नारायणपुर

अबूझमाड़ के नेलांगुर में बदली तस्वीर: सदियों पुराने ‘झरन कुएं’ से नल-जल तक का सफर

आजादी के 79 वर्ष बाद पहुंची विकास की धारा, नक्सल छाया से निकले गांव में हर घर तक पानी महिलाओं को मिली राहत, जल जीवन मिशन से 65 किमी दूर बसे गांव में आई नई सुबह

(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 12 अप्रैल 2026।छत्तीसगढ़ के सुदूर और कभी देश के सबसे दुर्गम व अतिसंवेदनशील इलाकों में गिने जाने वाले अबूझमाड़ का नेलांगुर गांव आज एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बन रहा है। महाराष्ट्र सीमा से सटे इस गांव में कभी जीवन का आधार एक छोटा-सा प्राकृतिक ‘झरन कुआं’ हुआ करता था, जहां से ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने के लिए घंटों संघर्ष करते थे। लेकिन आज वही गांव ‘हर घर नल-जल’ योजना के तहत विकास की नई धारा में बहता नजर आ रहा है।

यह बदलाव केवल पानी की सुविधा का नहीं, बल्कि दशकों से उपेक्षित एक क्षेत्र के मुख्यधारा में लौटने की कहानी है।


झरन कुएं पर टिका था जीवन

नेलांगुर गांव के बीचों-बीच स्थित एक प्राकृतिक जलस्रोत, जिसे स्थानीय लोग ‘झरन कुआं’ कहते हैं, वर्षों तक यहां के ग्रामीणों के जीवन का आधार रहा। यह झरन कुआं एक छोटे कुएं के रूप में विकसित किया गया था, जिसके चारों ओर ग्रामीणों ने पत्थरों की संरचना बनाकर उसे सुरक्षित रखा था। लगभग 5 से 6 फीट गहरे इस कुएं में दिनभर धीरे-धीरे पानी रिसकर जमा होता था।

गांव के लोग बारी-बारी से इस कुएं से पानी निकालते थे। कई बार तो घंटों इंतजार करना पड़ता था कि पानी फिर से भर सके। महिलाओं और बच्चों को सुबह-सुबह ही पानी के लिए कतार में लगना पड़ता था। पाइप लगाकर इस पानी को गांव तक ले जाने की कोशिशें भी की जाती थीं, लेकिन वह भी सीमित और अस्थायी समाधान था।


नक्सलवाद की छाया में ठहर गया विकास

नेलांगुर और आसपास का पूरा अबूझमाड़ क्षेत्र लंबे समय तक नक्सलवाद की काली छाया में घिरा रहा। चार दशकों तक यहां भय और असुरक्षा का माहौल रहा, जिसके चलते शासन-प्रशासन की पहुंच लगभग न के बराबर थी। सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं यहां के लोगों के लिए किसी सपने से कम नहीं थीं।

ग्रामीण मजबूरी में पारंपरिक संसाधनों पर निर्भर रहे। झरन कुएं से पानी लाना, जंगलों से लकड़ी और अन्य संसाधन जुटाना—यही उनकी दिनचर्या बन चुकी थी। विकास योजनाएं कागजों में तो बनती रहीं, लेकिन जमीन पर उनका असर नहीं दिखता था।


अब बदली तस्वीर, पहुंचा नल-जल

समय ने करवट ली और अबूझमाड़ में शांति की स्थापना के साथ विकास के द्वार खुलने लगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासनिक पहुंच मजबूत हुई और योजनाओं का क्रियान्वयन तेज हुआ।

इसी क्रम में जल जीवन मिशन के तहत नेलांगुर गांव में जल आपूर्ति योजना शुरू की गई। कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में इस दूरस्थ गांव तक सोलर पंप आधारित जल प्रणाली स्थापित की गई।

अब पानी सोलर पंप के जरिए पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे न केवल पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, बल्कि बिजली पर निर्भरता भी कम हुई है।


महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव

इस योजना का सबसे अधिक लाभ गांव की महिलाओं को मिला है। पहले जहां उन्हें प्रतिदिन कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता था, वहीं अब घर के आंगन में ही नल से पानी मिलने लगा है।

ग्रामीण महिलाएं बताती हैं कि अब उनका समय बचता है, जिसे वे बच्चों की देखभाल और अन्य घरेलू कार्यों में लगा पा रही हैं। साथ ही, शारीरिक श्रम में भी कमी आई है, जिससे स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ा है।


स्वच्छता और स्वास्थ्य में सुधार

पानी की सहज उपलब्धता का असर केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गांव में स्वच्छता और स्वास्थ्य स्तर में भी सुधार हुआ है। अब लोग नियमित रूप से साफ पानी का उपयोग कर पा रहे हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा कम हुआ है।

बच्चों में भी स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है और स्कूलों में उपस्थिति में सुधार देखा जा रहा है।


65 किमी दूर, लेकिन अब नहीं दूर

जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित नेलांगुर गांव तक पहुंचना कभी बेहद कठिन था। घने जंगल, कच्चे रास्ते और सुरक्षा की चुनौतियां इस दूरी को और बढ़ा देती थीं।

लेकिन अब प्रशासनिक प्रयासों से न केवल सड़क और संचार व्यवस्था में सुधार हुआ है, बल्कि योजनाओं का लाभ भी सीधे ग्रामीणों तक पहुंचने लगा है। यह इस बात का प्रमाण है कि इच्छाशक्ति और सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो कोई भी क्षेत्र विकास से अछूता नहीं रह सकता।


सरकार की पहल बनी उम्मीद की किरण

नेलांगुर में जल जीवन मिशन का सफल क्रियान्वयन केवल एक योजना का लागू होना नहीं, बल्कि शासन की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि सरकार अब दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दे रही है।

प्रशासन द्वारा इस व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि हर घर तक नियमित और स्वच्छ जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।


विश्वास और विकास की नई नींव

नेलांगुर का यह परिवर्तन केवल भौतिक विकास नहीं, बल्कि विश्वास की पुनर्स्थापना भी है। वर्षों तक उपेक्षित रहे इस क्षेत्र में अब लोगों का भरोसा शासन और प्रशासन पर बढ़ा है।

ग्रामीण अब खुद को देश की मुख्यधारा से जुड़ा महसूस कर रहे हैं। बच्चों के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद जगी है और गांव में समग्र विकास की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।


तस्वीरों में दिखती दो दुनिया

एक ओर वे पुरानी तस्वीरें हैं, जहां लोग झरन कुएं के पास पानी के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं—किसी के हाथ में बाल्टी, कोई गहराई में उतरकर पानी भर रहा है। वहीं दूसरी ओर आज की तस्वीरें हैं, जहां नल से बहता पानी, घर के आंगन में रखे बर्तन और सोलर पंप की व्यवस्था एक नई कहानी कहती है।

यह बदलाव समय और विकास के बीच उस फैसले को दर्शाता है, जहां आखिरकार विकास ने अपनी जगह बना ली।


अबूझमाड़ की बदलती पहचान

नेलांगुर की यह कहानी अबूझमाड़ की बदलती पहचान का प्रतीक है। जहां कभी विकास की पहुंच असंभव लगती थी, वहां आज योजनाएं जमीन पर उतर रही हैं।

यह बदलाव केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद विकास संभव है।

अबूझमाड़, जो कभी रहस्य और भय का प्रतीक था, अब धीरे-धीरे विश्वास, विकास और नई उम्मीदों की पहचान बनता जा रहा है।

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़ पक्ष पर विपक्ष पर हर एक पक्ष पर निष्पक्ष बेबाक एवं धारदार पत्रकारिता के लिए संकल्पित है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page