छत्तीसगढ़

अबूझमाड़ का ‘छिपा स्वर्ग’ बनेगा नई पहचान: मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर से देखा हांदावाड़ा वॉटरफॉल

सुशासन तिहार के दौरान आसमान से किया निरीक्षण, बोले— पर्यटन मानचित्र पर लाना है इस प्राकृतिक धरोहर को

नक्सलवाद की छाया हटने के बाद बस्तर में पर्यटन विकास की नई उम्मीद, अबूझमाड़ के जलप्रपात पर सरकार की नजर

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। वर्षों तक नक्सलवाद और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण देश-दुनिया की नजरों से लगभग ओझल रहा अबूझमाड़ अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता के दम पर नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। सुशासन तिहार के तहत नारायणपुर, कोंडागांव और बीजापुर जिले के दौरे पर निकले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने प्रशासनिक अमले के साथ हेलीकॉप्टर से नारायणपुर जिले के प्रसिद्ध हांदावाड़ा वॉटरफॉल का हवाई निरीक्षण किया। आसमान से दिखाई पड़ रही इस अद्भुत प्राकृतिक धरोहर को देखकर मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विकसित करने की आवश्यकता जताई।

हेलीकॉप्टर से निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ जलप्रपात और उसके आसपास के प्राकृतिक वातावरण का अवलोकन किया। बताया जाता है कि उन्होंने इस स्थल की सुंदरता की सराहना करते हुए कहा कि नारायणपुर जिले में स्थित यह वॉटरफॉल अत्यंत आकर्षक और संभावनाओं से भरपूर है तथा इसे पर्यटन के क्षेत्र में विशेष रूप से विकसित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री की इस पहल को बस्तर में पर्यटन के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

हांदावाड़ा वॉटरफॉल अबूझमाड़ के घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित है। बरसात और उसके बाद के महीनों में यह जलप्रपात अपने पूरे वैभव के साथ दिखाई देता है। लंबे समय तक सुरक्षा कारणों और दुर्गम पहुंच मार्गों के चलते यहां आम पर्यटकों की पहुंच सीमित रही। लेकिन अब क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात और विकास कार्यों के विस्तार के साथ यह इलाका पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।

बदलते बस्तर की नई तस्वीर

एक समय था जब अबूझमाड़ का नाम सुनते ही लोगों के मन में नक्सल प्रभावित क्षेत्र की छवि उभरती थी। वर्षों तक यह इलाका सुरक्षा चुनौतियों और विकास से दूरी के कारण चर्चा में रहा। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। सड़कों का विस्तार, संचार सुविधाओं में सुधार, प्रशासन की बढ़ती पहुंच और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद अबूझमाड़ धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ रहा है।

मुख्यमंत्री का हांदावाड़ा वॉटरफॉल का निरीक्षण केवल एक पर्यटन स्थल का दौरा भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सरकार की उस सोच का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें बस्तर की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहरों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है। यदि इस जलप्रपात को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है तो यह न केवल प्रदेश बल्कि देशभर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि हांदावाड़ा वॉटरफॉल जैसे स्थलों के विकास से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। होटल, होम-स्टे, गाइड सेवा, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के विपणन जैसे क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे आदिवासी समुदायों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।

अबूझमाड़ अपनी जैव विविधता, घने जंगलों, पहाड़ी श्रृंखलाओं, पारंपरिक आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है। यदि इन विशेषताओं को पर्यटन से जोड़ा जाता है तो यह क्षेत्र इको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म के लिए भी बड़ी संभावनाएं प्रस्तुत कर सकता है।

सरकार की प्राथमिकता में पर्यटन

छत्तीसगढ़ सरकार लगातार प्रदेश के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही है। चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान और दंतेश्वरी धाम जैसे स्थलों के बाद अब अबूझमाड़ के प्राकृतिक आकर्षण भी नीति निर्माताओं के फोकस में आते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं हेलीकॉप्टर से निरीक्षण किए जाने को प्रशासनिक स्तर पर गंभीर पहल माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों का भी मानना है कि यदि हांदावाड़ा वॉटरफॉल तक बेहतर सड़क, सुरक्षा, पेयजल, विश्राम स्थल और पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाती हैं तो यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में बस्तर का नया पर्यटन केंद्र बन सकता है।

नई उम्मीदों का प्रतीक बना हांदावाड़ा

सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री का यह हवाई निरीक्षण कई संदेश छोड़ गया। एक ओर यह प्रशासन की पहुंच को दर्शाता है तो दूसरी ओर यह संकेत भी देता है कि अबूझमाड़ को केवल सुरक्षा चुनौतियों के नजरिए से नहीं, बल्कि विकास और संभावनाओं के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हांदावाड़ा वॉटरफॉल अब उस बदलते बस्तर का प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है, जहां बंदूक की आवाज की जगह विकास, पर्यटन और नई उम्मीदों की चर्चा हो रही है।

यदि सरकार की मंशा के अनुरूप इस क्षेत्र का विकास होता है तो आने वाले समय में हांदावाड़ा वॉटरफॉल न केवल नारायणपुर जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान का नया चेहरा बन सकता है। बस्तर के जंगलों के बीच छिपा यह प्राकृतिक चमत्कार अब दुनिया की नजरों में आने को तैयार दिखाई दे रहा है।

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़

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