नारायणपुर

खौफ के गढ़ में अब गूंजेगा तिरंगा, 90 से ज्यादा गांवों में पहली बार लहराएगा राष्ट्रध्वज

12 से 14 अगस्त तक 150 किमी की ‘बस्तर तिरंगा यात्रा’ : नारायणपुर से दंतेवाड़ा, बीजापुर होते हुए कुर्रेगुटालू पहाड़ी तक पहुंचेगी यात्रा

31 मार्च के बाद पहले स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के कोने-कोने में तिरंगे की आन-बान-शान का संदेश, 31 नक्सल हिंसा स्थलों पर शहीदों को नमन

चिंगावरम, एर्राबोर, मनीकोंटा और ताड़मेटला जैसे रक्तरंजित स्थलों से जुटाई जाएगी पवित्र मिट्टी, रायपुर में बनेगा शहीद स्मारक एवं संग्रहालय

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। देश की आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर शुरू हुए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक बस्तर संभाग में 12 अगस्त से अभूतपूर्व और ऐतिहासिक ‘बस्तर तिरंगा यात्रा’ शुरू होगी। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में तीन दिवसीय यात्रा का मार्ग, इसके उद्देश्य और नक्सलवाद के खात्मे के बाद बदलते बस्तर की तस्वीर सामने रखी। उन्होंने कहा कि यह यात्रा ‘बस्तर में विकास, देश में विश्वास’ स्थापित करने का संदेश लेकर चलेगी।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में माओवाद के खिलाफ चलाए गए निर्णायक अभियान के सुखद परिणाम सामने आए हैं। 31 मार्च 2026 के बाद आ रहे पहले राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के कोने-कोने तक भारत का तिरंगा पूरी आन, बान और शान से लहराएगा।

नारायणपुर से शुरू होगी 150 किमी की यात्रा

‘बस्तर तिरंगा यात्रा’ 12 अगस्त को दोपहर 12 बजे नारायणपुर से शुरू होगी। यात्रा विभिन्न गांवों से गुजरते हुए करीब 150 किलोमीटर का सफर तय कर दंतेवाड़ा पहुंचेगी।

13 अगस्त की सुबह दंतेवाड़ा से स्थानीय नागरिकों और जवानों के साथ यात्रा बीजापुर के लिए रवाना होगी। इसके बाद 14 अगस्त की सुबह बीजापुर से प्रस्थान कर आवापल्ली, उसूर, कलगम और ताड़पाला होते हुए कुर्रेगुटालू पहाड़ी पहुंचेगी, जहां यात्रा का समापन होगा।

यह यात्रा बस्तर के उन अति-संवेदनशील और भीषण माओवाद प्रभावित इलाकों से होकर गुजरेगी, जहां कभी नक्सली हिंसा का खौफ रहा है।

आजादी के बाद पहली बार 90 से ज्यादा गांवों में तिरंगा

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जनवरी 2024 से अब तक बस्तर के अनेक दुर्गम गांवों में लगातार राष्ट्रीय पर्वों पर ध्वजारोहण किया गया है। इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर संभाग के 90 से अधिक ऐसे गांवों में पहली बार तिरंगा लहराया जाएगा, जहां आजादी के बाद अब तक राष्ट्रध्वज फहराने का अवसर नहीं मिला था।

उन्होंने कहा कि यह बात पूरी तरह गलत है कि बस्तर में शांति नहीं आई है या सुरक्षा बलों को यहां से हटा देना चाहिए। उनके अनुसार, आज बस्तरवासी सही मायनों में खुद को स्वतंत्र महसूस कर रहे हैं और अब ऐसी कोई ताकत नहीं बची है, जो भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान कर सके।

31 रक्तरंजित स्थलों पर शहीदों को श्रद्धांजलि

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि ‘बस्तर तिरंगा यात्रा’ केवल राष्ट्रध्वज के सम्मान की यात्रा नहीं, बल्कि नक्सली हिंसा में प्राण गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों और वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संकल्प भी है।

यात्रा के दौरान वे 31 प्रमुख स्थानों पर पहुंचेंगे, जहां माओवादियों ने जघन्य घटनाओं को अंजाम दिया था। इन स्थानों पर पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

