वेतनमान विसंगति पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप वेतनमान लागू करने, प्रशासनिक अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग; जिला कलेक्टर के माध्यम से भेजा ज्ञापन

नारायणपुर। वेतनमान विसंगति और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत बुधवार को नारायणपुर में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। जिला कलेक्टर के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन में भारत सरकार की संचालन गाइडलाइन के अनुरूप वेतनमान लागू करने, पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है।

सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि वे वर्ष 2019 से आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। कोविड-19 महामारी सहित विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय का लाभ अब तक नहीं मिल सका है।
केंद्र की गाइडलाइन और वर्तमान वेतनमान में अंतर का दावा
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि आयुष्मान भारत-हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर ऑपरेशनल गाइडलाइन के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को 25 हजार रुपये प्रतिमाह निश्चित मानदेय तथा 15 हजार रुपये प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है।
संघ का दावा है कि वर्तमान में प्रदेश में केवल 16 हजार 500 रुपये निश्चित मानदेय तथा 15 हजार रुपये प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, जिससे वेतनमान में असमानता बनी हुई है।
प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच की मांग
संघ ने आरोप लगाया कि राज्य स्वास्थ्य समिति की शासी निकाय द्वारा पारित प्रस्तावों के अनुरूप संशोधित वेतनमान का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे जाने के बजाय अलग प्रस्ताव भेजे जाने की आशंका है। इस संबंध में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों और विभागीय बैठकों की कार्यवाही का हवाला देते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जांच में प्रशासनिक लापरवाही या शासन के निर्णयों की अवहेलना सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जाए।
सप्लीमेंट्री पीआईपी भेजने की भी मांग
संघ ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा अनुमोदित प्रस्ताव को सप्लीमेंट्री पीआईपी के माध्यम से तत्काल भारत सरकार को पुनः भेजने की मांग की है, ताकि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वेतनमान और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।
इसके अलावा जांच पूरी होने तक सभी संबंधित अभिलेख, नोटशीट, ई-फाइल, पीआईपी प्रस्ताव, एनपीसीसी पत्राचार तथा भारत सरकार को भेजे गए दस्तावेज सुरक्षित रखने और जांच पूरी होने के बाद की गई कार्रवाई से संगठन को अवगत कराने की भी मांग की गई है।
‘यह केवल वेतन का नहीं, अधिकारों का सवाल’
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ, नारायणपुर के जिला अध्यक्ष अंशु नाग ने कहा कि यह मामला केवल वेतनमान तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के सेवा अधिकार, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। उन्होंने शासन से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने वाले अधिकारियों के हित में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिले के बड़ी संख्या में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित रहे और लंबित मांगों का शीघ्र निराकरण करने की मांग दोहराई।
मुख्य मांगें
- भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप 25 हजार रुपये निश्चित मानदेय लागू किया जाए।
- वेतनमान से जुड़े पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाए।
- वित्तीय वर्ष 2026-27 का संशोधित प्रस्ताव सप्लीमेंट्री पीआईपी के माध्यम से भारत सरकार को भेजा जाए।
- जांच पूरी होने तक सभी संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं और कार्रवाई की जानकारी संगठन को उपलब्ध कराई जाए।




