नक्सलियों की अघोषित राजधानी कुतुल के भीतर आदिनपार में दूसरा सुरक्षा व जनसुविधा कैंप स्थापित
अबूझमाड़ में विकास की निर्णायक दस्तक

नारायणपुर, 23 दिसंबर 2025 // शांत, सुरक्षित और नक्सलमुक्त अबूझमाड़ की दिशा में निर्णायक बढ़त लेते हुए नारायणपुर पुलिस ने माड़ बचाओ अभियान के तहत नक्सलियों की अघोषित राजधानी कुतुल के भीतर ग्राम आदिनपार में दूसरा नवीन सुरक्षा एवं जनसुविधा कैंप स्थापित कर दिया है। यह कैंप थाना कोहकामेटा क्षेत्रांतर्गत खोला गया है, जिससे वर्षों से दुर्गम और नक्सल प्रभावित रहे इलाके में विकास की राह और मजबूत हुई है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में संचालित नक्सल विरोधी अभियान के तहत नारायणपुर पुलिस, डीआरजी और आईटीबीपी की 53वीं, 41वीं, 29वीं व 45वीं वाहिनियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आदिनपार में यह कैंप स्थापित किया। कैंप की स्थापना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा का भरोसा और ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
यह नवीन कैंप जिला मुख्यालय नारायणपुर से 56 किलोमीटर, थाना कोहकामेटा से 28 किलोमीटर, कच्चापाल से 19 किलोमीटर, कुतुल से 12 किलोमीटर और कोड़नार से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कैंप खुलने से कोहकामेटा–कच्चापाल–कुतुल–कोड़नार–धोबे एक्सिस पर सड़क निर्माण कार्यों को सुरक्षा मिलेगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी।
सुविधाओं का दायरा बढ़ेगा
आदिनपार में कैंप स्थापित होने से धुरबेड़ा, कोड़तामरका, फरसबेड़ा, गुमरका, एडसमेटा, रेकापाल सहित आसपास के गांवों में सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, स्वास्थ्य, मोबाइल नेटवर्क और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार होगा। अब सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच सरकारी योजनाएं अंतिम छोर तक पहुंच सकेंगी।
2025 में नक्सल गढ़ों में मजबूत पकड़
नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2025 के दौरान कुतुल सहित कोडलियर, बेडमाकोटी, पदमकोट, कान्दुलपार, नेलांगूर, पांगूड़, रायनार, एडजुम, ईदवाया, आदेर, कुड़मेल, कोंगे, सितरम, तोके, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका, परियादी, काकुर, बालेबेड़ा, कोडेनार, कोड़नार और अब आदिनपार जैसे नक्सल आश्रय स्थलों में सुरक्षा कैंप स्थापित कर नक्सल नेटवर्क को निर्णायक रूप से कमजोर किया है।
इस अभियान में बस्तर रेंज और कांकेर रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में नारायणपुर डीआरजी, बस्तर फाइटर और आईटीबीपी की विभिन्न वाहिनियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आदिनपार कैंप की स्थापना को अबूझमाड़ में शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में अंतिम पायदान की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।




