नारायणपुर

नक्सल दहशत में उजड़ी हरियाली लौटेगी, गारपा के शासकीय उद्यान का होगा जीर्णोद्धार

खबर का असर : 13 लाख से संवरेंगे गारपा उद्यान के दिन

10 एकड़ क्षेत्र में फेंसिंग, बोर खनन और नर्सरी शेड निर्माण की तैयारी

कैलाश सोनी- नारायणपुर। अबूझमाड़ के सुदूर और लंबे समय तक नक्सल हिंसा की छाया में रहे क्षेत्र में अब विकास की नई उम्मीद दिखाई देने लगी है। वर्षों से उपेक्षा और असुरक्षा के कारण वीरान पड़े गारपा के शासकीय उद्यान और नर्सरी को अब फिर से जीवंत बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने कदम बढ़ा दिए हैं। ग्रामीणों की लगातार उठती मांग और इस मुद्दे पर प्रकाशित खबर के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हुई है। अब करीब 13 लाख रुपये की लागत से गारपा की शासकीय नर्सरी और उद्यान का जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में फिर से हरियाली लौटेगी और स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।

प्रस्तावित योजना के तहत उद्यान क्षेत्र में करीब 10 एकड़ भूमि में लगभग 950 मीटर लंबाई की फेंसिंग की जाएगी। इसके साथ ही उद्यान की सुरक्षा और संरचना को मजबूत करने के लिए मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण भी किया जाएगा। पौधों के संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए एक बोर खनन किया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में पौधों को पानी उपलब्ध कराया जा सके। वहीं नर्सरी में पौधों और अन्य सामग्री के संरक्षण के लिए शेड का निर्माण किया जाएगा, जहां बीज, खाद और अन्य आवश्यक संसाधनों का सुरक्षित भंडारण किया जा सकेगा।

अधिकारियों के अनुसार यदि कार्य निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ता है तो करीब छह माह के भीतर गारपा का यह शासकीय उद्यान फिर से हराभरा दिखाई देने लगेगा


खबर के बाद बढ़ी प्रशासनिक हलचल

कुछ समय पहले प्रकाशित समाचार में अबूझमाड़ के गारपा स्थित शासकीय उद्यान की बदहाली को प्रमुखता से सामने लाया गया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि किस तरह कभी फलदार वृक्षों से लहलहाता यह उद्यान नक्सल दहशत और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण उजड़ गया। खबर प्रकाशित होने के बाद ग्रामीणों की आवाज और अधिक मजबूती से प्रशासन तक पहुंची और अब उसके सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं।

जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग ने उद्यान क्षेत्र का प्रारंभिक आकलन कर पुनर्जीवन की योजना तैयार की है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक उद्यान के पुनर्निर्माण का कार्य नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।


कभी आजीविका का प्रमुख केंद्र था गारपा उद्यान

अबूझमाड़ के हृदय क्षेत्र में स्थित गारपा का शासकीय उद्यान एक समय आसपास के गांवों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। यहां आम, कटहल, लीची, अमरूद, चीकू, पपीता, केला, नींबू सहित कई प्रकार के फलदार वृक्ष लगाए गए थे। उद्यान में तैयार होने वाले फल स्थानीय बाजारों और आसपास के गांवों में पहुंचते थे।

इससे ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलते थे और कई परिवारों की आय का मुख्य स्रोत यही उद्यान था। महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से फल एकत्रित कर बाजारों तक पहुंचाती थीं, जबकि कई स्थानीय युवा उद्यान के रखरखाव और पौधरोपण कार्य में लगे रहते थे।


नक्सल दौर में वीरान हो गया उद्यान

समय के साथ अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों के बढ़ने से विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई। सुरक्षा कारणों से कई सरकारी गतिविधियां प्रभावित हुईं और गारपा का यह उद्यान भी धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार हो गया। कर्मचारियों और विभागीय अमले का नियमित आना-जाना बंद हो गया और रखरखाव की कमी से पौधे सूखने लगे।

