अबूझमाड़ के युवाओं को आत्मनिर्भरता की नई राह
आईटीबीपी के 14 दिवसीय प्रशिक्षण से मिली नई पहचान, पांच युवाओं को साइकिल रिपेयरिंग टूल किट देकर स्वरोजगार के लिए किया प्रोत्साहित

(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 12 जून। अबूझमाड़ के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में 41वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) की पहल नई उम्मीद लेकर आई है। 14 दिवसीय साइकिल रिपेयरिंग प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले पांच युवाओं को प्रशिक्षण के समापन पर साइकिल रिपेयरिंग टूल किट और कपड़ों का किट प्रदान किया गया, जिससे वे तत्काल स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा सकें।
डीआईजी सेक्टर मुख्यालय भुवनेश्वर के मार्गदर्शन तथा 41वीं वाहिनी के कमांडेंट बेनुधर नायक के निर्देशन में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन सामरिक मुख्यालय में हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय आदिवासी युवाओं को व्यावहारिक कौशल से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों के लिए तैयार करना था।
सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण से निखरी दक्षता
आवासीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को साइकिल की मरम्मत, रखरखाव और सर्विसिंग से संबंधित तकनीकी जानकारी सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों माध्यमों से दी गई। प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क रहा, जिसमें आईटीबीपी द्वारा आवास, भोजन, परिवहन और प्रशिक्षण की समस्त व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं। 41वीं वाहिनी की तैनाती कस्तूरमेटा, कुतुल, बेड़माकोटि, पदमकोट और नेलांगुर क्षेत्रों में है।
आजीविका के नए अवसरों से भी कराया परिचित
प्रशिक्षण अवधि के दौरान युवाओं को जिले में संचालित विभिन्न आजीविका गतिविधियों की जानकारी देने के लिए उद्यानिकी फार्म, मत्स्य पालन केंद्र, स्विमिंग पूल, पारंपरिक कुम्हार शिल्प केंद्र, नारियल बागान तथा आम बागान का भ्रमण भी कराया गया। इससे प्रतिभागियों को वैकल्पिक रोजगार की संभावनाओं से अवगत होने का अवसर मिला।
बढ़ा आत्मविश्वास, जताया आभार
समापन समारोह में 41वीं वाहिनी आईटीबीपी के अधिकारी एवं जवान, साइकिल प्रशिक्षक योगेश तथा प्रेस एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रशिक्षुओं ने आईटीबीपी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशिक्षण से उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और भविष्य में आजीविका के नए अवसर प्राप्त होंगे।
अबूझमाड़ के युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में 41वीं वाहिनी आईटीबीपी की यह पहल सामाजिक-आर्थिक विकास, सशक्तिकरण और मुख्यधारा से जुड़ाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




