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दशहरे पर बन रहा है दुर्लभ संयोग! श्रवण नक्षत्र में विजयादशमी, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और रावण दहन का समय

विजय मुहूर्त में शुरू कर सकते हैं नए कार्य, शस्त्र पूजन और शमी पूजा का भी विशेष महत्व; 20 अक्टूबर को मनाया जा रहा है बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़ | धर्म-ज्योतिष डेस्क

नारायणपुर। असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पर्व आज, 20 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इस बार दशहरे पर श्रवण नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिषीय मान्यताओं में शुभ माना जाता है। ऐसे में पूजा-पाठ, शस्त्र पूजन और नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त जानने को लेकर लोगों में उत्सुकता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी। वहीं, इसी पर्व को मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के रूप में भी मनाया जाता है। यही वजह है कि देशभर में दशहरे का पर्व श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

श्रवण नक्षत्र का क्या है विशेष महत्व?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, श्रवण नक्षत्र 19 अक्टूबर को दोपहर 3:38 बजे प्रारंभ हुआ और 20 अक्टूबर को शाम 6:02 बजे तक रहेगा। दशहरे पर इस नक्षत्र का संयोग होने से पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। मान्यता है कि इस दौरान शुभ कार्यों की शुरुआत करना मंगलकारी हो सकता है।

विजयादशमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग आधारित प्रकाशित जानकारी के अनुसार, इस वर्ष दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे तक रहेगी।

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक।
  • अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक।
  • श्रवण नक्षत्र: 20 अक्टूबर को शाम 6:02 बजे तक।

इन समयों में पूजा, शमी पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं। हालांकि, ये प्रकाशित पंचांग के समय हैं; नारायणपुर में स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

शस्त्र पूजन से लेकर नए काम की शुरुआत तक, क्यों खास है दशहरा?

विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। इस दिन लोग अपने शस्त्रों, औजारों और कार्य में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा करते हैं। व्यापारी नए काम की शुरुआत और बही-खातों का पूजन करते हैं। वहीं, शमी वृक्ष की पूजा और मां अपराजिता की आराधना भी कई परंपराओं में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि विजयादशमी का दिन नई शुरुआत और विजय का प्रतीक है। हालांकि, किसी कार्य की सफलता उसके लिए किए गए प्रयास, सही योजना और निरंतर मेहनत पर भी निर्भर करती है।

रावण दहन सिर्फ परंपरा नहीं, बुराइयों के अंत का संदेश

दशहरे पर रावण के पुतले का दहन अहंकार, अन्याय और अधर्म के अंत का प्रतीक माना जाता है। रावण विद्वान होने के बावजूद अपने अहंकार और गलत निर्णयों के कारण विनाश की ओर बढ़ा। उसकी कथा यह संदेश देती है कि ज्ञान और शक्ति का उपयोग सही मार्ग पर ही होना चाहिए।

दशहरे का पर्व लोगों को अपने भीतर की बुराइयों को पहचानने, क्रोध और अहंकार पर नियंत्रण रखने तथा सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़ की अपील: विजयादशमी के अवसर पर आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करें। पर्व की खुशियां साझा करें और सत्य, सदाचार तथा सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लें।

स्रोत: रिपोर्ट एवं पंचांग आधारित जानकारी। स्थानीय पूजा के समय की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें।

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