धीरे-धीरे उद्यान की हरियाली खत्म होती गई और यह क्षेत्र झाड़ियों और वीरानी में बदल गया। ग्रामीण बताते हैं कि एक समय ऐसा भी आया जब इस उद्यान क्षेत्र में जाना भी जोखिम भरा माना जाता था।


बदलते हालातों ने जगाई नई उम्मीद

पिछले कुछ वर्षों में अबूझमाड़ के हालातों में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने, सड़क और संचार सुविधाओं के विस्तार तथा सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ने से क्षेत्र में विश्वास का माहौल बन रहा है।

गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और राशन वितरण जैसी व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है। इसी बदलते माहौल में ग्रामीणों ने अपने क्षेत्र के विकास के लिए आवाज उठानी शुरू की और गारपा उद्यान को पुनर्जीवित करने की मांग ने जोर पकड़ लिया।


ग्रामीणों की मांग बनी पहल की वजह

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि गारपा का उद्यान फिर से विकसित हो जाता है तो इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा। उद्यानिकी, पौधरोपण और फलोत्पादन के माध्यम से ग्रामीणों को आय के नए स्रोत मिल सकते हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि उद्यान के पुनर्जीवन से महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा जा सकता है, जिससे वे फल उत्पादन और विपणन गतिविधियों में भागीदारी निभा सकेंगी। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और युवाओं के पलायन पर भी रोक लग सकेगी।


10 एकड़ में होगा विकास

प्रस्तावित योजना के अनुसार गारपा के शासकीय उद्यान और नर्सरी क्षेत्र को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाएगा। इसके तहत लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में 950 मीटर लंबी फेंसिंग, मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण, सिंचाई के लिए एक बोर खनन, नर्सरी के लिए शेड निर्माण तथा बीज और खाद के भंडारण की व्यवस्था की जाएगी।

इन सभी कार्यों के लिए करीब 13 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है। अधिकारियों का कहना है कि बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद यहां फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा।


छह माह में लौट सकती है हरियाली

उद्यानिकी विभाग की योजना के अनुसार बारिश के मौसम से पहले पौधरोपण की तैयारी की जाएगी, ताकि पौधों को प्राकृतिक नमी और अनुकूल वातावरण मिल सके। यदि सभी कार्य समय पर पूरे होते हैं तो आने वाले छह माह के भीतर उद्यान क्षेत्र में हरियाली लौटने की शुरुआत हो सकती है।


कलेक्टर ने कही यह बात

“स्थानीय ग्रामीणों को फलदार वृक्षों से होगा लाभ”

गारपा के शासकीय उद्यान को पुनर्जीवित करने के लिए जिला प्रशासन आवश्यक तैयारियां कर रहा है। उद्यानिकी विभाग द्वारा बारिश से पहले फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा, जिससे पौधों को प्राकृतिक नमी और अनुकूल वातावरण मिल सके। इस पहल का उद्देश्य हरियाली बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहन देना और भविष्य में स्थानीय ग्रामीणों को फलदार वृक्षों से लाभान्वित करना है।

नम्रता जैन, कलेक्टर, नारायणपुर


हरियाली के साथ लौटेगी खुशहाली

ग्रामीणों का कहना है कि गारपा का शासकीय उद्यान यदि फिर से विकसित हो जाता है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए नई उम्मीद का प्रतीक होगा। वर्षों तक हिंसा और असुरक्षा का दौर झेलने वाले इस इलाके में अब विकास और रोजगार की नई राह खुल सकती है।

उनका मानना है कि जब यह उद्यान फिर से फल-फूल से भर जाएगा, तो यह केवल पेड़ों की हरियाली नहीं बल्कि पूरे अबूझमाड़ क्षेत्र के नए भविष्य और नई खुशहाली की हरियाली होगी।

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