कीचड़ में धंसी बीएसएफ की गाड़ी, जवानों ने लगाया पूरा जोर
नारायणपुर-सीतरम मार्ग की बदहाली ने बारिश में खोली सड़क व्यवस्था की पोल; पांगुंड कैंप जा रहे जवानों को भी करना पड़ा संघर्ष, भारी वाहन नहीं निकला तो बुलानी पड़ी जेसीबी

नारायणपुर। बारिश शुरू होते ही अबूझमाड़ से जुड़े नारायणपुर-सीतरम मार्ग की बदहाली सामने आने लगी है। जगह-जगह सड़क पर कीचड़ और दलदल बन जाने से आवागमन मुश्किल हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि पांगुंड स्थित बीएसएफ कैंप की ओर जा रही सुरक्षा बल की गाड़ी भी कीचड़ में फंस गई। वाहन को निकालने के लिए जवानों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। मौके पर फंसी सामान से भरी पिकअप को भी जवानों ने सामूहिक प्रयास से बाहर निकाला, लेकिन भारी डग्गा वाहन दलदल में बुरी तरह धंस गया। काफी प्रयास के बाद भी जब वाहन नहीं निकला तो जेसीबी का इंतजार करना पड़ा।

सड़क पर जवानों की यह मशक्कत तस्वीरों में कैद हुई है। बारिश में बदहाल मार्ग की यह स्थिति केवल सुरक्षा बलों के लिए परेशानी नहीं है, बल्कि इससे इस रास्ते से रोजाना गुजरने वाले ग्रामीणों की मुश्किलों का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
जवान उतरे सड़क पर, धक्का देकर निकाली पिकअप
बारिश के बाद मार्ग के कई हिस्सों में मिट्टी पानी से लबालब होकर दलदल में तब्दील हो गई है। पांगुंड कैंप की ओर जा रहे वाहनों के सामने रास्ते में ही संकट खड़ा हो गया। एक वाहन के फंसने के बाद जवानों ने खुद मोर्चा संभाला और वाहन को निकालने में जुट गए।
सड़क पर सामान लेकर जा रही पिकअप भी कीचड़ में फंस गई। जवानों ने मिलकर वाहन को धक्का लगाया और काफी प्रयास के बाद उसे दलदल से बाहर निकालकर आगे रवाना किया। हालांकि भारी डग्गा वाहन के पहिए कीचड़ में गहराई तक धंस जाने के कारण उसे निकालना आसान नहीं रहा। जवानों की कोशिश के बावजूद सफलता नहीं मिली और अंततः जेसीबी की मदद लेने की नौबत आ गई।
सुरक्षा बल के वाहनों को सड़क पर निकालने के लिए इतनी मशक्कत करनी पड़ रही है तो आम ग्रामीणों की परेशानी का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
बारिश में हर साल बनती है यही स्थिति
नारायणपुर-सीतरम मार्ग की हालत बारिश के मौसम में हर साल ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। सड़क के खराब हिस्सों में पानी जमा होने के साथ मिट्टी नरम पड़ जाती है और कई स्थानों पर कीचड़ के कारण वाहनों के पहिए धंसने लगते हैं।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति और ज्यादा जोखिम भरी हो जाती है। वहीं चारपहिया और मालवाहक वाहनों के फंसने से मार्ग पर आवागमन प्रभावित होता है। ग्रामीणों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए कई बार खराब रास्ते से जोखिम उठाकर गुजरना पड़ता है।
इसका असर केवल सामान्य आवाजाही पर नहीं, बल्कि जरूरी सामान की आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीणों के दैनिक कामकाज पर भी पड़ता है।
गारपा का साप्ताहिक बाजार भी प्रभावित
सड़क की बदहाली का असर गारपा के साप्ताहिक बाजार पर भी पड़ा है। बारिश और मार्ग की खराब स्थिति के कारण बाजार प्रभावित होने से आसपास के ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों का सामान जुटाना मुश्किल हो गया है।
बाजार में आवश्यक सामग्री नहीं मिल पाने पर ग्रामीणों को नारायणपुर या दूसरे बाजारों का रुख करना पड़ता है। इसके लिए उन्हें इसी कीचड़ और दलदल से भरे मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।
अबूझमाड़ की पहुंच का अहम रास्ता
नारायणपुर-सीतरम मार्ग केवल ग्रामीणों के आवागमन का रास्ता नहीं है। अबूझमाड़ के अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंच, सुरक्षा बलों की आवाजाही, ग्रामीणों को बाजार से जोड़ने और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण है।
अबूझमाड़ के दूरस्थ इलाकों में सुरक्षा और विकास गतिविधियों के विस्तार के साथ सड़क संपर्क की भूमिका भी बढ़ी है। ऐसे में बारिश के दौरान मार्ग का बार-बार दलदल में बदलना विकास और प्रशासनिक पहुंच दोनों के लिए चुनौती बन रहा है।
फिलहाल मुरुम-गिट्टी, आगे स्थायी समाधान जरूरी
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में सड़क के खराब हिस्सों की तत्काल मरम्मत की जरूरत है। जिन स्थानों पर सबसे ज्यादा कीचड़ और दलदल बन रहा है, वहां मुरुम और गिट्टी डालकर फिलहाल आवागमन बहाल किया जा सकता है।
साथ ही ग्रामीणों ने मार्ग का स्थायी सुधार कराने की मांग की है, ताकि हर बारिश में उन्हें इसी परेशानी से न जूझना पड़े। जरूरत के अनुसार जल निकासी की व्यवस्था और सड़क के कमजोर हिस्सों को मजबूत करना भी जरूरी है।
ग्रामीणों की मांग
- दलदली हिस्सों में तत्काल मुरुम-गिट्टी डालकर रास्ता दुरुस्त किया जाए।
- अत्यधिक खराब हिस्सों में तत्काल मशीनरी लगाकर आवागमन सुचारू किया जाए।
- बारिश के दौरान सड़क की नियमित निगरानी की जाए।
- मार्ग का स्थायी और गुणवत्तापूर्ण सुधार कराया जाए।
- ग्रामीणों और सुरक्षा बलों की आवाजाही को देखते हुए मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए।
सड़क पर फंसी गाड़ी ने पूछे कई सवाल
पांगुंड कैंप की ओर जा रही बीएसएफ की गाड़ी का कीचड़ में फंसना इस मार्ग की जमीनी स्थिति को सामने लाता है। जवानों को खुद सड़क पर उतरकर वाहनों को निकालने की कोशिश करनी पड़ी और भारी वाहन के लिए जेसीबी का इंतजार करना पड़ा।
सवाल यह है कि जब सुरक्षा बलों के वाहन भी इस रास्ते पर फंस रहे हैं, तो बारिश के दिनों में ग्रामीणों की आवाजाही कितनी सुरक्षित है?
बारिश के दौरान तत्काल राहत के तौर पर मुरुम-गिट्टी और मशीनरी की व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन हर साल पैदा होने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान सड़क के समुचित निर्माण और जल निकासी व्यवस्था से ही संभव होगा।




