नारायणपुर

डीएमएफ पर नारायणपुर की बड़ी जीत: अब जिले को मिलेगा अपना हक

शासन का स्पष्ट आदेश— रावघाट खनन से मिलने वाली राशि में नारायणपुर की हिस्सेदारी तय

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। खनन का असर झेल रहे नारायणपुर जिले के लिए आखिरकार बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) की राशि को लेकर चल रहे विवाद में अब तस्वीर साफ हो गई है। छत्तीसगढ़ शासन के खनिज संसाधन विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि रावघाट खनन परियोजना से प्राप्त डीएमएफ निधि में नारायणपुर का वैधानिक अधिकार है और उसे उसका हिस्सा दिया जाए।

यह वही मुद्दा है जिसे लगातार प्रमुखता से उठाया और जमीनी हकीकत को सामने लाया। खबरों की श्रृंखला और जनआवाज के दबाव का ही परिणाम है कि शासन को निर्णय लेना पड़ा।


संघर्ष से समाधान तक

नारायणपुर में खनन की वजह से वर्षों से धूल, प्रदूषण और संसाधनों पर दबाव बढ़ता रहा, लेकिन विकास के लिए मिलने वाली डीएमएफ राशि का लाभ जिले को नहीं मिल पा रहा था। अधिकांश राशि कांकेर जिले को जारी होने से नारायणपुर के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता गया।

जनप्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपे, विरोध जताया और 7 दिन का अल्टीमेटम भी दिया। ग्रामीणों ने साफ कहा— “जहां असर, वहीं अधिकार”

  • डीएमएफ राशि के असमान वितरण पर सवाल
  • खनन प्रभावित गांवों की वास्तविक स्थिति
  • जनप्रतिनिधियों के विरोध और चेतावनी

इन खबरों ने पूरे मामले को राज्य स्तर तक पहुंचाया और अंततः शासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।


शासन के आदेश में क्या साफ हुआ

22 अप्रैल 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि:

  • रावघाट खनन परियोजना का विस्तार नारायणपुर जिले तक है
  • खनिज उत्पादन में नारायणपुर की भागीदारी है
  • ऐसे में डीएमएफ निधि के बंटवारे में नारायणपुर का अधिकार बनता है
  • निर्धारित अनुपात के अनुसार राशि नारायणपुर को हस्तांतरित की जाए

अब खुलेगा विकास का रास्ता

इस फैसले से जिले में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है:

  • सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल योजनाओं को मजबूती
  • खनन प्रभावित गांवों को सीधा लाभ
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार और सुविधाओं में सुधार

खुशी और उम्मीद का माहौल

लंबे संघर्ष के बाद मिली इस सफलता से जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों में खुशी है। इसे नारायणपुर के हक और सम्मान की जीत माना जा रहा है।


अंतिम बात

खनन की मार झेलते नारायणपुर को अब उसका अधिकार मिलने की दिशा तय हो गई है। यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि जनसंघर्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता की जीत है।

अब सबसे बड़ा सवाल— आदेश जमीन पर कितनी तेजी से लागू होता है।

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