अबूझमाड़ का ‘फुटु’ छाया बाजार, डेली मार्केट में उमड़ी खरीदारों की भीड़
बारिश के बाद जंगलों से बड़ी मात्रा में पहुंचा जंगली मशरूम, कीमतों में आई गिरावट | ग्रामीणों की बढ़ी आमदनी, पारंपरिक स्वाद के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह

नारायणपुर। लगातार हो रही बारिश के बीच अबूझमाड़ के जंगलों से निकलने वाला दुर्लभ और स्वादिष्ट जंगली मशरूम ‘फुटु’ इन दिनों नारायणपुर के डेली मार्केट की सबसे बड़ी पहचान बन गया है। मंगलवार को बाजार में फुटु की इतनी अधिक आवक हुई कि पूरा डेली मार्केट इसकी रौनक से भर उठा। सुबह से ही फुटु खरीदने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बाजार में हर ओर फुटु की दुकानें सजी नजर आईं और खरीदार अपनी पसंद का जंगली मशरूम लेने के लिए उत्साह के साथ खरीदारी करते दिखाई दिए।

बारिश के मौसम में अबूझमाड़ के घने जंगलों से ग्रामीण बड़ी मेहनत और सावधानी के साथ फुटु एकत्र कर बाजार तक पहुंचाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह मौसम उनके लिए अतिरिक्त आय का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। लगातार बारिश के बाद जब धूप निकलती है, तब जंगलों में दीमक के टीलों पर प्राकृतिक रूप से फुटु उग आता है। इसकी पहचान और संग्रह का पारंपरिक ज्ञान स्थानीय ग्रामीणों के पास पीढ़ियों से मौजूद है। इसी वजह से वे इसे सावधानीपूर्वक निकालकर बिक्री के लिए बाजार तक लाते हैं।

बंपर आवक से गिरे दाम, खरीदारों के चेहरे खिले
हर वर्ष मौसम की शुरुआत में फुटु की कीमत 100 से 200 रुपये प्रति जुड़ी तक रहती है, लेकिन इस बार जंगलों से अधिक मात्रा में फुटु मिलने के कारण बाजार में इसकी भरपूर आवक हुई है। नतीजतन कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई है और अब 100 रुपये में तीन से चार जुड़ी फुटु आसानी से मिल रहा है। दाम कम होने से खरीदारों में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और लोगों ने बड़ी मात्रा में इसकी खरीदारी की।
साल में कुछ ही दिनों का स्वाद, इसलिए रहती है जबरदस्त मांग
फुटु अपने अनोखे स्वाद, प्राकृतिक सुगंध और पौष्टिक गुणों के कारण लोगों की पहली पसंद माना जाता है। स्थानीय लोग इसे पारंपरिक व्यंजन के रूप में बड़े चाव से बनाते और खाते हैं। चूंकि यह केवल बारिश के मौसम में सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होता है, इसलिए इसकी मांग हर साल बनी रहती है। बाजार पहुंचे लोगों का कहना है कि फुटु का स्वाद अन्य मशरूम से अलग होता है और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा सहारा
डेली मार्केट में फुटु की बढ़ती आवक से न केवल बाजार की रौनक लौट आई है, बल्कि अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों के ग्रामीणों को भी अच्छी आमदनी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। यह मौसमी वन उपज स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनती जा रही है। जंगलों से मिलने वाला यह प्राकृतिक उत्पाद आदिवासी अंचल की पारंपरिक जीवनशैली, जैव विविधता और आजीविका का अभिन्न हिस्सा है। बारिश के मौसम में फुटु की बिक्री से सैकड़ों ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलती है।




