बाल साहित्य से संवरेंगे भविष्य के संस्कार, नई शिक्षा नीति को मिलेगा नया आयाम: केदार कश्यप
'मोर अंगना के शोर' साझा बाल काव्य संग्रह का भव्य विमोचन, क्यूआर कोड आधारित नवाचार बना आकर्षण; साहित्य, तकनीक और शिक्षा के समन्वय को बताया भविष्य की आवश्यकता

रायपुर, 29 जून। बच्चों के सर्वांगीण विकास, रचनात्मक शिक्षा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में साझा बाल काव्य संग्रह ‘मोर अंगना के शोर’ का रविवार को राजधानी रायपुर के वृंदावन भवन में भव्य विमोचन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बाल साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, संवेदनशीलता और सृजनशीलता का आधार है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह काव्य संग्रह नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

समारोह में पुस्तक से जुड़े रचनाकारों, शिक्षकों एवं साहित्यकारों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक अनुज शर्मा, अमित चिमलानी, शिक्षाविद, साहित्यकार, रचनाकार तथा बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
बाल साहित्य से होगा व्यक्तित्व निर्माण
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके बच्चों की शिक्षा, संस्कार और रचनात्मक सोच पर निर्भर करता है। बाल साहित्य बच्चों में संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता, नैतिक मूल्यों और भाषा कौशल का विकास करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी रचनात्मक पहलें नई पीढ़ी को ज्ञान के साथ-साथ अपनी संस्कृति, समाज और परंपराओं से भी जोड़ती हैं।
नई शिक्षा नीति और एफएलएन अभियान को मिलेगी मजबूती
मंत्री कश्यप ने कहा कि ‘मोर अंगना के शोर’ केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में तैयार किया गया एक प्रभावी शैक्षणिक दस्तावेज है। यह पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) तथा बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) अभियान के उद्देश्यों को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी। विषय आधारित बाल कविताएं बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ाने के साथ उनकी कल्पनाशीलता और रचनात्मक क्षमता को भी विस्तार देंगी।
क्यूआर कोड आधारित नवाचार बना विशेष आकर्षण
कार्यक्रम में पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता प्रत्येक कविता के साथ जोड़े गए क्यूआर कोड को बताया गया। मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि साहित्य और तकनीक का यह अभिनव समन्वय शिक्षा को अधिक आधुनिक, सरल और प्रभावी बनाएगा। क्यूआर कोड के माध्यम से बच्चे कविता को पढ़ने के साथ-साथ सुन भी सकेंगे, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक रोचक और सहज बनेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए भी अत्यंत उपयोगी साबित होगी तथा समावेशी शिक्षा को नई दिशा देगी।
सामूहिक प्रयासों से होगा सशक्त राष्ट्र निर्माण
मंत्री केदार कश्यप ने पुस्तक के संपादक वीरेंद्र कुमार साहू, सभी रचनाकारों, शिक्षकों एवं सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि जब शिक्षा, साहित्य और समाज एक साथ आगे बढ़ते हैं, तब राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया और अधिक मजबूत होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘मोर अंगना के शोर’ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बाल साहित्य के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी और अनुकरणीय उदाहरण बनेगी।
समारोह के अंत में साहित्यकारों और शिक्षकों ने इस पहल को नई पीढ़ी के लिए ज्ञान, संस्कार और नवाचार का प्रभावी संगम बताते हुए इसे शिक्षा जगत के लिए मील का पत्थर करार दिया।




