130 किमी दूर लंका में पहुंचा सुशासन, शिविर में सैकड़ों ग्रामीणों को मिला लाभ
नक्सल प्रभावित अंतिम छोर तक पहुंची प्रशासनिक टीम, 310 आवेदन में 242 का मौके पर निराकरण ‘सुशासन एक्सप्रेस’ बनी सहारा—गांव-गांव पहुंच रहीं 27 तरह की सेवाएं

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। इन्द्रावती नदी के किनारे बसे जिले के अंतिम छोर के गांव लंका में जब प्रशासनिक अमला पहुंचा तो यह केवल एक शिविर नहीं, बल्कि बदलते हालात की तस्वीर बन गया। दुर्गम पहाड़ों, नदी-नालों और वर्षों तक नक्सल प्रभाव झेल चुके इस क्षेत्र में पहली बार इस स्तर का शिविर आयोजित हुआ, जहां सैकड़ों ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का सीधा लाभ मिला।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में नियद नेल्लानार योजना के तहत 23-24 अप्रैल को आयोजित इस दो दिवसीय शिविर ने दूरस्थ अंचल में विकास की नई उम्मीद जगाई। ओरछा विकासखंड से 65 किमी और जिला मुख्यालय से करीब 130 किमी दूर इस गांव तक प्रशासन की पहुंच ने यह संदेश दिया कि अब शासन अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है।

310 आवेदन, 242 का तत्काल समाधान
शिविर में लंका सहित डोंडिमरका, पदमेटा, तालावाड़ा और कारंगुल के ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे। कुल 310 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 242 का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया। शेष आवेदनों की प्रक्रिया जारी है।
आवेदनों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 99, आधार कार्ड के 80, राशन कार्ड के 25, मनरेगा जॉब कार्ड के 34, स्वास्थ्य विभाग के 18 और पंचायत विभाग के 22 आवेदन प्रमुख रहे। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास, राजस्व और अन्य विभागों से जुड़े आवेदन भी प्राप्त हुए।
‘सुशासन एक्सप्रेस’ बनी आकर्षण का केंद्र
शिविर में वाई-फाई युक्त सुशासन एक्सप्रेस वाहन ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी राहत साबित हुआ। इस मोबाइल सेवा वाहन के माध्यम से 27 प्रकार के दस्तावेज मौके पर ही तैयार किए गए। आधार, जाति, निवास सहित अन्य प्रमाण पत्रों के लिए अब ग्रामीणों को दूर-दराज कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं।
अब तक इस वाहन के जरिए 17,520 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 16,279 का निराकरण किया जा चुका है—जो शासन की त्वरित सेवा प्रणाली को दर्शाता है।
हर विभाग एक ही छत के नीचे
शिविर में कृषि, स्वास्थ्य, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास, खाद्य, समाज कल्याण, आदिवासी विकास और बैंकिंग सहित विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए। ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही लाभान्वित किया गया।
बदलते हालात, बढ़ता विश्वास
कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि ऐसे शिविर अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शासन की मजबूत उपस्थिति का प्रमाण हैं। इससे ग्रामीणों को एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं मिल रही हैं और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान हो रहा है।
उन्होंने बताया कि अगला शिविर 29-30 अप्रैल को आदनार में आयोजित होगा, जिसमें आसपास के गांवों के ग्रामीणों को लाभ मिलेगा।
संवेदनशील शासन की नई पहचान
लंका में लगा यह शिविर केवल योजनाओं का वितरण नहीं, बल्कि उस भरोसे की नींव है जो वर्षों से उपेक्षित इस क्षेत्र में अब मजबूत हो रही है। जहां कभी पहुंचना मुश्किल था, वहां अब शासन खुद चलकर पहुंच रहा है—और यही बदलते बस्तर की नई पहचान बन रही है।




