17.59 करोड़ की सौगात से बदलेगा नारायणपुर का नक्शा
नालंदा परिसर, नेशनल हाईवे सहित 11 बड़े कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन

वन मंत्री बोले—अबूझमाड़ के बच्चों को मिलेगा आधुनिक शिक्षा का मंच, विकास को मिली नई रफ्तार
(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 4 अप्रैल। बस्तर अंचल के दूरस्थ और लंबे समय तक उपेक्षित रहे नारायणपुर जिले में विकास की रफ्तार अब तेज होती नजर आ रही है। आज जिले के एकदिवसीय प्रवास पर पहुंचे प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने 17 करोड़ 59 लाख रुपये से अधिक लागत के 11 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन कर जिले को बड़ी सौगात दी। इस मौके पर नालंदा परिसर (सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन) और नेशनल हाईवे 130डी के मजबूतीकरण जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी मिली, जिससे शिक्षा और बुनियादी ढांचे दोनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों में विकास कार्यों को लेकर खास उत्साह देखा गया। मंच से जब एक-एक कर परियोजनाओं की घोषणा और शिलान्यास हुआ, तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा।
नालंदा परिसर बनेगा शिक्षा का नया केंद्र
कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में नालंदा परिसर को देखा जा रहा है। यह सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन नारायणपुर के युवाओं के लिए एक आधुनिक अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को शांत और संसाधनयुक्त वातावरण मिलेगा।
वन मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अबूझमाड़ और आसपास के दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को अब बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। उन्हें अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि “यह परिसर सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को साकार करने का माध्यम बनेगा। यहां से निकलकर बच्चे इंजीनियर, डॉक्टर और प्रशासनिक सेवाओं में अपनी पहचान बनाएंगे।”
स्थानीय युवाओं में इस घोषणा को लेकर खास उत्साह दिखा। कई विद्यार्थियों ने बताया कि अब उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बाहर जाने की मजबूरी नहीं रहेगी।
नेशनल हाईवे 130डी से सुधरेगी कनेक्टिविटी
गढ़बेंगाल चौक से बखरूपारा मार्ग के बीच नेशनल हाईवे 130डी के मजबूतीकरण कार्य को भी इस दौरे की अहम उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से खराब सड़क और जर्जर मार्ग के कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानी होती थी।
अब इस सड़क के सुदृढ़ीकरण से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय तक पहुंच आसान होने से स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर होगी।
11 विकास कार्यों से बदलेगा जिले का स्वरूप
जिले में जिन 11 कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया, उनमें नगरीय निकाय और डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) मद से स्वीकृत विभिन्न आधारभूत परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें सड़क, भवन निर्माण, सामुदायिक सुविधाएं और शहरी विकास से जुड़े कार्य प्रमुख हैं।
जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद नारायणपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का स्तर बेहतर होगा। खासतौर पर शिक्षा, आवागमन और नागरिक सुविधाओं के क्षेत्र में इसका सीधा लाभ मिलेगा।
हितग्राहियों को मिली आर्थिक सहायता और आवास प्रमाण पत्र
कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभ भी वितरित किया गया। राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत तीन हितग्राहियों को 20-20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई।
इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत 25 हितग्राहियों को आवास अनुज्ञा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण पत्र मिलते ही लाभार्थियों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। कई महिलाओं ने इसे अपने जीवन का बड़ा दिन बताया।
सरकार की प्राथमिकता—समग्र विकास
वन मंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे इस क्षेत्र में अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और विकास कार्यों की बढ़ती गति ने नारायणपुर और अबूझमाड़ को नई दिशा दी है।
“अब यह क्षेत्र सिर्फ संघर्ष की पहचान नहीं, बल्कि विकास की नई मिसाल बन रहा है,” उन्होंने कहा।
नक्सल प्रभाव घटने से खुला विकास का रास्ता
कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि क्षेत्र में नक्सल प्रभाव कम होने से विकास कार्यों को गति मिली है। पहले जहां निर्माण कार्यों में बाधाएं आती थीं, वहीं अब प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समन्वय से योजनाएं तेजी से धरातल पर उतर रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों, स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
टीमवर्क से मिल रही सफलता
वन मंत्री ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीमवर्क के कारण ही योजनाएं समय पर पूरी हो पा रही हैं।
उन्होंने अधिकारियों से इसी समन्वय के साथ आगे भी कार्य करते रहने का आह्वान किया, ताकि विकास की गति बनी रहे।
ग्रामीणों में दिखा उत्साह, बढ़ी उम्मीदें
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति इस बात का संकेत थी कि लोग अब विकास को लेकर जागरूक हो चुके हैं। कई ग्रामीणों ने बताया कि पहले विकास की बातें सिर्फ कागजों तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब काम जमीन पर दिखाई दे रहा है।
एक ग्रामीण ने कहा, “अगर सड़क और पढ़ाई की सुविधा अच्छी हो जाए तो हमारे बच्चों का भविष्य बदल सकता है।”
नारायणपुर की बदलती तस्वीर
हाल के वर्षों में नारायणपुर में विकास कार्यों की रफ्तार तेज हुई है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार से जिले की तस्वीर बदलने लगी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इसी गति से योजनाएं लागू होती रहीं, तो आने वाले वर्षों में नारायणपुर बस्तर के विकसित जिलों में शामिल हो सकता है।
आगे की राह
इस दौरे के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करना और उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। खासकर नालंदा परिसर और हाईवे जैसे प्रोजेक्ट्स पर लोगों की निगाहें टिकी हैं।
यदि ये योजनाएं निर्धारित समय सीमा में पूरी होती हैं, तो नारायणपुर के विकास की दिशा और गति दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
नारायणपुर में हुए इस आयोजन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अब बस्तर का यह इलाका तेजी से बदलाव की राह पर है। मंच से किए गए वादों के साथ-साथ जमीन पर शुरू हुए कार्य इस बदलाव की पुष्टि भी करते हैं। अब देखना यह होगा कि यह विकास की रफ्तार कितनी स्थायी और प्रभावी साबित होती है।




