मशरूम से निकला रोजगार का नया स्वाद, कृषि छात्रों ने बनाई ‘चटनी क्रांति’
वैल्यू एडिशन से बढ़ाई उत्पाद की कीमत, मिल्की मशरूम से तैयार पौष्टिक चटनी बनी आकर्षण का केंद्र

मॉड्यूल प्रोग्राम के तहत छात्रों ने सीखा प्रसंस्करण, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर तलाशने की पहल
नारायणपुर। कभी केवल सब्जी के रूप में इस्तेमाल होने वाला मशरूम अब रोजगार और नवाचार का नया माध्यम बनकर उभर रहा है। स्थानीय कृषि महाविद्यालय के छात्रों ने मॉड्यूल प्रोग्राम के तहत मशरूम से मूल्य वर्धित उत्पाद तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए मशरूम चटनी बनाने की तकनीक सीखी। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आय बढ़ाने के नए अवसरों की संभावनाएं भी तलाशीं।
महाविद्यालय के छात्रों ने वैल्यू एडिशन की अवधारणा को अपनाते हुए मिल्की मशरूम से तैयार चटनी बनाने की विधि का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने बताया कि यह केवल अतिरिक्त आय का साधन ही नहीं, बल्कि लोगों की थाली में नया स्वाद और बेहतर पोषण भी जोड़ता है। प्रोटीन, विटामिन और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर मशरूम चटनी स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी मानी जा रही है।
छत्तीसगढ़ के जायके में जुड़ रहा नया स्वाद
छत्तीसगढ़ में विभिन्न प्रकार की चटनियां पारंपरिक रूप से लोकप्रिय रही हैं। ऐसे में मशरूम से बनी चटनी लोगों के बीच उत्सुकता का विषय बन रही है। चिल्ला, रोटी और अन्य पारंपरिक व्यंजनों के साथ इसका उपयोग सीमित संसाधनों में तैयार होने वाले सस्ते और पौष्टिक विकल्प के रूप में किया जा सकता है। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम के दौरान न केवल उत्पाद निर्माण की जानकारी दी, बल्कि यह भी बताया कि मूल्य वर्धन और उत्पाद के सही उपयोग से बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
इन विद्यार्थियों ने निभाई अहम भूमिका
मशरूम से मूल्य वर्धित उत्पाद तैयार करने की इस गतिविधि में महाविद्यालय की छात्रा अंकिता कांगे तथा छात्र अमितेश नाग, चिरंजीव जैन, धनीराम मौर्य, चिराग यादव और दिलीप मंडावी ने सक्रिय भूमिका निभाई।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन
यह गतिविधि कृषि महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. रत्ना नशीन के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन एवं तकनीकी निर्देशन सहायक प्राध्यापक डॉ. नवीन मरकाम, डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. मदनलाल कुर्रे, डॉ. गौतम भास्कर, डॉ. विवेक विश्वकर्मा (पाठ्यक्रम शिक्षक) तथा डॉ. पुष्पराज दीवान के निर्देशन में संपन्न हुआ।
‘मशरूम चटनी’ बन सकती है गांवों में स्वरोजगार का नया मॉडल
कम लागत, आसान तकनीक और पौष्टिक गुणों से भरपूर मशरूम चटनी ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का नया विकल्प बनकर सामने आ रही है। कृषि महाविद्यालय की यह पहल स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन के जरिए किसानों और युवाओं की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




