अबूझमाड़ में सुरक्षित मातृत्व का भरोसा बन रहे मायका सेंटर
आदेर मायका सेंटर में शांति का सुरक्षित प्रसव, 2.9 किलो की स्वस्थ बच्ची ने लिया जन्म

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। अबूझमाड़ के दुर्गम और वनांचल क्षेत्रों में सुरक्षित मातृत्व की दिशा में मायका सेंटर महिलाओं के लिए भरोसे का केंद्र बनते जा रहे हैं। बरसात में नदी-नालों के उफान और दुर्गम रास्तों के कारण स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में प्रसव से पहले ही गर्भवती महिलाओं को मायका सेंटर में ठहराकर स्वास्थ्य विभाग सुरक्षित प्रसव की तैयारी सुनिश्चित कर रहा है।

इसी क्रम में विकासखंड ओरछा के आदेर मायका सेंटर में ग्राम हितुल निवासी शांति, पति बोमधा का 19 अगस्त को सुबह 10 बजे सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गया। शांति ने 2.9 किलोग्राम वजन की स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं तथा उन्हें आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।
शांति का मायका सेंटर में पंजीयन 6 फरवरी 2026 को किया गया था। गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से उनकी नियमित निगरानी, स्वास्थ्य जांच और आवश्यक देखभाल की गई। इसके बाद आदेर मायका सेंटर में सुरक्षित प्रसव कराया गया।
दूरी और दुर्गमता की चुनौती से राहत
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में मायका सेंटर गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन केंद्रों में प्रसव पूर्व जांच, स्वास्थ्य निगरानी, पौष्टिक भोजन और आवश्यक चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे प्रसव के समय महिलाओं को लंबी दूरी तय करने और दुर्गम रास्तों की परेशानी से बचाया जा रहा है।
आठ सेंटरों में अब तक 75 सुरक्षित प्रसव
जिले में वर्तमान में 8 मायका सेंटर संचालित हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जून में 24, जुलाई में 27 और अगस्त में अब तक 24 प्रसव इन केंद्रों में कराए जा चुके हैं। इस तरह अब तक कुल 75 सुरक्षित संस्थागत प्रसव मायका सेंटरों के माध्यम से हुए हैं।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि अबूझमाड़ के किसी भी गांव की गर्भवती महिला दूरी और दुर्गमता के कारण सुरक्षित प्रसव की सुविधा से वंचित न रहे। मायका सेंटर इसी उद्देश्य को धरातल पर साकार करते हुए माताओं और नवजातों को सुरक्षित शुरुआत देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।




