नारायणपुर

धर्मांतरण विवाद की आग में सुलगा भरण्डा, गांव बना छावनी

मुख्य आरोपी दंपती गिरफ्तार, फिर भी नहीं थमा बवाल; 26 परिवारों के बहिष्कार से बढ़ा तनाव

13 दौर की बातचीत भी बेअसर, रात साढ़े नौ बजे तक गतिरोध कायम; दोनों पक्षों में तेज बहस जारी

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। जिले के भरण्डा गांव में 9 जून से सुलग रहा धर्मांतरण विवाद अब गंभीर सामाजिक तनाव का रूप ले चुका है। मुख्य आरोपी दंपती की गिरफ्तारी के बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। गांव दो खेमों में बंट चुका है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। मंगलवार को दिनभर चली तनातनी के बाद देर रात तक भी समाधान नहीं निकल पाया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और बड़ी संख्या में पुलिस तथा सुरक्षा बल के जवान तैनात कर दिए गए हैं।

मंगलवार रात करीब साढ़े नौ बजे तक प्रशासन और पुलिस के तमाम प्रयास विफल रहे। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने दोनों पक्षों को अलग-अलग और संयुक्त रूप से करीब 13 बार बातचीत के लिए बुलाया तथा गांव में ही आपसी सहमति से विवाद समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन दोनों पक्ष अपनी-अपनी बातों पर अड़े रहे। देर रात तक दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। वरिष्ठ अधिकारी गांव में ही डटे रहे और अतिरिक्त बलों को भी सतर्क रखा गया।

9 जून की घटना से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार 9 जून को ग्राम भरण्डा में कथित धर्मांतरण गतिविधियों और जनजातीय देवी-देवताओं एवं परंपरागत मान्यताओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर विवाद की शुरुआत हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ा था, लेकिन आदिवासी समाज का आरोप था कि मुख्य आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से समाज में लगातार नाराजगी बढ़ती चली गई।

हजारों आदिवासियों का शक्ति प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

मामला तूल पकड़ने के बाद रविवार को बखरूपारा बाजार स्थल से हजारों आदिवासी ग्रामीणों, ग्राम सभा प्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने विशाल रैली निकाली। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी के कारण प्रदर्शन ने जनआंदोलन का स्वरूप धारण कर लिया।

प्रदर्शन के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि यह केवल भरण्डा गांव का नहीं, बल्कि पूरे बस्तर की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय आस्था, परंपराओं और पहचान से जुड़ा विषय है।

बढ़ते दबाव के बीच मुख्य आरोपी दंपती गिरफ्तार

लगातार बढ़ते जनदबाव के बीच मंगलवार को नारायणपुर पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि थाना भरण्डा में अपराध क्रमांक 07/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 और 3(5) के अंतर्गत धार्मिक भावनाओं को आहत करने एवं धार्मिक मान्यताओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने का मामला दर्ज किया गया था।

विवेचना के दौरान दो आरोपियों की संलिप्तता पाए जाने पर 22 जून को उन्हें गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में दीपक ठाकुर (43 वर्ष) एवं उनकी पत्नी भुनेश्वरी ठाकुर (37 वर्ष), निवासी ग्राम सोनाबल जिला कोंडागांव शामिल हैं। दोनों को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

गांव दो हिस्सों में बंटा, 26 परिवारों का बहिष्कार

मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी गांव का माहौल शांत नहीं हुआ। मंगलवार को आदिवासी ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लेते हुए धर्मान्तरित 26 परिवारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इन परिवारों को गांव से बाहर कर दिए जाने के बाद उन्हें मुक्तिधाम परिसर में अस्थायी शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।

इस घटनाक्रम के बाद भरण्डा गांव का माहौल पूरी तरह गरमा गया और गांव दो हिस्सों में बंटा नजर आने लगा। दोनों पक्षों के बीच कई बार तनाव और झड़प जैसी स्थिति भी सामने आई, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया।

