नंदनवन जंगल सफारी बना छत्तीसगढ़ का वन्यजीव पर्यटन हॉटस्पॉट, हर साल बढ़ रही पर्यटकों की संख्या
320.15 हेक्टेयर में फैला जंगल सफारी प्रकृति, पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण का अनूठा केंद्र • सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और 'दीपाशा' जंगली भैंसा बने आकर्षण • वर्ष 2025-26 में 3.24 लाख से अधिक पर्यटकों ने किया भ्रमण

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर (अटल नगर) स्थित नंदनवन जंगल सफारी आज राज्य में पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस विशाल परिसर में हर वर्ष देश-विदेश से लाखों पर्यटक पहुंच रहे हैं। प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को करीब से देखने और जैव विविधता को समझने का अवसर मिलने से यह सफारी प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद बनती जा रही है।

वन विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जंगल सफारी को और अधिक आकर्षक तथा पर्यटक अनुकूल बनाया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 3 लाख 24 हजार 785 पर्यटकों ने जंगल सफारी का भ्रमण किया, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है।
मिनी जू से आधुनिक जंगल सफारी तक का सफर
नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में मिनी जू के रूप में हुई थी, जहां घायल एवं रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों की देखभाल की जाती थी। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने इसे आधिकारिक मिनी जू का दर्जा दिया। इसके बाद नवा रायपुर में आधुनिक जंगल सफारी विकसित करने की योजना बनी और वर्ष 2012 से 2015 के बीच इसका निर्माण हुआ। 1 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका लोकार्पण किया।
पांच सफारी जोन बढ़ा रहे रोमांच
जंगल सफारी को वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जोन में विकसित किया गया है।
- शाकाहारी सफारी में चीतल, सांभर, नीलगाय और काला हिरण प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते दिखाई देते हैं।
- भालू सफारी पर्यटकों को स्लॉथ भालू को करीब से देखने का अवसर देती है।
- बाघ सफारी में राष्ट्रीय पशु बाघ का रोमांचक अनुभव मिलता है।
- सिंह सफारी में एशियाई शेरों का संरक्षण किया जा रहा है।
- जू जोन में पक्षियों, सरीसृपों और विभिन्न वन्यजीवों की अनेक प्रजातियां आकर्षण का केंद्र हैं।
दुर्लभ वन्यजीवों ने बढ़ाया आकर्षण
नंदनवन जंगल सफारी में पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ वन्यजीव लाए गए हैं। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल तथा क्लोन जंगली भैंसा ‘दीपाशा’ पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बने हुए हैं।
संरक्षण के साथ पर्यावरण शिक्षा पर भी जोर
जंगल सफारी का उद्देश्य केवल वन्यजीवों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। यहां विद्यार्थियों और पर्यटकों के लिए समय-समय पर पर्यावरण शिक्षा एवं जैव विविधता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विश्व बाघ दिवस, अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस और वन्यजीव सप्ताह जैसे अवसरों पर विशेष आयोजन कर संरक्षण का संदेश दिया जाता है।
रायपुर से आसान पहुंच, सोमवार को रहता है बंद
नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर के सेक्टर-39 में स्थित है। यह स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 15 किलोमीटर तथा रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां विभिन्न प्रकार की सफारी राइड्स उपलब्ध हैं। जंगल सफारी प्रत्येक सोमवार को बंद रहती है।
पर्यटन के साथ संरक्षण का संदेश
वनमंडलाधिकारी थेजस शेखर के अनुसार नंदनवन जंगल सफारी आज केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और पर्यावरण शिक्षा का प्रभावी केंद्र बन चुका है। यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति के करीब पहुंचकर वन्यजीवों का दीदार करने के साथ-साथ उनके संरक्षण की आवश्यकता को भी समझ रहे हैं।




