छत्तीसगढ़ की जनजाति, संस्कृति और इतिहास पर पुस्तक प्रदर्शनी

स्वामी आत्मानंद महाविद्यालय नारायणपुर में ग्रंथालय विभाग का आयोजन
नारायणपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष पर शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणपुर के ग्रंथालय विभाग ने पुस्तक मेले का आयोजन किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की जनजातियों, संस्कृति, लोकनृत्य, इतिहास और लोक साहित्य पर आधारित पुस्तकों की भव्य प्रदर्शनी लगाई गई।
प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रभारी प्राचार्य डॉ. विजय लक्ष्मी गौड़ ने किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को पुस्तकों से मित्रता करने और उनके बीच समय व्यतीत करने की सलाह दी। प्रदर्शनी में बस्तर की गोंड़ जनजाति की धार्मिक अवधारणा, छत्तीसगढ़ी लोकगीतों का सांस्कृतिक अध्ययन, अबूझमाड़ का इतिहास और संस्कृति, बस्तर का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास, दक्षिण कोशल का इतिहास, द मारिया गोंडस ऑफ बस्तर, द एबोरिजिनल प्रॉब्लम्स इन द सेंट्रल प्रोविन्सेस एंड बेरार, द मुरिया एंड देयर घोटुल जैसी किताबें आकर्षण का केंद्र रहीं।
ग्रंथालयाध्यक्ष संजय कुमार पटेल ने बताया कि रजत महोत्सव के अंतर्गत प्रदेशभर में 15 अगस्त 2025 से 6 फरवरी 2026 तक विविध कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को वर्ष 2000 में राज्य की स्थापना से लेकर 25 वर्षों की उपलब्धियों से अवगत कराना है। सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति की जानकारी आमजन तक पहुँचाकर राज्य को नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर करने में नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
इस अवसर पर छात्रों के लिए चिट पद्धति से प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छत्तीसगढ़, प्रसिद्ध पुस्तकें एवं उनके लेखक और रजत जयंती से संबंधित सवाल पूछे गए। सही उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया। लाइब्रेरियन ने कहा कि यह आयोजन न केवल पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देगा बल्कि छात्रों के बौद्धिक ज्ञान में वृद्धि करेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी सहायक होगा।
राज्यभर में नालंदा परिसर और तक्षशिला लाइब्रेरी की स्थापना का उद्देश्य भी यही है कि लोग पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित करें और युवाओं को शैक्षणिक एवं प्रतिस्पर्धी माहौल मिले।
पुस्तक मेले का अवलोकन छात्र-छात्राओं, सहायक प्राध्यापकों, अतिथि व्याख्याताओं और अन्य कर्मचारियों ने उत्साह से किया। इस दौरान सहायक प्राध्यापक विकास चंद्र विशाल, संतोष राव और डॉ. मीनाक्षी ठाकुर सहित अनेक अध्यापक उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में अतिथि व्याख्याता डॉ. मिंटू गौतम, डॉ. प्रज्ञा सिंह, धर्मेंद्र बघेल और प्रफुल्ल गेडाम का सक्रिय सहयोग रहा।




