नारायणपुर

हथियार फैक्ट्री पर करारी चोट: अबूझमाड़ में नक्सलवाद की रीढ़ टूटी

डीआरजी की बड़ी कार्रवाई, नक्सलियों का छिपाया गया ‘हथियार कारखाना’ उजागर

हथियार फैक्ट्रकोरसकोड़ों–पांगुड़–कंदुलपार इलाके से हजारों पाइप, 1000 किलो एल्यूमिनियम व मशीनरी बरामद

बिना किसी जनहानि अभियान सफल, नक्सल उन्मूलन मुहिम को मिली निर्णायक धार

कैलाश सोनी- नारायणपुर। अबूझमाड़ के घने जंगलों में नक्सलियों द्वारा वर्षों से खड़ा किया गया अवैध ‘हथियार कारखाना’ आखिरकार सुरक्षा बलों की सूझबूझ और साहस के सामने ढह गया। छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल उन्मूलन नीति के तहत संचालित “माड़ बचाओ” अभियान को बड़ी कामयाबी मिली है। जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और नारायणपुर पुलिस ने थाना सोनपुर क्षेत्रांतर्गत कोरसकोड़ों–पांगुड़–कंदुलपार बेल्ट में छिपाकर रखे गए नक्सली हथियार फैक्ट्री के भारी डंप का पर्दाफाश कर दिया।

विश्वसनीय खुफिया सूचना के आधार पर की गई इस सटीक कार्रवाई में लगभग 1000 किलोग्राम एल्यूमिनियम छड़ों के साथ हजारों की संख्या में लोहे के पाइप, बीजीएल सेल, वेल्डिंग मशीनरी, इलेक्ट्रिक कटर, ग्राइंडर मशीन सहित हथियार निर्माण में प्रयुक्त होने वाला व्यापक सामग्री भंडार बरामद किया गया। अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि बिना किसी जनहानि और बल क्षति के पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।

खुफिया सूचना से सर्च ऑपरेशन तक

पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोनपुर थाना क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा हथियार निर्माण से जुड़े सामान छिपाकर रखने की पुख्ता जानकारी मिली थी। इस इनपुट के बाद डीआरजी ने अपने नियमित एरिया डॉमिनेशन पेट्रोल में रणनीतिक बदलाव करते हुए सघन सर्च ऑपरेशन चलाया। दुर्गम पहाड़ियों, नालों और जंगलों के बीच छिपाए गए डंप तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन जवानों की सतर्कता और इलाके की गहन मैपिंग ने ऑपरेशन को सफल बनाया।

हाल के महीनों में कोरसकोड़ों क्षेत्र में बीएसएफ के साथ नवीन सुरक्षा कैंप की स्थापना से सुरक्षा तंत्र को मजबूती मिली है। सड़क, पुल-पुलिया निर्माण और अंदरूनी गांवों तक योजनाओं की पहुंच ने आम नागरिकों के मन में भरोसा पैदा किया है। इसका प्रत्यक्ष परिणाम यह सामने आया कि स्थानीय लोगों द्वारा नक्सली गतिविधियों की सूचनाएं सुरक्षा बलों तक पहुंचने लगी हैं, जिसने इस बड़ी कार्रवाई की जमीन तैयार की।

हथियार निर्माण की रीढ़ पर वार

बरामद सामग्री की सूची यह बताने के लिए काफी है कि नक्सली किस पैमाने पर देसी हथियार और विस्फोटक उपकरण तैयार करने की तैयारी में थे। लोहे और एल्यूमिनियम के पाइप, बीजीएल सेल, खाली मैगजीन, वेल्डिंग उपकरण, कटर व्हील, ग्राइंडर मशीन—यह पूरा ढांचा नक्सलियों की तथाकथित ‘फैक्ट्री’ का संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डंप के पकड़े जाने से नक्सली नेटवर्क को हथियार आपूर्ति में बड़ा झटका लगेगा और उनके हिंसक मंसूबों पर विराम लगेगा।

विश्वास का पुल और सुरक्षा की मजबूत दीवार

अबूझमाड़ जैसे अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा कैंपों की स्थापना केवल सैन्य उपस्थिति नहीं, बल्कि विकास की राह खोलने वाला कदम साबित हो रही है। प्रशासन द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने से नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों में भरोसे का माहौल बना है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों का सहयोग नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है।

लगातार तेज हो रहा ‘माड़ बचाओ’ अभियान

नारायणपुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान अब केवल मुठभेड़ों तक सीमित नहीं रहा। रणनीति बदली है—अब सुरक्षा बल क्षेत्र में स्थायी उपस्थिति, जनसंपर्क और विकास के साथ-साथ खुफिया तंत्र को मजबूत कर नक्सल नेटवर्क की जड़ों पर वार कर रहे हैं। नए कैंपों के खुलने से नक्सलियों की आवाजाही सीमित हुई है और उनके सुरक्षित ठिकानों पर दबाव बढ़ा है।

बरामदगी का विस्तृत ब्यौरा

तलाशी के दौरान बरामद प्रमुख सामग्री में सैकड़ों लोहे के पाइप, एल्यूमिनियम छड़ें, बीजीएल सेल, खाली मैगजीन, वेल्डिंग होल्डर, ग्राइंडर मशीन, कटर व्हील, मोटर, पंप, इलेक्ट्रॉनिक स्केल सहित अन्य मशीनरी शामिल है। यह सामग्री हथियार निर्माण, मरम्मत और परिवहन में उपयोग होने वाली पूरी श्रृंखला को दर्शाती है। सभी सामग्री को सुरक्षित रूप से थाना सोनपुर लाकर सीलबंद किया गया है और विधिसम्मत कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

शांति की ओर एक और मजबूत कदम

पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा और तय समय-सीमा के भीतर नक्सलमुक्त बस्तर का लक्ष्य साकार किया जाएगा। सुरक्षा बलों की यह मुस्तैदी क्षेत्र में शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

अबूझमाड़ के जंगलों में वर्षों से छिपी हिंसा की फैक्ट्रियों पर यह कार्रवाई केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि नक्सलवाद के ताबूत में ठोकी गई एक और मजबूत कील है। यह संदेश साफ है—अब बस्तर में बंदूक की जगह विकास की आवाज गूंजेगी, और भय के अंधेरे में रोशनी की लकीरें और चौड़ी होंगी।

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