डिजिटल सुशासन की नई उड़ान: सेवा सेतु से गांव-गांव पहुंचीं 564 ऑनलाइन सेवाएं, वनांचल तक दौड़ा डिजिटल नेटवर्क
राज्य में 1,273 नए मोबाइल टावर शुरू, सेवा सेतु पर 85 लाख से अधिक आवेदन; एआई मिशन, भारतनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रशासन को मिली नई रफ्तार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक अब केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि सुशासन और नागरिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनती जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद और चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने गुरुवार को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद सभागार में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग की उपलब्धियों और भावी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार डिजिटल नवाचारों के जरिए पारदर्शी, सरल और समयबद्ध प्रशासन उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि सेवा सेतु, भारतनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मोबाइल कनेक्टिविटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शासन की सेवाएं अब तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। विशेष रूप से वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार राज्य के डिजिटल समावेशन को नई दिशा दे रहा है।
सेवा सेतु बना सबसे बड़ा डिजिटल सेवा मंच
प्रेस वार्ता में बताया गया कि सेवा सेतु पोर्टल राज्य का सबसे बड़ा एकीकृत नागरिक सेवा मंच बन चुका है। 29 अप्रैल 2026 को इसके उन्नत संस्करण की शुरुआत की गई थी। वर्तमान में इस पोर्टल पर 35 विभागों की 564 सेवाएं उपलब्ध हैं।
पिछले ढाई वर्षों में पोर्टल पर 85 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 78 लाख से अधिक आवेदनों का सफल निराकरण किया गया। राशन कार्ड, विवाह पंजीयन, नल कनेक्शन सहित अनेक सेवाएं अब ग्रामीणों को ऑनलाइन उपलब्ध हो रही हैं। पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल दस्तावेज सत्यापन, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन, व्हाट्सएप एवं एसएमएस सूचना तथा ऑनलाइन भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
वनांचल तक पहुंचा मोबाइल नेटवर्क
विभागीय सचिव ने बताया कि डिजिटल भारत निधि (DBN) के तहत आकांक्षी जिलों, एलडब्ल्यूई फेज-2 और 4जी सैचुरेशन योजना के माध्यम से राज्य के दूरस्थ वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया गया है। जनवरी 2024 से अब तक 1,273 मोबाइल टावर शुरू किए जा चुके हैं।
साथ ही भारतनेट फेज-3 के तहत ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ने के लिए 3,928 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट और फाइबर-टू-द-होम (एफटीटीएच) सुविधा का विस्तार होगा।
युवाओं के लिए शुरू हुई सीएम आईटी फेलोशिप
राज्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सीएम आईटी फेलोशिप शुरू की गई है। अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) नया रायपुर के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम में 50 स्थानीय युवाओं को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण और विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यानुभव प्रदान किया जा रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ी प्रशासनिक दक्षता
विभाग ने बताया कि विभिन्न विभागों के लिए विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना रहे हैं।
- खनिज ऑनलाइन 2.0 के माध्यम से जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 30,311.80 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
- वन क्लिक-सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 में 19 विभागों की 151 सेवाओं का एकीकरण किया गया है।
- पारस पोर्टल से अधोसंरचना परियोजनाओं की ऑनलाइन निगरानी की जा रही है।
- बस्तर मुन्ने पोर्टल के माध्यम से नक्सल प्रभावित जिलों में हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की मॉनिटरिंग की जा रही है।
- डिजिटल द्वार के जरिए विभागों के बीच सुरक्षित डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
एआई मिशन और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार ने भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ एआई मिशन (CG-AIM) शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत युवाओं, विद्यार्थियों, स्टार्टअप और शासकीय अधिकारियों को एआई आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एआई डेटा लैब की स्थापना भी की जा रही है।
इसके अलावा भारत सरकार की संस्था एसटीपीआई के साथ 105.30 करोड़ रुपये की लागत से चार सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप स्थापित किए जाएंगे, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मेडटेक, स्मार्ट सिटी और स्मार्ट कृषि क्षेत्रों में नवाचार एवं स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा।
क्लाउड फर्स्ट नीति से मजबूत होगा डिजिटल तंत्र
राज्य सरकार क्लाउड फर्स्ट नीति लागू कर रही है, जिससे सुरक्षित क्लाउड सेवाओं, डेटा सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। विभाग की विभिन्न परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। इनमें आधार सेवाएं, जीआईएस परियोजना, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, ई-प्रगति पोर्टल, एकीकृत अपशिष्ट मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली तथा वन क्लिक-सिंगल विंडो सिस्टम प्रमुख हैं।
‘डिजिटल तकनीक बनेगी सुशासन का आधार’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सचिव अंकित आनंद ने कहा कि डिजिटल तकनीक केवल प्रशासन को आधुनिक बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक तक पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं पहुंचाने का प्रभावी साधन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एआई, डिजिटल कनेक्टिविटी और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।




