अवैध धर्मांतरण के आरोपों पर फूटा आदिवासी समाज का गुस्सा, हजारों ग्रामीणों ने किया शक्ति प्रदर्शन
ग्राम भरण्डा के मामले में कार्रवाई नहीं होने से आक्रोश, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

‘आस्था, संस्कृति और ग्राम सभा के अधिकारों से समझौता नहीं’, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग
नारायणपुर। ग्राम भरण्डा में कथित धर्मांतरण गतिविधियों एवं जनजातीय आस्था और परंपराओं के अपमान के आरोपों को लेकर शनिवार को आदिवासी समाज का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। बखरूपारा स्थित बाजार स्थल में हजारों की संख्या में ग्रामीण, पंचायत प्रतिनिधि एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य जुटे और विशाल विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने आंदोलन को जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया।

प्रदर्शन के बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 9 जून 2026 को ग्राम भरण्डा में कुछ व्यक्तियों द्वारा कथित रूप से धर्मांतरण के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करने, स्थानीय देवी-देवताओं एवं पारंपरिक जनजातीय मान्यताओं के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां करने तथा विभिन्न माध्यमों से ग्रामीणों को प्रभावित करने के प्रयास किए गए। इस संबंध में संबंधित थाने में लिखित शिकायत भी प्रस्तुत की गई थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से समाज में असंतोष और नाराजगी बढ़ती गई।
प्रदर्शन के दौरान जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि यदि प्रदेश में धर्म स्वतंत्रता से संबंधित कानून प्रभावी है तो फिर शिकायत के बाद भी मामले में अब तक निष्पक्ष जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि जांच चल रही है तो उसकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह केवल ग्राम भरण्डा का मामला नहीं है, बल्कि पूरे बस्तर की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय आस्था, परंपरा और पहचान से जुड़ा विषय है। जनजातीय समाज अपनी संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस विषय पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगा।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। बाजार पारा में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ने से पूरे क्षेत्र में आंदोलन का माहौल बना रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और पुलिस व सुरक्षा बलों के जवान तैनात रहे।
चार प्रमुख मांगें
- ग्राम भरण्डा प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।
- आरोप सत्य पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- जिले में संचालित ऐसी सभी गतिविधियों की जांच कर कार्रवाई की जाए, जो जनजातीय संस्कृति और सामाजिक समरसता को प्रभावित करती हों।
- अब तक की गई जांच एवं कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जाए।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा और व्यापक
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मामले में शीघ्र एवं निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो जनजातीय समाज लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर अपने आंदोलन को और व्यापक करेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि आस्था, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के मुद्दे पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भरण्डा से उठी चिंगारी, बाजार स्थल में उमड़ा जनसैलाब
ग्राम भरण्डा से जुड़े विवाद के विरोध में बखरूपारा बाजार स्थल में हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी रही। महिलाओं की बड़ी भागीदारी के साथ आंदोलन ने जनआक्रोश का रूप ले लिया। पूरे प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी रही तथा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
— कैलाश सोनी, नारायणपुर




