बीज उपचार से भरेंगे धान के कोठार, कम लागत में बढ़ेगी उपज
धान बोने से पहले अपनाएं वैज्ञानिक तकनीक, बीज जनित रोगों से मिलेगी सुरक्षा

कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेक कुमार विश्वकर्मा की किसानों से अपील- स्वस्थ बीज और उपचार से मिलेगा बेहतर उत्पादन
नारायणपुर। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही जिले में धान की बुवाई की तैयारियां तेज हो गई हैं। ऐसे समय में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को एक ऐसी तकनीक अपनाने की सलाह दी है, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र (आईजीकेवी), नारायणपुर के पादप रोग विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विवेक कुमार विश्वकर्मा ने किसानों से धान की बुवाई से पहले बीज उपचार को अनिवार्य रूप से अपनाने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि बीज उपचार फसल उत्पादन की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे बीज जनित एवं मृदा जनित रोगों से प्रारंभिक अवस्था में ही सुरक्षा मिलती है, जिससे पौधों का विकास बेहतर होता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।
बिना उपचारित बीज से बढ़ता है रोगों का खतरा
डॉ. विश्वकर्मा ने बताया कि बिना उपचारित बीजों में रोग और कीटों का प्रकोप अधिक होता है, जिससे अंकुरण प्रभावित होता है और फसल की वृद्धि पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसके विपरीत बीज उपचार करने से अंकुरण क्षमता बढ़ती है, पौधे स्वस्थ एवं मजबूत बनते हैं तथा फसल में प्रारंभिक रोगों का प्रभाव कम हो जाता है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधानों में भी यह सिद्ध हो चुका है कि बीज उपचार अपनाने से धान की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होती है तथा रोग नियंत्रण पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम हो जाता है।
धान उत्पादक किसानों के लिए वरदान साबित हो रही तकनीक
कृषि वैज्ञानिक के अनुसार बीज उपचार से किसानों को कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। इससे बीज जनित एवं मृदा जनित रोगों से सुरक्षा मिलती है, अंकुरण प्रतिशत में वृद्धि होती है, पौधों की प्रारंभिक अवस्था मजबूत होती है और रोग व कीट नियंत्रण पर होने वाला खर्च कम हो जाता है। परिणामस्वरूप किसानों को स्वस्थ और अधिक उत्पादन वाली फसल प्राप्त होती है।
ऐसे करें धान के बीज का उपचार
धान की बुवाई से पूर्व किसान सबसे पहले स्वस्थ एवं प्रमाणित बीज का चयन करें। इसके बाद बीज को साफ कर छाया में सुखाएं। अनुशंसित मात्रा में फफूंदनाशी दवा से बीज उपचार करें। जैविक खेती अपनाने वाले किसान ट्राइकोडर्मा जैसे जैव एजेंट का उपयोग भी कर सकते हैं। उपचारित बीज को छाया में सुखाकर शीघ्र बुवाई करना अधिक लाभकारी होता है।
कम लागत, अधिक लाभ का सूत्र
डॉ. विवेक कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसाओं के अनुसार बीज उपचार अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं तथा रोग प्रबंधन में सफलता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि धान की खेती में बीज उपचार को नियमित रूप से अपनाएं, ताकि स्वस्थ फसल के साथ बेहतर आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सके।
◼️ काम की बात
बीज उपचार से किसानों को होंगे ये पांच बड़े फायदे
✔ बीज जनित एवं मृदा जनित रोगों से सुरक्षा
✔ अंकुरण प्रतिशत में वृद्धि
✔ पौधों की प्रारंभिक अवस्था मजबूत
✔ कीटनाशक एवं रोग नियंत्रण पर खर्च में कमी
✔ अधिक उत्पादन और बेहतर आर्थिक लाभ
◼️ जानिए, बीज उपचार की आसान विधि
- प्रमाणित एवं स्वस्थ बीज का चयन करें।
- बीज को साफ कर छाया में सुखाएं।
- अनुशंसित मात्रा में फफूंदनाशी दवा से उपचार करें।
- जैविक विकल्प के रूप में ट्राइकोडर्मा का उपयोग करें।
- उपचारित बीज को छाया में सुखाकर तुरंत बुवाई करें।
“बुवाई से पहले बीज का सुरक्षा कवच जरूरी”
कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेक कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि बीज उपचार धान उत्पादन की मजबूत नींव है। किसान यदि बुवाई से पहले वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं तो कम लागत में अधिक उपज के साथ रोगों से भी फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है।




