नारायणपुर

बदलते बस्तर की नई रफ्तार : रावघाट तक पहुंचा ‘ऐरावत’ इंजन, दो माह में शुरू होगा रेल संचालन

बहुप्रतीक्षित दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के प्रथम चरण का ट्रायल पूर्ण, बस्तरवासियों का दशकों पुराना सपना हुआ साकार

नक्सलवाद की छाया से निकलकर विकास की पटरी पर दौड़ा बस्तर, नारायणपुर से मात्र 20-25 किमी दूर मिलेगा रेलवे स्टेशन का लाभ

(Kailash Soni) नारायणपुर/रावघाट। बस्तर के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक उपलब्धि लेकर आया। वर्षों से प्रतीक्षित दल्लीराजहरा-जगदलपुर रेल परियोजना के प्रथम चरण में ताडोकी से रावघाट सरंगीपाल रेलवे स्टेशन तक भारतीय रेलवे के “ऐरावत” इंजन क्रमांक 12431 डब्ल्यू डी जी-4 का सफल ट्रायल पूरा होने के बाद पूरे क्षेत्र में उत्साह और हर्ष का माहौल है। चार दशक तक नक्सलवाद की काली छाया झेलने वाले बस्तर में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है।

रावघाट परियोजना के अंतर्गत दल्लीराजहरा से रावघाट सरंगीपाल स्टेशन तक रेल पटरी बिछाने का कार्य पूर्ण होने के बाद 20 मई को अंतिम इंजन ट्रायल किया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रायल के दौरान संचालन से जुड़ी तकनीकी और सुरक्षा व्यवस्थाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया। इंजन संचालन के दौरान सामने आई छोटी-मोटी कमियों को चिह्नित कर लिया गया है, जिन्हें दूर करने के बाद करीब दो माह के भीतर सरंगीपाल स्टेशन तक नियमित रेल संचालन प्रारंभ करने की तैयारी की जा रही है।

इस उपलब्धि को केवल रेलवे परियोजना का चरण पूरा होना नहीं माना जा रहा, बल्कि यह बदलते बस्तर और लौटते विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है। जिन पहाड़ियों और जंगलों में कभी भय, बंदूक और बारूदी सुरंगों की चर्चा होती थी, वहां अब रेल इंजन की आवाज विकास और उम्मीद का संदेश लेकर पहुंच रही है।

नारायणपुर के लोगों को मिलेगा सीधा लाभ

रावघाट सरंगीपाल रेलवे स्टेशन शुरू होने से नारायणपुर जिला मुख्यालय और आसपास के हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। नारायणपुर जिला मुख्यालय से सरंगीपाल रेलवे स्टेशन की दूरी लगभग 20 से 25 किलोमीटर है, जिसे सड़क मार्ग से बेहद आसानी से 15 से 20 मिनट में तय किया जा सकेगा।

अब तक नारायणपुर और आसपास के लोगों को रेल यात्रा के लिए दल्लीराजहरा, दुर्ग या रायपुर जैसे दूरस्थ स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता था। रेल सेवा शुरू होने के बाद लोगों को अपने ही जिले के नजदीकी रेलवे स्टेशन से सफर की सुविधा मिलेगी। इससे यात्रा का समय और खर्च दोनों कम होंगे।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सुविधा केवल रेल यात्रा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के अवसरों को भी नई दिशा देगी। दूरस्थ आदिवासी अंचलों के लोगों को अब बड़े शहरों तक पहुंचने में पहले जैसी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

वर्षों की प्रतीक्षा के बाद बदली तस्वीर

करीब दो दशक पहले शुरू हुई दल्लीराजहरा-जगदलपुर रेल परियोजना लंबे समय तक नक्सल हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों के कारण धीमी गति से आगे बढ़ती रही। कई बार निर्माण कार्य बाधित हुए और परियोजना को लेकर निराशा का माहौल भी बना रहा।

पूर्व में प्रकाशित रिपोर्टों में ताडोकी से रावघाट के बीच अधूरे स्टेशन, पुल-पुलियों और ट्रैक निर्माण में देरी की बात सामने आई थी। उस समय यह आशंका भी जताई जा रही थी कि परियोजना को पूरा होने में कई वर्ष और लग सकते हैं।

लेकिन अब हालात तेजी से बदले हैं। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और नक्सल प्रभाव कम होने के बाद निर्माण कार्यों ने गति पकड़ी। रेलवे विभाग, निर्माण एजेंसियों और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से अब परियोजना का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है। ताडोकी से रावघाट तक इंजन का सफल ट्रायल इस परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।

‘ऐरावत’ इंजन बना बदलाव का प्रतीक

भारतीय रेलवे का “ऐरावत” इंजन क्रमांक 12431 जब ताडोकी से रावघाट सरंगीपाल स्टेशन तक पहुंचा तो यह दृश्य स्थानीय लोगों के लिए भावुक क्षण बन गया। रेलवे ट्रैक के आसपास मौजूद ग्रामीणों, कर्मचारियों और सुरक्षा बलों ने इस ऐतिहासिक पल का स्वागत उत्साह के साथ किया।

लोगों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक केवल अधूरी पटरियां और निर्माण कार्य देखे थे, लेकिन अब पहली बार इंजन को रावघाट तक पहुंचते देखकर उन्हें विश्वास हुआ है कि बस्तर सचमुच विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

नक्सलवाद से विकास की ओर बढ़ता बस्तर

एक समय ऐसा था जब बस्तर की पहचान नक्सल हिंसा और असुरक्षा से होती थी। रेल परियोजनाएं नक्सलियों के निशाने पर रहती थीं और निर्माण कार्यों में लगातार बाधाएं आती थीं। कई जवानों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने इस परियोजना के दौरान अपनी जान तक गंवाई।

लेकिन अब बस्तर बदल रहा है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और शासन की विकास योजनाओं के कारण नक्सल प्रभाव कमजोर पड़ा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के बाद अब रेल परियोजना का आगे बढ़ना भी इसी सकारात्मक बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बस्तर अब केवल संघर्ष और भय की पहचान नहीं रहेगा, बल्कि विकास, रोजगार और अवसरों के लिए भी जाना जाएगा।

आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति

रेल सेवा शुरू होने से रावघाट और बस्तर क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यह क्षेत्र लौह अयस्क समेत खनिज संपदा से समृद्ध माना जाता है। रेल संपर्क मजबूत होने से खनिज परिवहन आसान होगा और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बाजारों तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी। पर्यटन क्षेत्र को भी इसका लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

बदलते बस्तर की नई पहचान

दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना का प्रथम चरण पूर्ण होना केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि बस्तर के सामाजिक और मानसिक बदलाव की बड़ी कहानी है। यह उस क्षेत्र की तस्वीर है, जिसने दशकों तक नक्सलवाद और असुरक्षा के बीच जीवन बिताया, लेकिन अब विकास की पटरी पर आगे बढ़ने का संकल्प ले चुका है।

ताडोकी से रावघाट तक सफल इंजन ट्रायल ने यह संदेश साफ कर दिया है कि अब बस्तर बदल रहा है। आने वाले दो माह में जब नियमित रेल संचालन शुरू होगा, तब यह केवल यात्रियों के लिए सुविधा नहीं होगी, बल्कि पूरे बस्तर के लिए विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की नई शुरुआत साबित होगी।

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