चिंगावरम : 31 निर्दोषों की हत्या

यात्रा चिंगावरम पहुंचेगी, जहां नक्सलियों ने 31 निर्दोष लोगों की नृशंस हत्या की थी।

एर्राबोर : 220 घर फूंके, 33 ग्रामीणों की हत्या

एर्राबोर में नक्सली हिंसा की भयावह यादें आज भी जुड़ी हैं। यहां 220 घरों को आग के हवाले किया गया था और 33 निर्दोष ग्रामीणों की हत्या कर दी गई थी। तिरंगा यात्रा इन शहीदों को भी नमन करेगी।

मनीकोंटा : 15 आदिवासी भाइयों की हत्या

मनीकोंटा में नक्सलियों ने 15 आदिवासी भाइयों की हत्या की थी। यात्रा यहां पहुंचकर बलिदानियों की स्मृति को नमन करेगी।

ताड़मेटला : 76 जवानों का सर्वोच्च बलिदान

तिरंगा यात्रा ताड़मेटला भी पहुंचेगी, जहां देश के 76 वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। यात्रा के दौरान इन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।

15 अगस्त को झीरम घाटी से देंगे संदेश

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि 15 अगस्त को वे झीरम घाटी में मौजूद रहेंगे। यहां वे झीरम कांड में शहीद हुए लोगों को नमन करेंगे और संदेश देंगे कि जिस नक्सलवाद ने झीरम कांड जैसी विभीषिका को जन्म दिया था, उसका अब पूर्ण अंत हो चुका है।

उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा बस्तर के अतीत के दर्द को याद करते हुए नए और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक बनेगी।

शहीदों की मिट्टी से बनेगा रायपुर में स्मारक और संग्रहालय

उप मुख्यमंत्री ने यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि यात्रा जिन-जिन स्थानों से होकर गुजरेगी और जहां जवानों तथा स्थानीय निर्दोष नागरिकों ने बलिदान दिया है, उन स्थानों की पवित्र मिट्टी एकत्र की जाएगी।

इस पवित्र माटी का उपयोग रायपुर में बनने वाले शहीद स्मारक एवं संग्रहालय में किया जाएगा। इसका उद्देश्य बस्तर की नक्सल हिंसा में बलिदान देने वाले जवानों और ग्रामीणों की स्मृतियों को स्थायी रूप से संजोना होगा।

500 से ज्यादा स्कूल, चौराहे और सामुदायिक भवन होंगे शहीदों के नाम

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 15 अगस्त को बड़ी घोषणा करेंगे। इसके तहत बस्तर संभाग के 500 से अधिक स्कूलों, चौराहों और सामुदायिक भवनों का नामकरण अमर बलिदानियों के नाम पर किया जाएगा।

इस पहल के जरिए आने वाली पीढ़ियों को बस्तर की नक्सल हिंसा के दौरान देश और समाज के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों और निर्दोष नागरिकों के योगदान से परिचित कराया जाएगा।

युवा, जनजातीय समाज और आम नागरिक होंगे सहभागी

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि ‘बस्तर तिरंगा यात्रा’ में स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अधिकारी, युवा, जनजातीय समाज के प्रमुख, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि इन सभी की भागीदारी से यात्रा बस्तर के नए, सुरक्षित और विकासोन्मुख भविष्य का संदेश पूरे देश तक पहुंचाएगी। यात्रा का उद्देश्य बस्तर में शांति और विकास के साथ-साथ देश के प्रति विश्वास और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान की भावना को मजबूत करना है।

यात्रा का संदेश स्पष्ट—बदल रहा बस्तर

उप मुख्यमंत्री के अनुसार, कभी माओवाद के खौफ से पहचाने जाने वाले बस्तर के वही इलाके अब तिरंगे की शान, विकास की गति और सुरक्षा के विश्वास के साथ नई पहचान बना रहे हैं। ‘बस्तर तिरंगा यात्रा’ इसी बदलती तस्वीर को देश के सामने रखने का माध्यम बनेगी।

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