KCC और धान पावती बनी किसानों की राहत, अब डब्बे में मिलेगा 20 लीटर डीजल
पेट्रोल-डीजल संकट के बीच प्रशासन और पेट्रोल पंप संचालकों की नई व्यवस्था, खेती-किसानी के काम फिर हुए सुचारु

(कैलाश सोनी ) नारायणपुर। जिले में पिछले कई दिनों से चल रही पेट्रोल और डीजल की किल्लत के बीच किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। खेती-किसानी के महत्वपूर्ण समय में डीजल नहीं मिलने से परेशान किसानों की समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन और पेट्रोल पंप संचालकों ने नई व्यवस्था लागू की है। अब किसान अपना किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या धान विक्रय की पावती दिखाकर डब्बे में 20 लीटर तक डीजल प्राप्त कर सकेंगे। इस व्यवस्था से जिले के हजारों किसानों को बड़ी राहत मिली है और खेतों में प्रभावित हो रहे कृषि कार्य फिर से पटरी पर लौटने लगे हैं।


दरअसल, नारायणपुर जिले में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण आम लोगों के साथ-साथ किसान भी परेशान थे। कई पेट्रोल पंपों में ईंधन सीमित मात्रा में उपलब्ध हो रहा था। हालात ऐसे बन गए थे कि सुबह से ही पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें लगने लगी थीं। स्थिति का फायदा उठाकर कुछ बिचौलिए और कालाबाजारी करने वाले लोग डब्बों में पेट्रोल-डीजल खरीदकर अधिक कीमत पर बेचने लगे थे। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए सभी पेट्रोल पंपों को डब्बों में पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिए थे।
प्रशासन का उद्देश्य ईंधन की कालाबाजारी पर रोक लगाना और सीमित उपलब्धता के बीच आम उपभोक्ताओं तक पेट्रोल-डीजल पहुंच सुनिश्चित करना था। हालांकि प्रशासन के इस फैसले का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ा। खेती के मौसम में किसानों को ट्रैक्टर, पंप सेट, थ्रेसर और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन के लिए लगातार डीजल की जरूरत पड़ती है। गांवों और खेतों में काम के दौरान कई बार ट्रैक्टर या पंप सेट में डीजल खत्म हो जाता है, ऐसे में किसान डब्बों में डीजल लेकर खेत तक पहुंचाते हैं। लेकिन प्रतिबंध लागू होने के बाद किसानों को डब्बों में डीजल नहीं मिल पा रहा था, जिससे खेतों में जोताई, सिंचाई और अन्य जरूरी कृषि कार्य प्रभावित होने लगे थे।
ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें आने लगी थीं कि डीजल नहीं मिलने के कारण खेती के काम बाधित हो रहे हैं। कई किसानों ने बताया कि उन्हें खेत छोड़कर बार-बार पेट्रोल पंप तक आना पड़ रहा था, लेकिन डब्बे में डीजल नहीं मिलने से भारी परेशानी हो रही थी। खेती के इस महत्वपूर्ण समय में डीजल संकट किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया था। बारिश पूर्व खेतों की तैयारी, सिंचाई और मशीनों के संचालन के लिए डीजल की उपलब्धता बेहद जरूरी मानी जा रही है।
इसी बीच किसानों की समस्याओं को देखते हुए नारायणपुर के राधेश्याम पेट्रोल पंप प्रबंधन ने राहत देने वाली नई व्यवस्था शुरू की है। अब किसान यदि अपना किसान क्रेडिट कार्ड या धान विक्रय की पावती दिखाते हैं, तो उन्हें डब्बे में 20 लीटर तक डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक किसानों को राहत पहुंचाना और खेती-किसानी के कार्यों को प्रभावित होने से बचाना है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली है। किसानों का कहना है कि प्रशासन और पेट्रोल पंप प्रबंधन के इस फैसले से अब उन्हें खेती के काम में दिक्कत नहीं हो रही है। समय पर डीजल मिलने से ट्रैक्टर और पंप सेट का संचालन फिर से सामान्य हो गया है। कई किसानों ने बताया कि पहले डीजल नहीं मिलने के कारण खेतों का काम प्रभावित हो रहा था, लेकिन अब स्थिति में सुधार आया है।
ग्रामीण किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा कालाबाजारी रोकने के लिए उठाया गया कदम जरूरी था, लेकिन इससे वास्तविक किसानों को परेशानी हो रही थी। अब KCC और धान पावती के आधार पर डीजल उपलब्ध कराने से वास्तविक किसानों और बिचौलियों के बीच अंतर करना आसान हो गया है। इससे जरूरतमंद किसानों को राहत मिल रही है, वहीं डीजल की अवैध बिक्री पर भी काफी हद तक नियंत्रण लग सकेगा।
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह किसानों की सुविधा को ध्यान में रखकर लागू की गई है। केवल वही किसान डीजल प्राप्त कर सकेंगे, जो अपना किसान क्रेडिट कार्ड या धान विक्रय की पावती प्रस्तुत करेंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि डीजल वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक पहुंचे और कोई भी व्यक्ति इसका गलत फायदा न उठा सके।
जानकारों का मानना है कि वर्तमान समय में कृषि कार्य पूरी तरह मशीनों पर निर्भर हो चुके हैं। ट्रैक्टर, पानी के पंप और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन के लिए डीजल अनिवार्य हो गया है। ऐसे में यदि किसानों को समय पर ईंधन उपलब्ध नहीं हो, तो खेती का पूरा चक्र प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि किसानों के लिए अलग व्यवस्था बनाना जरूरी हो गया था।
जिले में पेट्रोल-डीजल की किल्लत को लेकर प्रशासन भी लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि ईंधन की आपूर्ति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही कालाबाजारी और अवैध भंडारण करने वालों पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का मानना है कि यदि पेट्रोल पंपों पर व्यवस्थित तरीके से वितरण किया जाए और वास्तविक जरूरतमंदों को प्राथमिकता दी जाए, तो संकट की स्थिति में भी लोगों को राहत दी जा सकती है।
इधर किसानों के बीच नई व्यवस्था को लेकर सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है। कई किसानों ने इसे प्रशासन और पेट्रोल पंप प्रबंधन की संवेदनशील पहल बताया है। किसानों का कहना है कि खेती के समय में डीजल उपलब्ध होना सबसे बड़ी जरूरत होती है और अब 20 लीटर तक डीजल मिलने से खेतों के जरूरी काम आसानी से पूरे हो सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था अन्य जिलों में भी लागू की जा सकती है, जहां पेट्रोल-डीजल की कमी और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। KCC और धान पावती जैसे दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक किसानों की पहचान करना आसान होता है और इससे ईंधन वितरण में पारदर्शिता भी बनी रहती है।
फिलहाल नारायणपुर जिले में लागू की गई यह व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। एक ओर जहां खेती-किसानी के कार्य फिर से गति पकड़ने लगे हैं, वहीं दूसरी ओर डीजल की कालाबाजारी पर भी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासन और पेट्रोल पंप संचालकों की इस पहल को जिले में किसानों के हित में उठाया गया सकारात्मक और व्यावहारिक कदम माना जा रहा है।




