आवारा पशुओं ने उजाड़ी किसानों की मेहनत, छोटेडोंगर में धान की फसल पर संकट
बारिश के बीच खेतों में घुस रहे गाय-बैल, कई किसानों की 40 से 50 प्रतिशत फसल बर्बाद होने का दावा; पशुपालन विभाग व पंचायत की कार्यशैली पर उठे सवाल

(संतोष मजूमदार) छोटेडोंगर। बारिश के साथ शुरू हुए खरीफ सीजन में छोटेडोंगर क्षेत्र के किसानों के सामने आवारा पशुओं की समस्या गंभीर होती जा रही है। धान की रोपाई के बाद खेतों में घुस रहे आवारा गाय और बैल किसानों की फसल को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि पशुपालन विभाग और ग्राम पंचायत की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले तीन-चार दिनों से क्षेत्र के कई किसान खेतों में घुसे आवारा पशुओं के फोटो और वीडियो प्रशासन तथा मीडिया को भेज रहे हैं। तस्वीरों में दर्जनों पशु धान की फसल चरते दिखाई दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

16 हजार के बीज से तैयार फसल हुई बर्बाद
छोटेडोंगर निवासी किसान श्रवण कुमार नाग ने बताया कि उन्होंने लगभग 16 हजार रुपये का धान बीज खरीदकर खेत में रोपाई की थी, लेकिन दो दिन पहले आवारा पशुओं ने खेत में घुसकर फसल को पूरी तरह नुकसान पहुंचा दिया। उनका कहना है कि एक ही रात में महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया।
दिन में खेती, रात में रखवाली फिर भी राहत नहीं
किसानों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच वे कर्ज लेकर बीज, खाद और कृषि कार्य कर रहे हैं। दिनभर खेतों में काम करने के बाद रात में भी फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। इसके बावजूद थोड़ी सी चूक होने पर आवारा पशु खेतों में घुसकर पूरी फसल चौपट कर देते हैं। कई किसानों ने अपनी 40 से 50 प्रतिशत तक फसल खराब होने का दावा किया है।
मुनादी के बाद भी नहीं थमी लापरवाही
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत ने कोटवार के माध्यम से कई बार पशुपालकों को अपने पशु बांधकर रखने की मुनादी कराई, लेकिन इसका अपेक्षित असर नहीं हुआ। किसानों का आरोप है कि लापरवाह पशुपालकों के खिलाफ न तो कोई जुर्माना लगाया जा रहा है और न ही सख्त कार्रवाई की जा रही है।
गौठान व्यवस्था और निगरानी पर उठे सवाल
किसानों का कहना है कि आवारा पशुओं को पकड़कर गौठान में रखने की प्रभावी व्यवस्था नहीं है। पशुओं को पकड़ने के लिए न कोई विशेष दल सक्रिय है और न ही नियमित निगरानी की जा रही है। इससे क्षेत्र में आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
किसानों ने प्रशासन से की यह मांग
किसानों ने जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत से मांग की है कि तत्काल विशेष अभियान चलाकर आवारा पशुओं को पकड़ा जाए, प्रत्येक पंचायत में अस्थायी गौठान की व्यवस्था की जाए तथा लापरवाह पशु मालिकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रमुख मांगें
- आवारा पशुओं को पकड़कर गौठान में रखा जाए।
- लापरवाह पशु मालिकों पर 5 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाए।
- प्रत्येक पंचायत में रात्रिकालीन गश्त और निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।




