खबर का असर: अबूझमाड़ के कोड़ेनार में लौटी उम्मीद की रोशनी
मीडिया में मुद्दा उठते ही प्रशासन हरकत में, घोटुल में शुरू हुआ स्कूल-आंगनबाड़ी, स्थायी भवन को मंजूरी


कैलाश सोनी- नारायणपुर। दशकों तक नक्सलवाद, भय और उपेक्षा के साए में जीने को मजबूर रहे अबूझमाड़ क्षेत्र के सुदूर आदिवासी गांव कोड़ेनार के लिए यह वक्त ऐतिहासिक बदलाव का संकेत लेकर आया है। शिक्षा और पोषण आहार जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित गांव की पीड़ा मीडिया में प्रमुखता से सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कदम उठाए हैं। खबर का असर यह हुआ कि कलेक्टर नम्रता जैन ने कोड़ेनार की जमीनी स्थिति का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए गांव में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र शुरू कराने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक पहल के तहत फिलहाल घोटुल भवन में स्कूल और आंगनबाड़ी का संचालन प्रारंभ किया जा रहा है, ताकि बच्चों को पढ़ाई के साथ पोषण आहार भी मिल सके। इसके साथ ही गांव में स्थायी स्कूल और आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है। यह निर्णय वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित ग्रामीण बच्चों के लिए नई शुरुआत माना जा रहा है।
दहशत से विकास की ओर बढ़ता कदम
घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे कोड़ेनार गांव को लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण मुख्यधारा से कटकर रहना पड़ा। स्कूल और आंगनबाड़ी के अभाव में बच्चों की पढ़ाई ठप रही, वहीं पोषण आहार न मिलने से कुपोषण की समस्या गहराती चली गई। स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं और नियमित सरकारी सेवाएं गांव तक नहीं पहुंच पाती थीं। भय और असुरक्षा के माहौल में ग्रामीणों ने वर्षों तक अभावों के बीच जीवन गुजारा।
हालांकि बीते कुछ समय में क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने लगी है। पुलिस कैंप की स्थापना, सुरक्षा बलों की सक्रियता और पहुंच मार्गों के निर्माण से हालात बदले हैं। दहशत के साए से बाहर निकलते ग्रामीण अब धीरे-धीरे विकास की मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं। प्रशासनिक अमला भी अबूझमाड़ के भीतर तक पहुंच बनाकर बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
मीडिया की पहल से तेज हुई कार्रवाई
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि कोड़ेनार गांव की समस्याएं मीडिया के माध्यम से सामने आईं, जिस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि अस्थायी व्यवस्था के रूप में घोटुल में स्कूल और आंगनबाड़ी का संचालन शुरू कराया जा रहा है, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। स्थायी भवन निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है और शीघ्र ही निर्माण प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।
प्रशासन ने नौनिहाल बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित पोषण आहार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। उद्देश्य साफ है—कुपोषण की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण और बच्चों के स्वास्थ्य के साथ शिक्षा को एक साथ मजबूत करना।
अबूझमाड़ के लिए नई शुरुआत
कोड़ेनार में शुरू हुई यह पहल सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे अबूझमाड़ क्षेत्र के लिए विकास की नई दिशा का संकेत है। शिक्षा, पोषण और सुरक्षा के साथ ग्रामीण जीवन में सुधार की उम्मीद जगी है। जिस इलाके को लंबे समय तक भय और उपेक्षा की पहचान के रूप में देखा गया, वहां अब बदलाव की आहट सुनाई दे रही है।
बदलता हुआ कोड़ेनार अबूझमाड़ की सच्ची तस्वीर को सामने लाता है—जहां विकास की रोशनी धीरे-धीरे अंधेरे को चीर रही है। यह पहल आने वाले समय में अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है।