धर्मान्तरित परिवार भी बने अड़िंग, धर्म छोड़ने से इंकार

स्थिति को और अधिक जटिल बनाते हुए धर्मान्तरित परिवार भी अपने फैसले पर अडिंग बने हुए हैं। आदिवासी ग्रामीणों द्वारा उन्हें अपने मूल धर्म में लौटने की अपील की गई, लेकिन संबंधित परिवारों ने इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया है।

धर्मान्तरित परिवारों का कहना है कि वे किसी भी दबाव में अपना वर्तमान धर्म नहीं छोड़ेंगे। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं, जिसके कारण गांव में गतिरोध लगातार बना हुआ है।

मंगलवार को दिनभर चला तनाव, फिर आमने-सामने आए दोनों पक्ष

मंगलवार सुबह से ही दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी रही। कई स्थानों पर तीखी नोकझोंक और झड़प जैसी परिस्थितियां भी निर्मित हुईं। हालात बिगड़ते देख प्रशासन और पुलिस ने गांव में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया। वरिष्ठ अधिकारी स्वयं गांव में पहुंचकर दोनों पक्षों से चर्चा करते रहे।

24 जून की विशेष ग्रामसभा पर टिकी निगाहें

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब 24 जून को आयोजित होने वाली विशेष ग्रामसभा पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। बताया जा रहा है कि ग्रामसभाओं में प्राथमिकता के आधार पर धर्मांतरण का मुद्दा उठाया जाएगा। भरण्डा गांव में धर्मान्तरित परिवारों को गांव से बेदखल करने संबंधी प्रस्ताव भी लाया जा सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित परिवार अपने मूल धर्म में वापसी करते हैं तो उन्हें गांव में रहने दिया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद ही सामने आएगा।

महिलाओं की बड़ी भागीदारी, आंदोलन बना जनआक्रोश

रविवार को हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल महिलाओं और युवाओं ने अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा का संकल्प दोहराया। हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी ने पूरे आंदोलन को जनआक्रोश का स्वरूप दे दिया।


क्या है पूरा मामला

● 9 जून को भरण्डा गांव में कथित धर्मांतरण को लेकर विवाद शुरू हुआ।

● धार्मिक भावनाओं को आहत करने और परंपराओं के अपमान का आरोप लगाया गया।

● कार्रवाई नहीं होने से आदिवासी समाज में आक्रोश बढ़ा।

● हजारों ग्रामीणों ने रैली निकालकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

● पुलिस ने मुख्य आरोपी दंपती को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा।

● 26 धर्मान्तरित परिवारों को गांव से बाहर कर दिए जाने के बाद वे मुक्तिधाम में शरण लेने को मजबूर हुए।

● धर्मान्तरित परिवार अपने धर्म पर कायम रहने की बात कह रहे हैं।

● प्रशासन और पुलिस ने 13 दौर की बातचीत कराई, लेकिन देर रात तक कोई सहमति नहीं बन सकी।

● पूरा गांव पुलिस और सुरक्षा बलों की निगरानी में है।


चार प्रमुख मांगें

◾ मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो।

◾ दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

◾ जनजातीय संस्कृति को प्रभावित करने वाली गतिविधियों की जांच की जाए।

◾ जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जाए।


भरण्डा से उठी चिंगारी, पूरे जिले में बढ़ी हलचल

मुख्य आरोपी दंपती की गिरफ्तारी, 26 परिवारों का बहिष्कार, दोनों पक्षों के बीच बढ़ता गतिरोध और देर रात तक जारी प्रशासनिक कवायद ने भरण्डा विवाद को जिले का सबसे संवेदनशील और चर्चित मुद्दा बना दिया है। फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती गांव में शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की है। ऐसे में 24 जून की विशेष ग्रामसभा और दोनों पक्षों के अगले कदम पर पूरे जिले की निगाहें टिक गई हैं।

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