‘सुशासन एक्सप्रेस’ से अबूझमाड़ तक पहुंचीं सरकारी सेवाएं
दूरस्थ गांवों में लग रहे शिविर, 22 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त — हजारों हितग्राहियों को मौके पर मिला लाभ

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। जिला प्रशासन नारायणपुर की अभिनव पहल ‘सुशासन एक्सप्रेस’ दूरस्थ, संवेदनशील और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में शासन की योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। वर्षों से बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक पहुंच से वंचित इन इलाकों में अब शासन स्वयं गांवों तक पहुंचकर सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। इस पहल ने न केवल ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान को सरल बनाया है, बल्कि प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास की नई कड़ी भी स्थापित की है।

प्रशासन द्वारा संचालित इस अभियान के तहत नियमित रूप से दूरस्थ ग्राम पंचायतों और आश्रित बस्तियों में शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में ग्रामीणों को उनके गांव के समीप ही विभिन्न शासकीय सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें जिला मुख्यालय या अन्य कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं।

इसी क्रम में शनिवार को ग्राम पंचायत गोमे में सुशासन एक्सप्रेस शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें आश्रित ग्राम मुतेनतोड़ा एवं डोमांज के ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और विभिन्न योजनाओं के तहत आवेदन प्रस्तुत किए। ग्रामीणों के चेहरों पर सेवाओं की सहज उपलब्धता को लेकर संतोष और राहत साफ दिखाई दी।
शिविर में आधार पंजीयन एवं अपडेट, आधार एमबीयू, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाता खोलना, पेंशन, जाति, निवास एवं आय प्रमाण पत्र, श्रम कार्ड, वोटर आईडी और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए आवेदन लिए गए। साथ ही कई मामलों में मौके पर ही निराकरण कर लाभ भी प्रदान किया गया।

जिला कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने बताया कि सुशासन एक्सप्रेस का उद्देश्य प्रशासनिक सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि “यह अभियान उन ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जो भौगोलिक कठिनाइयों और संसाधनों की कमी के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते थे। अब उन्हें उनके गांव के पास ही सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।”
उन्होंने आगे बताया कि शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहकर न केवल आवेदन स्वीकार करते हैं, बल्कि योजनाओं की जानकारी भी ग्रामीणों को देते हैं। पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी तत्काल शुरू की जाती है, जिससे लाभ में देरी न हो।
अभियान के अब तक के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी बयां कर रहे हैं। अब तक कुल 22,197 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 16,622 आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। विभिन्न सेवाओं के अंतर्गत आधार अपडेट और एमबीयू के 10,682, आयुष्मान कार्ड के 4,011, आधार कार्ड के 2,126, स्वास्थ्य सेवाओं के 1,037, बैंक खातों के 715, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के 713, राशन कार्ड के 562, पेंशन के 172, जाति प्रमाण पत्र के 180, मनरेगा जॉब कार्ड के 243 और श्रम कार्ड के 306 प्रकरणों में लाभ प्रदान किया गया है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सुशासन एक्सप्रेस न केवल कागजी अभियान है, बल्कि जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव ला रही है। खास बात यह है कि अधिकांश सेवाएं मौके पर ही उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे ग्रामीणों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे।
इस पहल से ग्रामीणों के समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की उल्लेखनीय बचत हो रही है। पहले जहां एक प्रमाण पत्र या कार्ड बनवाने के लिए कई बार जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता था, वहीं अब ये सभी सेवाएं गांव के पास ही मिल रही हैं। इससे खासकर गरीब और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
सुशासन एक्सप्रेस अभियान में विशेष रूप से महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और दूरस्थ क्षेत्रों के परिवारों को प्राथमिकता दी जा रही है। शिविरों में इन वर्गों के लिए अलग से व्यवस्था की जा रही है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन का यह संवेदनशील दृष्टिकोण ग्रामीणों के बीच सकारात्मक संदेश दे रहा है।
अभियान की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि इससे प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद का दायरा भी बढ़ा है। शिविरों के माध्यम से अधिकारी सीधे ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं और मौके पर समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे शासन के प्रति विश्वास मजबूत हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के अभियान नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में विकास की गति को तेज करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब प्रशासन स्वयं गांवों तक पहुंचता है, तो लोगों में सुरक्षा और भरोसे की भावना विकसित होती है, जो समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
सुशासन एक्सप्रेस केवल सेवा वितरण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उठाया गया कदम है। इसके माध्यम से शासन यह संदेश दे रहा है कि कोई भी क्षेत्र या व्यक्ति विकास की धारा से अलग नहीं रहेगा।
जिला प्रशासन की इस पहल को ग्रामीणों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। शिविरों में पहुंच रहे ग्रामीणों ने इसे बेहद उपयोगी बताते हुए कहा कि अब उन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है। इससे उनका समय बच रहा है और काम भी तेजी से हो रहा है।
आने वाले समय में प्रशासन इस अभियान को और व्यापक रूप देने की योजना बना रहा है, ताकि अधिक से अधिक गांवों और बस्तियों को इससे जोड़ा जा सके। यदि यह अभियान इसी गति से आगे बढ़ता रहा, तो निश्चित ही नारायणपुर जिले के दूरस्थ अंचलों में विकास की नई तस्वीर देखने को मिलेगी।




