अबूझमाड़ में आईटीबीपी बनी जीवन रक्षक, 12 दिन से बीमार युवती को पहुंचाया अस्पताल
बारिश में दुर्गम रास्तों की चुनौती के बीच 8 जवान और मेडिक्स ने संभाला मोर्चा, पैदल-मोटरसाइकिल और एंबुलेंस से हुआ रेस्क्यू

नारायणपुर, 20 अगस्त। अबूझमाड़ के घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में तैनात 29वीं वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान एक बार फिर सुरक्षा प्रहरी के साथ जीवन रक्षक की भूमिका में नजर आए। बारिश के कारण बदहाल कच्चे रास्तों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जवानों ने 12 दिनों से अत्यधिक मासिक रक्तस्राव से पीड़ित 17 वर्षीय युवती को सुरक्षित रेस्क्यू कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओरछा पहुंचाया।
मामला अबूझमाड़ के कुमनार गांव का है। युवती करू, पुत्री मंगली, की तबीयत खराब होने की सूचना 18 अगस्त को कुमनार स्थित 29वीं वाहिनी आईटीबीपी की पोस्ट तक पहुंची। सूचना मिलते ही निरीक्षक संतोष कुमार झा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पोस्ट पर ही युवती का प्राथमिक चिकित्सकीय परीक्षण कराया। चिकित्सकीय परामर्श के बाद उसे तत्काल उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओरछा ले जाने की सलाह दी गई।
500 मीटर पैदल, फिर मोटरसाइकिल से रेस्क्यू
मौसम और रास्ते की चुनौती को देखते हुए आईटीबीपी ने बिना समय गंवाए रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सहायक उप निरीक्षक रसपाल सिंह के नेतृत्व में आठ जवानों और एक मेडिक्स की टीम गठित की गई। टीम ने पोस्ट कुमनार से करीब 500 मीटर तक पैदल चलकर युवती को आगे मोटरसाइकिल तक पहुंचाया।
रेस्क्यू टीम पांच मोटरसाइकिलों के साथ पोस्ट कुमनार से पोस्ट दिवालूर पहुंची और वहां से पोस्ट बोटेर की ओर रवाना हुई। बारिश से फिसलन भरे कच्चे रास्ते, घना जंगल, ऊबड़-खाबड़ मार्ग और जगह-जगह जलभराव के बीच जवान लगातार आगे बढ़ते रहे।
नाला पार कर एंबुलेंस तक पहुंचाया
करीब शाम 5:30 बजे टीम पोस्ट कुदमेल और अबूझमाड़ क्षेत्र के बीच स्थित नाले तक पहुंची। इसके आगे का रास्ता एंबुलेंस से तय किया गया। जहां तक एंबुलेंस पहुंचना संभव था, वहां तक आईटीबीपी की एंबुलेंस से युवती को आगे ले जाया गया।
पूरे अभियान के दौरान आईटीबीपी के मेडिक्स ने युवती की चिकित्सकीय स्थिति पर लगातार नजर रखी। कठिन रास्तों और खराब मौसम के बावजूद टीम ने देर शाम तक युवती को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओरछा पहुंचाया, जहां उसे आगे के उपचार के लिए भर्ती कराया गया।
सड़क नहीं, हौसला बना रास्ता
अबूझमाड़ में बारिश के दौरान कई गांवों तक चार पहिया वाहन पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आईटीबीपी की टीम ने पैदल, मोटरसाइकिल और एंबुलेंस के जरिए रेस्क्यू पूरा कर यह संदेश दिया कि दुर्गम परिस्थितियां भी मानव जीवन बचाने के संकल्प के आगे बाधा नहीं बन सकतीं।
युवती के परिजनों ने संकट की घड़ी में मदद पहुंचाने के लिए आईटीबीपी के जवानों का आभार जताया। 29वीं वाहिनी आईटीबीपी का यह प्रयास सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय जिम्मेदारी निभाने की मिसाल बनकर सामने आया है।




