभारंभ किया। यह केवल एक दौरा नहीं, बल्कि प्रशासन की जमीनी प्रतिबद्धता और बदलते बस्तर की सशक्त तस्वीर बनकर सामने आया।

पीएम मोदी ने किया था जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर में हो रहे बदलाव का उल्लेख करते हुए रेकावाया का विशेष जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि जहां कभी नक्सलवाद हावी था, वहां अब शिक्षा की लौ जल रही है और बच्चे मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
कलेक्टर का ऐतिहासिक दौरा
- 150 किमी दुर्गम रास्ता तय कर पहुंचीं रेकावाया
- पहली बार किसी कलेक्टर का इस सुदूर क्षेत्र में पहुंचना
- प्रशासनिक प्रतिबद्धता और विश्वास का बड़ा संदेश
बच्चों के सपनों को मिली उड़ान
कलेक्टर नम्रता जैन ने बच्चों के बीच बैठकर संवाद किया।
बच्चों ने कलेक्टर, पुलिस अधिकारी और शिक्षक बनने की इच्छा जताई।
यह बदलाव क्षेत्र में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का संकेत है।
सुविधाओं का लिया जायजा
- छात्रावास में भोजन, पानी, स्वच्छता की जांच
- पोषण आहार व उपस्थिति पर विशेष ध्यान
- जल जीवन मिशन के तहत नलकूपों का निरीक्षण
विकास के बड़े ऐलान
- रेकावाया से ओरछा तक सड़क निर्माण का आश्वासन
- 15 दिनों में साप्ताहिक बाजार शुरू करने के निर्देश
- राशन वितरण, आंगनबाड़ी संचालन को मजबूत करने के आदेश
- सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से सरकारी सेवाएं गांव तक पहुंचाने की पहल
बच्चों को मिला उपहार
कलेक्टर ने बच्चों को कॉपी, किताबें, पेन-पेंसिल और खेल सामग्री वितरित की।
बच्चों की मांग पर जल्द एलईडी टीवी उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया।
सुरक्षा से विकास तक की कहानी
क्षेत्र में स्थापित नए पुलिस कैंपों ने भय के माहौल को खत्म कर विश्वास का वातावरण बनाया है।
अब गांवों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सड़क जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं।
रेकावाया अब केवल एक गांव नहीं, बल्कि बदलते बस्तर का प्रतीक बन चुका है—जहां कभी बंदूक का साया था, वहां आज कलम भविष्य लिख रही है। यह बदलाव सिर्फ विकास नहीं, बल्कि विश्वास की जीत है।
उपस्थित रहे:
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास राजेंद्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी अशोक पटेल, जनपद सीईओ लोकेश चतुर्वेदी, समन्वयक दीनबंधु रावटे, प्राचार्य मनोज बागड़े सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि।








