नारायणपुर

अबूझमाड़ के किसानों को ‘नई सुबह’ की राह, औषधि खेती से बढ़ेगी आय

धमतरी में अध्ययन प्रवास व प्रशिक्षण—खस, ब्राह्मी व बच की खेती का सीखा गुर, दोगुनी आय के मॉडल से रूबरू हुए आदिवासी कृषक

नारायणपुर/धमतरी। नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन ने नई पहल की है। औषधि पादप बोर्ड रायपुर द्वारा “नई सुबह की ओर” अभियान के तहत अबूझमाड़ (बस्तर) के 50 से अधिक आदिवासी किसानों के लिए 2 मई 2026 को धमतरी जिले में अध्ययन प्रवास सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की उन्नत खेती से परिचित कराया गया।

कोहकामेटा, कुरुषनार, कंदाड़ी, किहकाड़, कोडोली और बासिंगबाहर गांवों से पहुंचे किसानों ने धमतरी के कंडेल गांव में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा की जा रही खस, ब्राह्मी और बच की खेती का अवलोकन किया। यहां किसानों को खेत की तैयारी, रोपण तकनीक, सिंचाई, खाद प्रबंधन एवं विपणन की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

पारंपरिक खेती से दोगुनी आय का मॉडल
महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पारंपरिक धान की खेती के स्थान पर औषधीय पौधों की खेती अपनाने से उन्हें दोगुना लाभ मिल रहा है। कम लागत और 3-4 वर्षों तक लगातार उत्पादन मिलने से यह खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।

खस की खेती के लिए भी मिला मार्गदर्शन
अध्ययन प्रवास के दूसरे चरण में किसानों को मगरलोड क्षेत्र में खस की खेती का निरीक्षण कराया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि खस की बाजार में भारी मांग है और इसे नदियों व नालों के किनारे आसानी से उगाया जा सकता है। इस मॉडल को बस्तर क्षेत्र में भी अपनाकर किसान बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।

निःशुल्क प्रशिक्षण व पौधों की सुविधा
औषधि पादप बोर्ड द्वारा किसानों को प्रशिक्षण के साथ-साथ पौधे भी निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही निवेशकों से अनुबंध के जरिए अग्रिम आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था भी की जा रही है, जिससे किसान बिना जोखिम के नई खेती शुरू कर सकें।

किसानों में दिखा उत्साह
इस अध्ययन प्रवास के बाद अबूझमाड़ के किसान औषधीय खेती अपनाने के लिए उत्साहित नजर आए। लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से दूर रहे इन क्षेत्रों में अब आय के नए विकल्प खुलने लगे हैं।

‘नई सुबह’ की ओर बढ़ता बस्तर
बोर्ड के सीईओ जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि बस्तर के सभी जिलों में इस तरह के प्रशिक्षण और अध्ययन प्रवास लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसानों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती से जोड़कर उनकी आय दो से तीन गुना तक बढ़ाई जा सके।

यह पहल अबूझमाड़ के किसानों के लिए न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है, बल्कि क्षेत्र को विकास की नई दिशा भी दे रही है।

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