बैलगाड़ी बारात बनी चर्चा का विषय, गांव से उठा भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
डमरतराई में सादगी और परंपरा के संग निकली अनोखी बारात, मंत्री केदार कश्यप बोले — प्रधानमंत्री मोदी का ईंधन बचाने का संदेश बन रहा जनआंदोलन

नारायणपुर। आधुनिकता और दिखावे के दौर में नारायणपुर जिले के डमरतराई गांव से भारतीय संस्कृति, सादगी और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संदेश सामने आया है। वार्ड क्रमांक 15 डमरतराई में निकली बैलगाड़ी बारात पूरे इलाके में आकर्षण और चर्चा का केंद्र बनी रही। ग्रामीण परिवेश, पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-नगाड़ों और लोक संस्कृति के साथ निकली इस बारात ने लोगों को अपनी मिट्टी और परंपराओं से जुड़ने का संदेश दिया।

बारात की खास बात यह रही कि कुबेर देहारी स्वयं बैलगाड़ी की अगुवाई करते हुए दुल्हन के घर पहुंचे। गांव की गलियों से गुजरती पारंपरिक बारात को देखने बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़े और लोगों ने इस पहल की सराहना की। पूरे आयोजन में सादगी और भारतीय संस्कारों की झलक साफ दिखाई दी।

इस अवसर पर नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार देशवासियों को ईंधन बचाने, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति को अपनाने का संदेश दे रहे हैं। अब यह सोच गांव-गांव में जनजागरण और नई चेतना का रूप लेती दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि लोग अब अनावश्यक खर्च और दिखावे से दूर होकर अपनी परंपराओं, संस्कारों और ग्रामीण संस्कृति को फिर से आत्मसात कर रहे हैं। डमरतराई में निकली बैलगाड़ी बारात भारतीय संस्कृति की उसी सोच और सादगी का जीवंत उदाहरण है।
मंत्री कश्यप ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान उसकी सादगी, प्रकृति के प्रति सम्मान और समाज को साथ लेकर चलने की परंपरा रही है। ऐसे प्रयास केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, अपनी मिट्टी और अपनी विरासत से जोड़ने का काम भी करते हैं।
उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी जड़ों से जुड़ता है, तभी वास्तविक विकास और सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। डमरतराई की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का भी प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।




