कुष्ठ पर निर्णायक वार की तैयारी, जिले के 51 स्वास्थ्य अधिकारी हुए प्रशिक्षित
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण, शीघ्र पहचान, समयबद्ध उपचार और विकलांगता रोकथाम पर दिया गया विशेष जोर

नारायणपुर। कुष्ठ रोग के उन्मूलन की दिशा में नारायणपुर जिले ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी) के तहत जिले के स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों में सेवाएं दे रहे 51 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को आधुनिक उपचार, शीघ्र पहचान और रोग नियंत्रण की नवीनतम तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि प्रशिक्षित स्वास्थ्य अधिकारी गांव-गांव तक समय रहते मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे, जिससे विकलांगता जैसी गंभीर स्थितियों को रोका जा सकेगा।
जिला स्वास्थ्य समिति के अनुरोध पर बुधवार को सीएमएचओ कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित एक दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण का आयोजन जिला कुष्ठ प्रकोष्ठ के माध्यम से किया गया। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों से पहुंचे 51 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने भाग लेकर नवीनतम चिकित्सा प्रबंधन की जानकारी प्राप्त की।
ग्रामीण स्तर पर मजबूत होगी रोग पहचान की व्यवस्था
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तुकाराम कुवर के मार्गदर्शन में हुआ। इस अवसर पर जिला कुष्ठ अधिकारी (प्रभारी) डॉ. बृज नंदन भानपुरिया, एनबीवीबीडीसीपी नोडल अधिकारी तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक राजीव कुमार सिंह ने जिले में कुष्ठ रोग की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ने से दूरस्थ क्षेत्रों में भी रोगियों की शीघ्र पहचान संभव होगी और मरीजों को शुरुआती चरण में ही उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
आधुनिक उपचार से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक मिली जानकारी
प्रशिक्षण में क्योरेबा हेल्थ एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन के विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों एवं राज्य स्तरीय प्रशिक्षकों डॉ. सिद्धार्थ बिस्वाल तथा एस.एन. तिवारी ने प्रतिभागियों को कुष्ठ रोग की महामारी विज्ञान, प्रारंभिक पहचान एवं निदान, आधुनिक केस प्रबंधन, मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी), विकलांगता की रोकथाम, पुनर्वास, संपर्क अनुवीक्षण तथा कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों के मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया।
विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर पहचान और नियमित उपचार से कुष्ठ रोग पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है तथा इससे होने वाली स्थायी विकलांगता को भी काफी हद तक रोका जा सकता है।
प्रश्नोत्तर सत्र में दूर हुई स्वास्थ्य अधिकारियों की जिज्ञासाएं
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों के साथ संवादात्मक प्रश्नोत्तर एवं अनुभव साझा करने का विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें स्वास्थ्य अधिकारियों ने क्षेत्रीय अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
समापन अवसर पर प्रशिक्षण का फीडबैक लिया गया तथा सभी 51 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रशिक्षण पूर्ण होने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
प्रशिक्षण से मिलेगा यह लाभ
- गांव स्तर पर कुष्ठ रोगियों की शीघ्र पहचान होगी।
- समयबद्ध उपचार से संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण मिलेगा।
- विकलांगता की रोकथाम में सहायता मिलेगी।
- सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी।
- दूरस्थ क्षेत्रों तक राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।




