नारायणपुर

बच्चों ने दिखाई राह, वार्डवासियों ने बदली तस्वीर — बम्बूर तालाब बना जनजागरण की मिसाल

प्रशासन का इंतजार छोड़ा, 4 घंटे के श्रमदान से तालाब का एक-चौथाई हिस्सा साफ • हर रविवार जारी रहेगा अभियान

(कैलाश सोनी) नारायणपुर।

जब इरादों में मजबूती और दिलों में अपने गांव-शहर के प्रति लगाव हो, तो बदलाव की कहानी खुद-ब-खुद लिखी जाती है। ऐसा ही प्रेरणादायक दृश्य नारायणपुर जिले के वार्ड क्रमांक 12 कुम्हारपारा में देखने को मिला, जहां वर्षों से उपेक्षा और गंदगी की मार झेल रहे बम्बूर तालाब का कायाकल्प करने का जिम्मा खुद वार्डवासियों ने अपने हाथों में उठा लिया।

रविवार की सुबह कुम्हारपारा का माहौल सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग था। तालाब, जो लंबे समय से जलकुंभियों और खरपतवार की मोटी परत से ढका हुआ था, मानो अपनी सफाई की आस लगाए खामोश खड़ा था। लेकिन इस बार वार्डवासियों ने प्रशासनिक इंतजार की परंपरा को तोड़ते हुए खुद पहल करने का फैसला किया।

दरअसल, शनिवार शाम आयोजित वार्ड बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि रविवार सुबह हर घर से एक व्यक्ति श्रमदान करेगा। तय समय पर महिलाएं, बुजुर्ग और युवा तालाब किनारे पहुंचे, लेकिन गंदगी और दलदल को देखकर कुछ पल के लिए कदम जरूर ठिठक गए।

यहीं से शुरू हुई असली कहानी…

वार्ड के नन्हे बच्चों ने बिना किसी झिझक के तालाब में उतरकर सफाई शुरू कर दी। मासूम हाथों का यह साहसिक कदम ऐसा प्रेरक बना कि देखते ही देखते पूरा वार्ड तालाब में उतर आया। बच्चों के जज्बे ने बड़ों को भी झकझोर दिया और फिर सभी ने एकजुट होकर सफाई अभियान को गति दे दी।

महज 4 घंटे की कड़ी मेहनत ने वह कर दिखाया, जो वर्षों से अधूरा था। तालाब का करीब एक-चौथाई हिस्सा पूरी तरह साफ कर दिया गया। श्रमदान का यह दृश्य न केवल स्वच्छता का संदेश दे रहा था, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक जिम्मेदारी का भी जीवंत उदाहरण बन गया।

इस जनअभियान की गूंज नगर तक पहुंची, तो पार्षद प्रवीण जैन और नगरपालिका अध्यक्ष इंद्र प्रसाद बघेल भी खुद को रोक नहीं पाए। दोनों जनप्रतिनिधि भी तालाब में उतरकर श्रमदान में शामिल हुए और वार्डवासियों का हौसला बढ़ाया।

गौरतलब है कि बम्बूर तालाब लंबे समय से विवाह, मृत्यु संस्कार और अन्य सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। लेकिन गंदगी और अव्यवस्था के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

अब वार्डवासियों ने संकल्प लिया है कि जब तक तालाब अपने पुराने स्वरूप में पूरी तरह नहीं लौट आता, तब तक हर रविवार इसी तरह सामूहिक श्रमदान जारी रहेगा।

नगरपालिका अध्यक्ष इंद्र प्रसाद बघेल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्य केवल सफाई नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नगरपालिका इस अभियान में हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

कुम्हारपारा के जागरूक नागरिकों ने यह साबित कर दिया है कि बदलाव के लिए केवल योजनाओं की नहीं, बल्कि पहल की जरूरत होती है। बम्बूर तालाब की यह कहानी अब पूरे जिले के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है—यह संदेश देते हुए कि स्वच्छता केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।

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