नारायणपुर

नई धड़कन से खिली मुस्कान: अबूझमाड़ की पारूल को मिला जीवनदान

‘प्रोजेक्ट धड़कन’ बना वरदान, 2 साल की बच्ची की रायपुर में सफल हार्ट सर्जरी 3000 बच्चों की जांच में सामने आए गंभीर मामले, दूरस्थ अंचलों तक पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 25 अप्रैल। अबूझमाड़ के घने जंगलों के बीच बसे ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय मासूम पारूल दुग्गा के चेहरे पर लौट आई मुस्कान ने पूरे जिले को भावुक कर दिया है। कभी कमजोरी और थकान से जूझ रही यह बच्ची अब फिर से खेल-कूद में मग्न है। यह संभव हुआ है जिला प्रशासन की पहल ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ और समय पर हुए इलाज से, जिसने पारूल को नई जिंदगी दे दी।

कुछ समय पहले तक पारूल सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी। परिवार को उसकी बीमारी का अंदाजा तक नहीं था। सीमित संसाधनों वाले गांव में इलाज की कल्पना भी मुश्किल थी। इसी बीच जिले में शुरू हुए “प्रोजेक्ट धड़कन” के तहत स्वास्थ्य टीम गांव पहुंची और स्क्रीनिंग के दौरान पारूल के हृदय में गंभीर समस्या की पहचान हुई।

गांव-गांव पहुंची स्वास्थ्य टीम, खुली उम्मीद की राह
फरवरी 2026 में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य आंगनबाड़ी और स्कूलों में बच्चों की हृदय संबंधी जांच करना है। पहले चरण में 3000 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें तीन बच्चों में गंभीर हृदय रोग के लक्षण पाए गए। पारूल भी उन्हीं में से एक थी।

जैसे ही परिवार को बीमारी की जानकारी मिली, चिंता के साथ उम्मीद भी जगी। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए बेहतर इलाज की व्यवस्था की। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने बच्चों को रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के लिए रवाना किया।

रायपुर में मिली जिंदगी की नई आस
अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच में पारूल के हृदय में गंभीर समस्या की पुष्टि हुई। 10 अप्रैल 2026 को उसकी सफल हार्ट सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में लगातार देखभाल की गई और अब पारूल पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने गांव लौट आई है।

आज पारूल की खिलखिलाहट उसके परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी बन गई है। मां-बाप की आंखों में राहत और चेहरे पर संतोष साफ नजर आता है।

प्रशासन की पहल बनी मिसाल
कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि “प्रोजेक्ट धड़कन” का उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों और मैदानी कर्मचारियों की सराहना करते हुए इसे बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उम्मीद का नाम बन चुका है ‘प्रोजेक्ट धड़कन’
पारूल की कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि उस बदलाव की मिसाल है जहां अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक भी संवेदनशील शासन की पहुंच बनी है। यह विश्वास की कहानी है कि अब जंगल-पहाड़ों के बीच रहने वाले बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित हाथों में है।

नारायणपुर में “प्रोजेक्ट धड़कन” अब एक योजना नहीं, बल्कि हर परिवार के लिए उम्मीद की नई धड़कन बन चुका है।

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़ पक्ष पर विपक्ष पर हर एक पक्ष पर निष्पक्ष बेबाक एवं धारदार पत्रकारिता के लिए संकल्पित है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page